बिना आधार-पहचान पत्र के नेपाल में एंट्री पर रोक, टाइट सुरक्षा व्यवस्था से मुश्किल में स्थानीय लोग
नेपाल में पहचान पत्र अनिवार्य होने से सीमावर्ती लोग परेशान हैं, वहीं बांग्लादेशी घुसपैठ रोकने को सीमांचल में सुरक्षा बढ़ी. पढ़ें खबर-

Published : June 5, 2026 at 5:32 PM IST
सीतामढ़ी: भारत नेपाल सीमा पर इन दिनों सुरक्षा व्यवस्था और पहचान सत्यापन को लेकर बढ़ी सख्ती का असर सीमावर्ती इलाकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है. एक ओर नेपाल में प्रवेश के लिए पहचान पत्र की अनिवार्यता से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है, तो दूसरी ओर बांग्लादेशी घुसपैठ की आशंका के मद्देनजर सीमांचल क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं. दोनों घटनाक्रमों ने सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के बीच नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है.
नेपाल सीमा से सटे लोगों की बढ़ी परेशानी : नेपाल में प्रवेश को लेकर लागू किए गए नए नियमों ने भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. नेपाल की राजधानी काठमांडू के मेयर बालेन शाह के हालिया फैसलों और नेपाल प्रशासन की सख्ती के बाद अब भारतीय नागरिकों को नेपाल में प्रवेश के दौरान पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य किया जा रहा है. कई सीमावर्ती क्षेत्रों में बिना आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र के भारतीय नागरिकों को नेपाल में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है, जिसको लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी है.
बिना आधार या पहचान के नेपाल में एंट्री पर रोक : भारत और नेपाल के संबंधों को लेकर वर्षों से यह कहावत प्रचलित है कि दोनों देशों के बीच 'बेटी और रोटी का रिश्ता' है. दोनों देशों के नागरिकों का सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक जुड़ाव इतना गहरा है कि सीमा केवल नक्शे तक सीमित दिखाई नहीं देती है. खासकर सीतामढ़ी, सुरसंड, सोनबरसा, भिट्ठामोड़ और बैरगनिया जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग रोजाना नेपाल आते-जाते रहे हैं. व्यापार, रोजगार, शिक्षा, इलाज और पारिवारिक संबंधों के कारण दोनों देशों के नागरिकों का आवागमन सामान्य बात रही है.
बिना पहचान पत्र के नहीं मिल रही एंट्री : स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय नागरिक बिना किसी विशेष दस्तावेज के नेपाल जा सकते थे. कई लोग केवल मौखिक पहचान या स्थानीय स्तर पर परिचय के आधार पर सीमा पार कर लेते थे. लेकिन अब नेपाल प्रशासन द्वारा पहचान पत्र की जांच सख्ती से की जा रही है. ऐसे में जिन लोगों के पास आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र नहीं है, उन्हें सीमा पर ही रोक दिया जा रहा है.
नेपाल सीमा पर अचानक बढ़ी सख्ती : सीमावर्ती इलाके के लोगों का कहना है कि नेपाल में उनके रिश्तेदार रहते हैं और कई परिवार ऐसे हैं जिनके सदस्य दोनों देशों में बसे हुए हैं. अचानक बढ़ी सख्ती के कारण लोगों को अपने रिश्तेदारों से मिलने और जरूरी कार्यों के लिए नेपाल जाने में परेशानी हो रही है.

व्यापार और रोजगार पर भी असर : सीमा पर रहने वाले छोटे व्यापारियों और मजदूरों का कहना है कि वे रोजाना नेपाल जाकर अपना काम करते हैं. कई लोग नेपाल के बाजारों में खरीदारी और व्यापारिक गतिविधियों के लिए जाते हैं. नई व्यवस्था के कारण उनका काम प्रभावित हो रहा है. जिन लोगों के पास पहचान पत्र नहीं है, उन्हें बार-बार लौटना पड़ रहा है.
छोटे व्यापारियों और मजदूरों को परेशानी : स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि भारत और नेपाल के बीच खुले बॉर्डर की व्यवस्था दोनों देशों के लोगों के लिए सुविधा का माध्यम रही है. लेकिन दस्तावेजों की अनिवार्यता से छोटे व्यापारियों और दैनिक मजदूरों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है.
लोगों में बढ़ रहा आक्रोश : सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों का कहना है कि यह फैसला दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों की भावना के विपरीत है. उनका मानना है कि सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है, लेकिन ऐसे नियमों को लागू करने से पहले सीमावर्ती क्षेत्रों की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए.
स्थानीय ग्रामीणों को हो रही परेशानी : ग्रामीणों का कहना है कि सीमा क्षेत्र में रहने वाले हजारों लोग वर्षों से बिना किसी बाधा के नेपाल आते-जाते रहे हैं. अब अचानक पहचान पत्र की अनिवार्यता से बुजुर्गों, महिलाओं और उन लोगों को कठिनाई हो रही है जिनके पास अभी तक आधार कार्ड या अन्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं.
सुरक्षा कारणों का भी दिया जा रहा हवाला : नेपाल प्रशासन की ओर से सुरक्षा और पहचान सत्यापन को लेकर सख्ती बरतने की बात कही जा रही है. सीमा पार होने वाली गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से पहचान पत्र की जांच को प्राथमिकता दी जा रही है. हालांकि सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग चाहते हैं कि स्थानीय निवासियों के लिए कोई सरल और व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े.
सदियों पुराने रिश्तों पर चर्चा तेज : भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ी सख्ती के बाद एक बार फिर दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों की चर्चा शुरू हो गई है. सीमा क्षेत्र के लोगों का कहना है कि दोनों देशों के बीच केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि पारिवारिक और भावनात्मक संबंध भी जुड़े हुए हैं. ऐसे में किसी भी नई व्यवस्था को लागू करते समय आम लोगों की सुविधा और पारंपरिक रिश्तों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए.
बिना पहचान पत्र के नेपाल एंट्री बंद : फिलहाल सीमा पर पहचान पत्र की जांच जारी है और बिना वैध दस्तावेज के नेपाल में प्रवेश करने वालों को रोका जा रहा है. इससे सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं और स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तथा नाराजगी लगातार बढ़ रही है.
सीमांचल में घुसपैठ रोकने को बढ़ी चौकसी : उधर, पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई के बाद सीमांचल क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं. पश्चिम बंगाल के पानीटंकी से लेकर बिहार के जोगबनी बॉर्डर तक एसएसबी के जवान विशेष निगरानी कर रहे हैं. सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि कुछ लोग सीधे पश्चिम बंगाल या नेपाल के रास्ते बिहार में प्रवेश का प्रयास कर सकते हैं.
नेपाल भारत सुरक्षा एजेंसियों का संयुक्त निगरानी तंत्र : एसएसबी और नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स (एपीएफ) सीमा क्षेत्र में समन्वय के साथ निगरानी बढ़ा रही हैं. प्रमुख चेकपोस्टों पर जांच तेज कर दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है. इसका असर सीमांचल के कई जिलों में दिखाई देने लगा है, जहां पहले की तुलना में सस्ते लॉज खाली हुए हैं और फेरीवालों की संख्या भी कम नजर आ रही है.
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