हाड़ौती के थर्मल प्लांट की स्थिति 'क्रिटिकल', केवल 5 दिन का कोयला शेष, उत्पादन प्रभावित
थर्मल प्लांट में पहुंच रहा कोयला गीला भी आ रहा है. गीला होने के चलते उसकी क्वालिटी ठीक नहीं बैठ रही है.

Published : August 29, 2026 at 3:05 PM IST
कोटा: हाड़ौती संभाग में राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के चार थर्मल प्लांट हैं. चारों थर्मल प्लांट कोयले के स्टॉक के मामले में क्रिटिकल स्थिति में पहुंच गए हैं. इन प्लांट में महज 5 दिन का कोयला बचा है. जिनमें कोटा, कालीसिंध, छबड़ा के दोनों थर्मल प्लांट हैं. कोयले की स्टॉक की कमी के प्रमुख कारणों में कोयला उत्पादन खदानों में पानी भरना है.
हाड़ौती में 4760 मेगावाट क्षमता के ये प्लांट है, लेकिन वर्तमान में उत्पादन 2278 मेगावाट के आसपास ही हो रहा है. यह उत्पादन कुल क्षमता के मुकाबले आधे से कम है. इन चारों थर्मल प्लांट में स्थापित 15 यूनिट में से तीन बंद हैं, जबकि शेष में भी केवल आधा ही उत्पादन हो रहा है. कालीसिंध थर्मल प्लांट क्षमता का केवल 28 फीसदी उत्पादन ही कर पा रहा है.
पढ़ें: राजस्थान में करोड़ों का कोयला घोटाला उजागर, USA से आए कोयले में होती थी मिलावट, एक गिरफ्तार
कालीसिंध में 600 मेगावाट का उत्पादन बंद: झालावाड़ स्थित कालीसिंध थर्मल प्लांट की क्षमता 1200 मेगावाट है, लेकिन 600 मेगावाट की एक नंबर यूनिट में उत्पादन नहीं हो रहा है. बीते दिनों वहां पर बॉयलर ब्लास्ट भी हुआ था. चीफ इंजीनियर वाय एस कटियार का कहना है कि एनुअल मेंटिनेस बकाया था. इसलिए यूनिट को 15 दिन के लिए बंद किया गया है. जल्दी उत्पादन शुरू हो जाएगा. उनका यह भी कहना है कि प्लांट के पास 70 हजार मीट्रिक टन कोयला है.
कोटा में भी केवल 5 दिन का कोयला: कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट की बात की जाए, तो 1240 मेगावाट का यह प्लांट है. इसमें 3 नंबर यूनिट 210 मेगावाट और 6 नंबर यूनिट 195 मेगावाट को बंद किया हुआ है. जबकि शेष 835 मेगावाट की पांच यूनिटों में से 561 मेगावाट उत्पादन हो रहा है. यहां भी कोयले का स्टॉक 70 हजार मीट्रिक टन बना हुआ है. यह कोयला 5 दिन का है, क्योंकि रोज की खपत 12 से 15 हजार मीट्रिक टन है.
इसलिए है क्रिटिकल स्थिति में: थर्मल पावर प्लांट को 3.5 लाख मीट्रिक टन कोयला स्टॉक में रखना होता है, लेकिन यह करीब 25 दिन के आसपास का कोयला होता है, लेकिन प्लांट के पास 5 दिन से भी काम का कोयला शेष है. छबड़ा के सुपर क्रिटिकल मुख्य अभियंता केसी सिंघल का कहना है कि थर्मल प्लांट में 7 दिन से ज्यादा का कोयला रखना होता है, लेकिन अभी उससे भी कम है, लेकिन लगातार सरकार भी प्रयास कर रही है और हमारा मैनेजमेंट बोर्ड भी इसमें लगा हुआ है. हम सब लोग कोशिश कर रहे हैं और लगातार कोयले की रैक भी पहुंच रही है.
पढ़ें: राजस्थान विधानसभा में हंगामा, महंगा कोयला सप्लाई मामला और अधिकारियों के तबादले पर उठा सवाल
सीधा कन्वेयर बेल्ट पर जा रहा: हाड़ौती के थर्मल प्लांट में रोज 12 से 15 हजार मीट्रिक टन कोयले की डिमांड रहती है. लगभग इतनी या इससे कम सप्लाई उन्हें मिल रही है. इसी के चलते लगातार स्टॉक कम हो रहा है. स्टॉक 5 दिन से कम का हो गया है. इसलिए सीधा कोयला कन्वेयर बेल्ट के जरिए बॉयलर में खाली किया जा रहा है. छबड़ा थर्मल (O&M) के चीफ इंजीनियर डीके मित्तल का कहना है कि कोयले की कमी के चलते ही सीधा कन्वेयर बेल्ट पर खाली किया जाता है. जब कोयला ज्यादा आता है, तब उन्हें स्टाॅकयार्ड में भी खाली किया जाता है. वर्तमान में ऐसी स्थिति नहीं है. उन्होंने कहा कि वह लगातार उत्पादन बनाए हुए हैं. क्षमता से कम उत्पादन भी इसलिए हो रहा है. अभी दिन में डिमांड कम हो जाती है. इसीलिए यूनिट्स को कम क्षमता पर चलाए जा रहा है.
छबड़ा की पूरी यूनिट कर रहा उत्पादन: छबड़ा थर्मल पर सुपर क्रिटिकल में दो यूनिट है. प्रत्येक की क्षमता 660 मेगावाट यानी कुल 1320 मेगावाट है. लेकिन दोनों में अभी करीब 753 मेगावाट उत्पादन हो रहा है. जबकि छबड़ा के ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (O&M) थर्मल प्लांट में चार यूनिट हैं. इससे 62 फीसदी उत्पादन हो रहा है. चार यूनिट्स में हर एक 250 मेगावाट की हैं. इनकी कुल क्षमता 1000 मेगावाट है, लेकिन उत्पादन 624 मेगावाट हो रहा है. छबड़ा (O&M) में 62 प्रतिशत और सुपर क्रिटिकल में 57 फीसदी उत्पादन हो रहा है.
गीले कोयले के चलते भी उत्पादन पर असर: थर्मल प्लांट में पहुंच रहा कोयला गीला भी आ रहा है. गीला होने के चलते उसकी क्वालिटी ठीक नहीं बैठ रही है. इसीलिए बॉयलर से उत्पादन भी कम हो रहा है. साथ ही यूनिट्स को भी कम क्षमता पर चलाए जा रहा है. छबड़ा के चीफ इंजीनियर सुपरक्रिटिकल कैलाश चंद सिंघल का कहना है कि जल्द ही हालात सुधरने वाले हैं. कोयले की क्वालिटी में भी सुधार होगा. वर्तमान में क्वालिटी में असर नजर आ रहा है. इसी के चलते उत्पादन भी ठीक से नहीं हो पा रहा है.
'बिजली उत्पादन की लागत भी बढ़ रही': थर्मल से रिटायर्ड और यूनियन के नेता राम सिंह शेखावत ने बताया कि सरकार को बारिश के सीजन की पहले से जानकारी रहती है. थर्मल प्लांट 40 साल से भी ज्यादा समय से सेवाएं दे रहे हैं. ऐसे में पहले से पर्याप्त कोयले की व्यवस्था रखनी चाहिए. वर्तमान में कोयला गीला आने से प्लांट को नुकसान भी हो रहा है. प्लांट की बिजली उत्पादन की लागत बढ़ रही है. यह अधिकारियों का मिसमैनेजमेंट भी कहा जा सकता है. पहले से कॉल के स्टॉक को बढ़ा कर रखना चाहिए.

