बिहार के इन 6 जिलों में सबसे ज्यादा सड़क हादसे, देश के टाॅप-100 में इनका नाम शामिल
बिहार में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश के लिए केंद्र के 100 जिलों में पटना, मुजफ्फरपुर सहित 6 जिले ‘जीरो फैटेलिटी’ चुने गए. पढ़ें पूरी खबर-

Published : January 9, 2026 at 8:25 AM IST
पटना: देशभर में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़े स्तर पर पहल की जा रही है। इसी कड़ी में देश के उन 100 जिलों को चिन्हित किया गया है, जहां सड़क दुर्घटनाएं और मौतें सर्वाधिक होती हैं। इन जिलों में बिहार के भी छह जिले शामिल हैं. पटना, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, गया और नालंदा को ‘जीरो फैटेलिटी जिला’ के रूप में चिन्हित किया गया है, ताकि यहां विशेष प्रयास कर सड़क हादसों में होने वाली मौतों की संख्या को न्यूनतम या शून्य किया जा सके.
2025 में 484 बैठकें, स्थानीय स्तर पर समीक्षा: परिवहन सह ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर नियमित रूप से विभिन्न समितियों की बैठकें की जा रही हैं। वर्ष 2025 के दौरान कुल 484 बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें जिलों की स्थानीय परिस्थितियों, दुर्घटना संभावित स्थलों और प्रमुख जोखिम कारकों की समीक्षा की गई। इन बैठकों में जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, परिवहन विभाग, पथ निर्माण विभाग और अभियंत्रण विभाग के अधिकारी शामिल रहे।

"दुर्घटनाओं को शून्य करने के लक्ष्य के तहत 1 जनवरी से 31 जनवरी तक सभी जिलों में व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. इनमें रैली, मार्च, मैराथन, वाहन चालकों का प्रशिक्षण, स्कूल-कॉलेजों में सड़क सुरक्षा कार्यक्रम और क्षतिग्रस्त क्रैश बैरियर की मरम्मत जैसे कई कदम शामिल हैं."-श्रवण कुमार, परिवहन सह ग्रामीण विकास मंत्री
ब्लैक स्पॉट और ग्रे स्पॉट पर फोकस: परिवहन मंत्री ने कहा कि सड़क दुर्घटना संभावित क्षेत्रों के रूप में राज्य में ब्लैक स्पॉट और ग्रे स्पॉट की पहचान की गई है. एनएचएआई के आंकड़ों के अनुसार बिहार में वर्ष 2022 में 160, 2023 में 145 और 2024 में 114 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए. वहीं पथ निर्माण विभाग द्वारा 2022 और 2023 में 96-96 तथा 2024 में 91 ब्लैक स्पॉट की पहचान की गई.
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दुर्घटना रोकने के लिए खई इंतजाम: इन स्थानों पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तेज मोड़ों को सुरक्षित बनाना, साइन बोर्ड लगाना, सड़क चौड़ीकरण, बैरिकेडिंग और अन्य सुधारात्मक कार्य किए जा रहे हैं. परिवहन मंत्री ने बताया कि ब्लैक स्पॉट सड़क का वह हिस्सा होता है, जहां पिछले 3 से 5 वर्षों के आंकड़ों के आधार पर सबसे अधिक दुर्घटनाएं और मौतें दर्ज की जाती हैं. इनमें तेज मोड़, खराब डिजाइन वाले चौराहे, अंधेरा क्षेत्र, गड्ढे या अवैध कट जैसे कारण प्रमुख होते हैं.
त्वरित मदद के लिए एंबुलेंस व्यवस्था मजबूत: सड़क दुर्घटना के बाद त्वरित चिकित्सा सहायता को लेकर भी राज्य सरकार सक्रिय है. मंत्री ने बताया कि बिहार में 1500 से अधिक सरकारी और 2000 से ज्यादा निजी एंबुलेंस पंजीकृत हैं. सभी सरकारी एंबुलेंस को इमरजेंसी नंबर 102 से मैप कर दिया गया है, जबकि निजी एंबुलेंस को भी 102 से जोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा गया है. फिलहाल 102 पर कॉल करने पर शहरी क्षेत्रों में 20 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 30 मिनट के भीतर एंबुलेंस पहुंचाने का लक्ष्य पूरा किया जा रहा है.

हिट एंड रन के 20,727 मामले दर्ज: मंत्री ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त लोगों को ई-डीएआर, कैशलेस उपचार और हिट एंड रन मुआवजा योजना का लाभ दिया जा रहा है. भारत सरकार के आई-आरएडी और ई-डीएआर पोर्टल पर अब तक 45,103 दुर्घटनाओं की प्रविष्टि की गई है. इनमें 20,727 हिट एंड रन और 24,376 अन्य मामले शामिल हैं.
1.5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज उपलब्ध: अबतक 18,955 मामलों को ई-डीएआर में प्रोसेस किया जा चुका है, हालांकि केवल 14 प्रतिशत मामलों में पुलिस द्वारा फॉर्म-7 अपलोड किया गया है. वहीं पीएम-राहत (नगद रहित उपचार योजना) के तहत दुर्घटना पीड़ितों को 7 दिनों तक 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है. इसका भुगतान केंद्र सरकार के मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड से किया जाता है.
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हिट एंड रन मुआवजा और गुड सेमेरिटन को इनाम: हिट एंड रन मुआवजा योजना के तहत मृतक के आश्रितों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये दिए जाते हैं. बिहार सरकार ने अब तक 16,319 मृतकों के मामलों में 9,617 आवेदन साधारण बीमा परिषद, मुंबई को भेजे हैं, जिनमें से 73 प्रतिशत मामलों में मुआवजा का भुगतान हो चुका है.
गुड सेमेरिटन को मिलेगा 25000: इसके साथ ही दुर्घटना के बाद गोल्डन ऑवर में घायलों की मदद करने वाले गुड सेमेरिटन (राहगीरों) को 25000 रुपये नकद इनाम देने की भी घोषणा की गई है. मंत्री ने कहा कि इन प्रयासों से न सिर्फ सड़क हादसों में कमी आएगी, बल्कि समय पर मदद मिलने से कई कीमती जानें भी बचाई जा सकेंगी.
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