12वीं के बाद ऐसे करें सही करियर का चुनाव, सही फैसले से होगा सुनहरा भविष्य, इन बातों का रखें ध्यान
12वीं के बाद करियर चयन को लेकर अगर कोई असमंजस है तो असमंजस दूर करने के लिए पूरी रिपोर्ट पढ़ें...

Published : April 20, 2026 at 10:57 AM IST
कुरुक्षेत्र: 12वीं की परीक्षा के बाद जहां छात्र अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं. वहीं, अभिभावक और बच्चे भविष्य को लेकर गहन चिंतन में डूबे हुए हैं. यह समय केवल अंकों का नहीं, बल्कि करियर की दिशा तय करने का भी होता है. परिवारों में इस दौरान तनाव, उम्मीद और असमंजस का माहौल रहता है. दरअसल, 12वीं के बाद चुना गया रास्ता ही आगे के जीवन की नींव रखता है. ऐसे में सही जानकारी और समझ बेहद जरूरी हो जाती है.
करियर का टर्निंग पॉइंट क्यों है 12वीं के बाद का समय: इस बारे में अधिक जानकारी के लिए ईटीवी भारत ने करियर काउंसलर व कौशिक क्लासेस इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर विवेक कौशिक से बातचीत की. विवेक कौशिक ने कहा कि, "12वीं के बाद का समय किसी भी छात्र और उसके परिवार के लिए टर्निंग पॉइंट होता है. यह केवल करियर का नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और रिश्तों का भी सवाल है. इस समय लिया गया निर्णय लंबे समय तक प्रभाव डालता है. इसलिए जल्दबाजी या दबाव में निर्णय लेने की बजाय सोच-समझकर कदम उठाना जरूरी है."
स्ट्रीम सिस्टम और बदलते विकल्प: भारत में 11वीं कक्षा से ही छात्रों को स्ट्रीम चुननी होती है, जैसे-मेडिकल, नॉन-मेडिकल, कॉमर्स और आर्ट्स. इस बारे में विवेक कौशिक कहते हैं कि, "पहले केवल दो-तीन स्ट्रीम का ही दबदबा था, जिससे बच्चे सीमित विकल्पों में बंध जाते थे, लेकिन अब शिक्षा प्रणाली में कई नए अवसर खुले हैं. आज के समय में हर स्ट्रीम में विविध करियर विकल्प मौजूद हैं, जिससे छात्र अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ सकते हैं."
मेडिकल स्ट्रीम, केवल MBBS तक सीमित नहीं: मेडिकल स्ट्रीम के छात्रों के लिए सबसे पहला बड़ा एग्जाम NEET होता है. लेकिन इसे लेकर कई भ्रम हैं. विवेक कौशिक ने इस बारे में बताया कि, "NEET केवल MBBS के लिए नहीं है, बल्कि कई अन्य मेडिकल फील्ड्स में भी इसका उपयोग होता है.अच्छे अंक आने पर छात्र MBBS या BDS (डेंटल) में प्रवेश पा सकते हैं. वहीं अन्य विकल्प भी मौजूद हैं, जो छात्रों को एक स्थिर और सम्मानजनक करियर दे सकते हैं."
मध्यम अंक वालों के लिए भी मजबूत विकल्प: हर छात्र टॉप रैंक नहीं ला पाता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसके पास अवसर नहीं हैं. ऐसे स्टूडेंट्स के लिए विवेक कौशिक कहते हैं कि, "मीडियम नंबर आने पर निराश होने की जरूरत नहीं है, बल्कि विकल्पों को समझकर आगे बढ़ना चाहिए. ऐसे छात्रों के लिए BSc नर्सिंग, ANM, GNM, BPT (फिजियोथेरेपी), OTT (ऑपरेशन थिएटर टेक्निशियन), रेडियोलॉजी, डाइटिशियन, B.Pharm और D.Pharm जैसे कोर्स उपलब्ध हैं. ये कोर्स न केवल रोजगार देते हैं, बल्कि कई क्षेत्रों में अच्छी आय के अवसर भी प्रदान करते हैं.ठ
कम लागत में बेहतर विकल्प: वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए भी कई अच्छे विकल्प मौजूद हैं. इस बारे में कौशिक बताते हैं कि, "BSc ऑनर्स उन छात्रों के लिए अच्छा विकल्प है जो कम खर्च में पढ़ाई कर आगे टीचिंग या रिसर्च में जाना चाहते हैं. यह रास्ता स्थिर और दीर्घकालिक करियर प्रदान करता है."
नॉन-मेडिकल छात्रों के लिए तकनीकी अवसर: विवेक कौशिक कहते हैं कि, "नॉन-मेडिकल के छात्रों के पास तकनीकी क्षेत्र में व्यापक अवसर हैं. सबसे प्रमुख विकल्प BTech है, जिसमें कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, सिविल इंजीनियरिंग जैसे कई कोर्स शामिल हैं. नॉन-मेडिकल के छात्रों के पास तकनीकी क्षेत्र में भविष्य बनाने के अनगिनत रास्ते हैं." इसके अलावा BSc और MSc के जरिए भी छात्र रिसर्च या शिक्षण के क्षेत्र में जा सकते हैं."
JEE और NEET में कम रैंक: हर साल लाखों छात्र JEE और NEET की परीक्षा देते हैं, लेकिन सीटें सीमित होती हैं. इस बारे में विवेक कौशिक कहते हैं कि, "अगर मेहनत के बावजूद रैंक अच्छी नहीं आती, तो एक साल का गैप लेना गलत नहीं है. जिंदगी बहुत लंबी है, एक साल का गैप कोई समस्या नहीं बल्कि बेहतर तैयारी का अवसर हो सकता है.हालांकि, गैप ईयर तभी लेना चाहिए जब छात्र पूरी गंभीरता और अनुशासन के साथ दोबारा तैयारी करे."
आर्ट्स और कॉमर्स में कम नहीं हैं अवसर: समाज में अक्सर यह धारणा होती है कि आर्ट्स या कॉमर्स कमजोर छात्रों के लिए हैं, लेकिन यह पूरी तरह गलत है. इस बारे में विवेक कौशिक कहते हैं कि, "आज के समय में आर्ट्स और कॉमर्स में भी उतने ही अवसर हैं जितने साइंस में हैं.आर्ट्स के छात्र सिविल सर्विसेज जैसे IAS और IPS जैसे उच्च पदों तक पहुंच सकते हैं. वहीं कॉमर्स के छात्र CA, CS, बैंकिंग और बिजनेस के क्षेत्र में शानदार करियर बना सकते हैं."
मेहनत हर स्ट्रीम में जरूरी: यह धारणा कि साइंस में ज्यादा मेहनत होती है और आर्ट्स में कम, बिल्कुल गलत है. कौशिक कहते हैं कि, "आप चाहे किसी भी स्ट्रीम में हों, सफलता के लिए मेहनत हर जगह करनी पड़ती है. ही दिशा, नियमित प्रयास और समर्पण ही सफलता की कुंजी है."
करियर चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान: विवेक कौशिक कहते हैं कि, " करियर का चुनाव केवल अंकों के आधार पर नहीं होना चाहिए. छात्रों को अपनी रुचि, क्षमता और दीर्घकालिक लक्ष्य को ध्यान में रखना चाहिए. साथ ही, करियर के भविष्य, रोजगार के अवसर और आर्थिक स्थिति का भी विश्लेषण जरूरी है.परिवार को भी बच्चों पर अपनी पसंद थोपने की बजाय उनके निर्णय में सहयोग करना चाहिए."
अभिभावकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण: इस पूरे दौर में अभिभावकों की भूमिका बेहद अहम होती है. विवेक कौशिक कहते हैं, "हर बच्चा यूनिक होता है और हर किसी का विकास अलग समय पर होता है. 12वीं के अंक केवल एक पड़ाव हैं, मंजिल नहीं.अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को समझें, उनका मनोबल बढ़ाएं और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन दें."
मानसिक स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान: विवेक कौशिक ने आगे कहा कि, "करियर के दबाव में कई बार छात्र मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं. ऐसे में परिवार और शिक्षकों को उनकी भावनाओं को समझना चाहिए. बच्चों को यह एहसास दिलाना जरूरी है कि असफलता अंत नहीं है, बल्कि सीखने का एक हिस्सा है. "
सही जानकारी ही सही निर्णय की कुंजी : विवेक कौशिक ने अंत में कहा कि, "12वीं के बाद करियर का चुनाव जीवन का एक अहम मोड़ होता है. सही जानकारी, संतुलित सोच और परिवार का सहयोग इस फैसले को आसान बना सकते हैं.हर छात्र के लिए सफलता का रास्ता अलग होता है. जरूरत है उसे पहचानने और उस पर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की."

