11 साल में 7 जिलाधिकारी.. फिर भी पूरा नहीं हुआ 105 करोड़ का ये प्रोजेक्ट.. अब 8वें से आस
सीतामढ़ी का ड्रेनेज सिस्टम पिछले 11 सालों से दुरुस्त होने का इंतजार कर रहा है, लेकिन आजतक तस्वीर बदली नहीं है. रिपोर्ट- धर्मेंद्र कुमार झा

Published : September 1, 2026 at 7:09 PM IST
सीतामढ़ी : बिहार के सीतामढ़ी का ड्रेनेज सिस्टम लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है. हल्की बारिश के बाद तो ड्रेनेज सिस्टम का इतना बुरा हाल हो जाता है कि चारों ओर जलभराव ही नजर आता है. इस जलभराव से जो परेशानी होती है, इसका अंदाजा इसे झेलने वाले लोग ही लगा सकते हैं और दूसरों को समझा सकते हैं. सीतामढ़ी शहर को जलजमाव की समस्या से स्थायी निजात दिलाने के लिए वर्ष 2015 में मंजूरी मिली थी. 105 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम योजना 11 साल बाद भी अधूरी है.
जिले की ड्रेनेज सिस्टम बदहाल : सीतामढ़ी शहर के लिए जलजमाव कोई नई समस्या नहीं है। बारिश के मौसम में शहर के कई इलाकों में जलनिकासी बाधित होने के कारण सड़कें और प्रमुख मार्ग पानी में डूब जाते हैं. लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए वर्ष 2015 में सरकार ने करीब 105 करोड़ रुपये की लागत से स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम योजना को मंजूरी दी थी.
11 साल से अधूरा काम : योजना का उद्देश्य शहर में व्यवस्थित नालों का निर्माण कर बारिश के पानी की निकासी को बेहतर बनाना था, ताकि जलजमाव की समस्या से लोगों को राहत मिल सके. योजना की जिम्मेदारी बुडको को दी गई, लेकिन वर्षों गुजरने के बावजूद परियोजना पूरी नहीं हो सकी. इस दौरान सीतामढ़ी जिले में एक के बाद एक कई जिलाधिकारी आए और उनका तबादला होता रहा. करीब 11 साल के लंबे अंतराल में सात डीएम बदल गए, लेकिन 105 करोड़ रुपये की यह योजना अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सकी है.
बदले 7 डीएम लेकिन नहीं बदली समस्या : इस दौरान जिले में सात जिलाधिकारी आए और उनका तबादला हो गया, लेकिन शहर की जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने वाली यह योजना रफ्तार नहीं पकड़ सकी. योजना के निर्माण की जिम्मेदारी बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन यानी बुडको को दी गई थी, लेकिन अब तक यह परियोजना पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी है. नए जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया ने पदभार ग्रहण करते ही योजना की जमीनी हकीकत जानने के लिए शहर का निरीक्षण किया और बीते दिनों ड्रेनेज सिस्टम के कामों का जायजा लिया.

नए डीएम ने किया निरीक्षण : अब सीतामढ़ी के नए जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया ने पदभार संभालते ही इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर सक्रियता दिखाई है. उन्होंने शहर के विभिन्न इलाकों का स्थलीय निरीक्षण कर स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान डीएम ने निर्माण कार्य की प्रगति, कई स्थानों पर अधूरे पड़े नालों और शहर में जलनिकासी की मौजूदा व्यवस्था को देखा.
उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि आखिर इतने वर्षों के बाद भी योजना पूरी क्यों नहीं हो सकी और वर्तमान में इसके तहत कितना काम पूरा हुआ है. नए डीएम के इस निरीक्षण से एक बार फिर शहरवासियों की उम्मीदें बढ़ी हैं कि वर्षों से अधर में लटकी इस योजना को अब गति मिल सकती है.

स्थानीय लोगों में जगी आस: स्थानीय निवासी संजय राय बताते हैं, कब से सुन रहे हैं कि ड्रेनेज सिस्टम बन रहा है. अब नए डीएम के पहल से कुछ होगा, अच्छी बात है. इसके बन जाने से लोग जागरुक होंगे और पानी एक जगह जमा होगा. स्वच्छता बनी रहेगी और लोगों को बीमारियां कम होगी.
"कब से सुन रहे हैं कि आज बन रहा है, कल बन रहा है. लेकिन काम नहीं हुआ है. निर्माण हो जाता तो लोगों को काफी आराम होता."- संजय राय,स्थानीय निवासी

अधूरे नाले और धीमा निर्माण बना चुनौती : स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम योजना के तहत शहर में बारिश के पानी की निकासी के लिए नालों का निर्माण और जलनिकासी की समुचित व्यवस्था विकसित की जानी थी. लेकिन कई स्थानों पर काम अधूरा रहने और योजना के अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ने के कारण इसका पूरा लाभ शहरवासियों को नहीं मिल सका.
उठ रहे सवाल : बारिश के दिनों में जब शहर के कई हिस्सों में पानी जमा होता है, तब इस योजना की उपयोगिता और इसके अधूरे रहने का मुद्दा एक बार फिर सामने आ जाता है. स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 105 करोड़ रुपये की योजना पूरी होने में इतनी लंबी देरी क्यों हुई?

हर बारिश में नारकीय स्थिति : सीतामढ़ी शहर में जलजमाव की समस्या बारिश के साथ और गंभीर हो जाती है. मुख्य सड़कों से लेकर कई मोहल्लों तक पानी जमा होने से लोगों को परेशानी होती है. व्यवसायियों को भी नुकसान उठाना पड़ता है और राहगीरों को जलजमाव से होकर गुजरना पड़ता है.
शहरवासियों का कहना है कि जब सरकार ने 11 साल पहले जलजमाव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए इतनी बड़ी राशि की योजना बनाई थी, तो अब तक इसका पूरा नहीं होना गंभीर सवाल खड़ा करता है. लोगों को उम्मीद थी कि स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम तैयार होने के बाद शहर की जलनिकासी व्यवस्था बेहतर होगी, लेकिन वर्षों बाद भी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया.
"एक जगह पानी के जमा होने से बदबू आती है. नाला बन जाने से लोगों को सुविधा होगी. गंदगी से लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं."- राजकुमार, स्थानीय निवासी

"ड्रेनेज सिस्टम बनने से जनता को काफी फायदा होगा. नए डीएम तनय सुल्तानिया से उम्मीद है कि नया ड्रेनेज सिस्टम जल्द लागू करेंगे. स्वच्छता के लिए यह जरूरी है. बहुत दिनों से सुन रहे हैं कि निर्माण कार्य शुरू है, लेकिन आजतक धरातल पर काम दिखा नहीं है. नए डीएम के आने से उम्मीद जगी है."- कृष्णनंदन कुमार, स्थानीय निवासी

नए डीएम के सामने बड़ी चुनौती: तनय सुल्तानिया के सामने अब इस योजना को धरातल पर उतारने की बड़ी चुनौती है. पदभार संभालने के तुरंत बाद योजना का निरीक्षण करना यह संकेत देता है कि जिला प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से देख रहा है. हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि निरीक्षण के बाद आगे की कार्रवाई क्या होगी. क्या अधूरे निर्माण कार्य को जल्द पूरा कराने के लिए बुडको को समयबद्ध निर्देश दिए जाएंगे? क्या वर्षों से लंबित योजना की तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों को दूर किया जाएगा? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या नए डीएम के कार्यकाल में 105 करोड़ रुपये की यह महत्वाकांक्षी योजना पूरी हो पाएगी?

"सीतामढ़ी नगर निगम बनी है. जलजमाव की समस्या 20 साल पुरानी है. नगर निगम के अंतर्गत 40 वार्ड हैं और सभी की स्थिति नारकीय है. जल संग्रह की स्थापना के लिए 15 सालों से प्रयास हो रहा है लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण निर्माण नहीं हो सका है. आए दिन लोगों को जमजमाव से जूझना पड़ा है. इसके कारण कई बीमारियों से लोगों को जूझना पड़ता है."- रामबाबू शाह, स्थानीय निवासी
शहरवासियों को स्थायी राहत का इंतजार : सीतामढ़ी के लोगों के लिए यह योजना सिर्फ एक सरकारी परियोजना नहीं, बल्कि रोजमर्रा की समस्या से राहत की उम्मीद है. 11 वर्षों से अधूरी पड़ी योजना को लेकर अब लोगों की निगाहें नए जिलाधिकारी के अगले कदम पर हैं. शहरवासियों को उम्मीद है कि स्थलीय निरीक्षण के बाद योजना की कमियों और अड़चनों को चिन्हित कर उसे पूरा कराने की दिशा में ठोस कार्रवाई होगी. अब देखना होगा कि सात जिलाधिकारियों के कार्यकाल में जो योजना गति नहीं पकड़ सकी, वह आठवें डीएम के कार्यकाल में किस रफ्तार से आगे बढ़ती है और सीतामढ़ी शहर को जलजमाव से स्थायी राहत कब मिलती है.
"सीतामढ़ी टाउन के लिए जो जल जमाव की समस्या है, उसके निदान के लिए बुडको के स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज प्रोजेक्ट के लिए लगभग 11 किलोमीटर का मुख्य ड्रेन और अंदर-अंदर 157 किलोमीटर की मिनी ड्रेन सैंक्शन हैं. उसी के कामकाज की हमलोगों समीक्षा करने आए थे. अगल साल के दिसंबर तक काम पूरा करने का लक्ष्य है. लेकिन 6 महीने में मुख्य हिस्सों के कामों को पूरा कराना हमारी प्राथमिकता है."- तनय सुल्तानिया, डीएम,सीतामढ़ी

मोक्ष धाम का निर्माण: तनय सुल्तानिया ने बताया कि साथ ही साथ बुडको द्वारा ही एक मोक्ष धाम जिसमें इलेक्ट्रिसिटी और लकड़ी दोनों शवदाह गृह होगा, का निर्माण निर्माण कराया जा रहा है. उसके बनने से हमारे टाउन के लिए एक बहुत बड़ी सौगात होगी. लोगो के लिए सुगमता होगी इसी दोनों प्रोजेक्ट का हम लोग विभिन्न प्वाइंट्स पर निरीक्षण कर रहे हैं.
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