सिरसा के निहाल का कमाल: यूट्यूब से सीखा आर्म रेसलिंग, वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीता ब्रॉन्ज
सिरसा के निहाल ने यूट्यूब से सीखकर विश्व आर्म रेसलिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता.

Published : February 23, 2026 at 4:31 PM IST
सिरसा: जिले के 17 वर्षीय युवा खिलाड़ी निहाल वधवा ने विश्व आर्म रेसलिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है. बिना किसी सरकारी कोच और पेशेवर ट्रेनिंग के उन्होंने यह मुकाम हासिल किया. अपनी उम्र से तीन गुना बड़े खिलाड़ियों को हराकर तीसरा स्थान पाना निहाल की कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास का प्रमाण है. विदेश की धरती पर तिरंगा लहराकर निहाल ने यह साबित कर दिया कि जुनून और लगन हो तो संसाधनों की कमी भी राह नहीं रोक सकती.
यूट्यूब बना गुरु, घर बना अखाड़ा: मीडिया से बातचीत में निहाल ने बताया, "मैंने यूट्यूब पर आर्म रेसलिंग का वीडियो देखा था, वहीं से इस खेल के प्रति उत्सुकता जागी. मैंने बिना किसी कोच के घर पर ही प्रैक्टिस शुरू की. धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई और मेरा चयन विश्व चैंपियनशिप के लिए हो गया. वहां मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और देश के लिए कांस्य पदक जीता. इस बार मैं तीसरे स्थान पर रहा हूं, लेकिन अगली चैंपियनशिप में मेरा सपना भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने का है." निहाल फिलहाल दिल्ली में बीटेक सीएसई-एआई की पढ़ाई कर रहे हैं.
उज़्बेकिस्तान में तकनीकी समस्या सुलझाकर जीता दिल: टूर्नामेंट के दौरान उज़्बेकिस्तान में एक तकनीकी समस्या सामने आई, जिसे कोई भी ठीक नहीं कर पा रहा था. निहाल ने बताया, "कंप्यूटर में टेक्निकल खराबी आ गई थी. मैंने मैनेजमेंट से बात की और समस्या का समाधान किया." उनकी तकनीकी समझ से प्रभावित होकर आयोजकों ने उन्हें विशेष रूप से गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया. निहाल ने कहा कि, " इससे मेरा आत्मविश्वास और भी बढ़ गया है."

सरकार से कोच और ट्रेनर की मांग: निहाल ने आगे कहा कि, "मेरी कोचिंग घर से ही शुरू हुई थी. सरकार की ओर से कोच या ट्रेनर की कोई व्यवस्था नहीं थी. अगर सरकार इस खेल को बढ़ावा दे और कोच-ट्रेनर उपलब्ध कराए, तो हम देश के लिए गोल्ड मेडल भी जीत सकते हैं. मेरा मानना है कि सही मार्गदर्शन और सुविधाएं मिलें तो आर्म रेसलिंग में भारत का भविष्य उज्ज्वल है."
परिवार को गर्व: निहाल की सफलता से परिवार में खुशी की लहर है. पिता कुलविंद्र सिंह ने भावुक होकर कहा, “हमें अपने बेटे पर गर्व है. हमारे लिए यह कांस्य पदक किसी गोल्ड से कम नहीं है.” माता रजनी ने कहा, “निहाल ने यूट्यूब देखकर इस खेल के गुर सीखे और देश के लिए मेडल जीता, यह हमारे लिए बहुत गर्व की बात है.” बहन डॉ. भव्या ने कहा, “भाई की मेहनत रंग लाई है. हमें पूरा विश्वास है कि वह आगे गोल्ड मेडल जरूर जीतेगा.”
बधाइयों का तांता: निहाल की उपलब्धि के बाद उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. परिवार ने मिठाई खिलाकर आशीर्वाद दिया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की. अब निहाल अगली प्रतियोगिता की तैयारी के लिए सिरसा से दिल्ली रवाना हो चुके हैं. परिवार और शहरवासियों को उनसे अब स्वर्ण पदक की उम्मीद है. निहाल की कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो यूट्यूब भी गुरु बन सकता है और घर भी अखाड़ा.
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