सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत परिसीमन व पुनर्गठन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली एसएलपी की खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब मामले में दखल दिया तो ग्राम पंचायतों की सीमाओं में बदलाव करना पड़ेगा. पूरा चुनाव कार्यक्रम ही प्रभावित होगा.

Published : January 5, 2026 at 8:25 PM IST
जयपुर: सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश में पंचायत चुनाव का रास्ता साफ करते हुए स्पष्ट किया है कि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया तय समय 15 अप्रैल 2026 तक पूरी कर ली जाए. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की खंडपीठ ने यह आदेश राजस्व ग्राम सिंहानिया सहित अन्य गांवों के निवासियों की एसएलपी को खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो इस स्तर पर मामले में दखल देना उचित व व्यावहारिक नहीं है.
एसएलपी में राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ के 14 नवंबर 2025 के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें परिसीमन की प्रक्रिया 31 दिसंबर तक पूरा करने और ग्राम पंचायत व निकायों के चुनाव एक साथ 15 अप्रैल 2026 तक कराने का निर्देश दिया था. प्रार्थियों का कहना था कि परिसीमन की प्रक्रिया के तहत उनके गांवों को बहुत दूर स्थित एक अन्य ग्राम पंचायत से जोड़ा है, जहां पहुंचने में दुर्गम भौगोलिक स्थिति, सड़क संपर्क की कमी और दूरी संबंधी दिशा निर्देशों का भी उल्लंघन होगा. ऐसा परिसीमन स्थानीय निवासियों के लिए प्रशासनिक व व्यावहारिक परेशानी पैदा करेगा और उन्हें पंचायत मुख्यालय पहुंचने में समस्या होगी.
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राज्य सरकार के एएजी शिवमंगल शर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार परिसीमन की पूरी प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 से पहले पूरी की ली गई है और राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियां बनाने का निर्देश दे दिया है. अब चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है. परिसीमन केवल दूरी के आधार पर नहीं होता, बल्कि इसमें कई महत्वपूर्ण कारकों पर भी विचार होता है. इनमें जनसंख्या, प्रशासनिक, सुशासन की आवश्यकता, जिला कलेक्टर स्तर की रिपोर्ट और अंत में राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी भी शामिल है. मामले में दखल दिया तो इसका व्यापक प्रभाव व्यापक पड़ेगा और प्रदेश में कई ग्राम पंचायतों की सीमाओं में बदलाव करना पड़ेगा. इससे पूरा चुनाव कार्यक्रम ही प्रभावित होगा. दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने एसएलपी को खारिज कर दिया है.

