डार्क जोन की मार झेल रहा है सिरसा जिले का रानियां हलका, 250 फुट नीचे पहुंचा भूजल स्तर, किसान परेशान
हरियाणा के कई जिलों में भू-जल का स्तर लगातार गिर रहा है. इस कारण खेती के अलावा कई व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं.

Published : August 29, 2026 at 5:04 PM IST
सिरसा: जिले का रानियां हलका इन दिनों पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है. कभी खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने वाला यह क्षेत्र अब भूजल स्तर गिरने के कारण डार्क जोन की स्थिति में पहुंच चुका है. हालात यह हैं कि कई इलाकों में पानी का स्तर जमीन से करीब 250 फुट नीचे पहुंच गया है. रानियां हलके में अधिकतर किसान धान की खेती करते हैं और धान की फसल में पानी की खपत भी काफी अधिक होती है. ऐसे में किसानों के सामने खेती को बचाने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाने की भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.
हर साल गंभीर हो रही है स्थितिः सिरसा जिले के रानियां हलके में खेती किसानों की आजीविका का मुख्य साधन है. क्षेत्र के अधिकतर गांवों में किसान धान सहित अन्य फसलों की खेती करते हैं. लेकिन लगातार गिरते भूजल स्तर ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. किसान हैप्पी सिंह का कहना है कि "पिछले कई वर्षों से क्षेत्र डार्क जोन की समस्या से जूझ रहा है और हर साल स्थिति पहले से ज्यादा गंभीर होती जा रही है."
वाटर लेवल 250 फीट गिर चुका है नीचेः भूजल स्तर लगातार नीचे जाने के कारण किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा मेहनत और ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है. कई स्थानों पर जमीन के अंदर पानी करीब 250 फीट नीचे तक पहुंच चुका है. ऐसे में ट्यूबवेलों से पानी निकालना भी आसान नहीं रहा. रानियां हलके में धान की फसल की बिजाई बड़े स्तर पर होती है. धान ऐसी फसल है जिसमें सिंचाई के लिए काफी मात्रा में पानी की जरूरत पड़ती है. यही वजह है कि डार्क जोन घोषित क्षेत्र में धान की खेती भूजल पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है.
पर्याप्त वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध नहीं: किसान अमनदीप सिंह का कहना है कि "एक तरफ सरकार भूजल बचाने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ खेती के लिए पर्याप्त वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में भूजल पर निर्भर रहना पड़ता है. अगर नहरों में नियमित और पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध हो, तो किसानों को ट्यूबवेलों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है."
नहरों में पानी की नियमित सप्लाई सुनिश्चित की जाएः सिरसा जिला पहले से ही पानी की कमी वाले क्षेत्रों में शामिल रहा है. ऐसे में रानियां हलके के किसानों के लिए नहरों के पानी की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है. किसान हरजिंद्र सिंह का कहना है कि "अगर नहरों में पूरे साल पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध करवाया जाए, तो भूजल का दोहन कम किया जा सकता है और डार्क जोन की समस्या से निपटने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया जा सकता है. क्षेत्र के किसानों की निगाहें अब सरकार की ओर हैं. किसान चाहते हैं कि सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया जाए और नहरों में पानी की नियमित सप्लाई सुनिश्चित की जाए.
ओटू हेड बना किसानों के लिए उम्मीद का बड़ा स्रोतः रानियां हलके और आसपास के क्षेत्रों में खेती के लिए पानी की सप्लाई का एक महत्वपूर्ण स्रोत घग्गर नदी पर बना ओटू हेड है. ओटू हेड से क्षेत्र की 20 से ज्यादा नहरों में पानी की सप्लाई की जाती है. इन नहरों के माध्यम से करीब 100 से ज्यादा गांवों तक खेती के लिए पानी पहुंचता है. किसानों का कहना है कि अगर ओटू हेड से निकलने वाली नहरों में नियमित रूप से पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाए तो बड़ी संख्या में किसानों को राहत मिल सकती है. इससे सिंचाई के लिए भूजल पर निर्भरता कम होगी और किसानों को महंगे ट्यूबवेलों के सहारे खेती करने की मजबूरी भी कम हो सकती है.
ट्यूबवेलों पर भी बढ़ रहा है दबावः किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि धान की फसल को समय पर पानी उपलब्ध कराया जाए. बारिश पर निर्भर रहना किसानों के लिए जोखिम भरा है. मानसून में अगर बारिश कम होती है तो सिंचाई के लिए ट्यूबवेल चलाने पड़ते हैं. वहीं भूजल स्तर लगातार नीचे जाने के कारण ट्यूबवेलों पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है.
नहरों में पानी की उपलब्धता पूरे साल होः पानी की समस्या केवल मौजूदा फसल तक सीमित नहीं है. अगर भूजल का स्तर इसी तरह गिरता रहा तो आने वाले वर्षों में खेती करना और मुश्किल हो सकता है. इसलिए सरकार को तत्काल ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे किसानों को नहरों के माध्यम से पर्याप्त पानी मिले और भूजल का संरक्षण भी हो सके. हमारे क्षेत्र में पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है. धान की फसल में ज्यादा पानी लगता है. अगर नहरों में नियमित पानी मिले तो हम ट्यूबवेलों पर निर्भरता कम कर सकते हैं. सरकार को इस समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए. किसानों की मांग है कि नहरों में सिर्फ फसल के सीजन के दौरान ही नहीं बल्कि पूरे साल पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए.
डार्क जोन में नहरी सिंचाई को बढ़ावा देना जरूरीः किसानों का यह भी कहना है कि सरकार को क्षेत्र की भौगोलिक और कृषि संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सिंचाई व्यवस्था की योजना बनानी चाहिए. डार्क जोन में शामिल क्षेत्रों में नहरी सिंचाई को बढ़ावा देना समय की जरूरत है. रानियां हलके के किसान लंबे समय से पानी की समस्या का सामना कर रहे हैं. जमीन के अंदर करीब 250 फुट नीचे पहुंच चुका पानी का स्तर इस संकट की गंभीरता को दिखाता है. एक ओर धान की खेती के लिए भारी मात्रा में पानी की जरूरत है तो दूसरी ओर भूजल लगातार कम होता जा रहा है. ऐसे में अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. किसानों का कहना है कि "सरकार को सिर्फ योजनाएं बनाने के बजाय जमीन पर ऐसी व्यवस्था लागू करनी होगी जिससे खेतों तक पर्याप्त नहरी पानी पहुंच सके."
भविष्य की खेती और भूजल संरक्षण जरूरीः रानियां हलके के किसानों की समस्या सिर्फ पानी की कमी तक सीमित नहीं है बल्कि यह क्षेत्र के भविष्य की खेती और भूजल संरक्षण से भी जुड़ी हुई है. घग्गर नदी पर बने ओटू हेड से 20 से ज्यादा नहरों के जरिए 100 से अधिक गांवों तक पानी पहुंचता है. ऐसे में किसानों को उम्मीद है कि सरकार ओटू हेड और नहरों की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करेगी और पूरे साल पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की दिशा में जल्द फैसला लेगी.
डार्क जोन से उबारने के लिए सरकार ठोल कदम उठाएः किसानों ने सरकार से मांग की है कि डार्क जोन की समस्या को गंभीरता से लेते हुए नहरों में नियमित और पर्याप्त पानी छोड़ा जाए ताकि भूजल पर निर्भरता कम हो खेती बची रहे और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी पानी सुरक्षित रखा जा सके. सवाल अब यही है कि रानियां हलके के किसानों को भूजल के संकट से कब स्थायी राहत मिलेगी और नहरों में पूरे साल पानी उपलब्ध कराने की उनकी मांग पर सरकार कब ठोस कदम उठाएगी.

