खूंखार तेंदुए पर भारी पड़े गद्दी कुत्ते, दो युवकों की बचाई जान, लेपर्ड हुआ लहूलुहान!
रेस्क्यू के बाद तेंदुए को शंभूवाला वन परिक्षेत्र ले जाया गया. अब उसे शिमला के टूटीकंडी रेस्क्यू सेंटर भेजा जाएगा.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 23, 2026 at 7:23 PM IST
|Updated : February 23, 2026 at 7:31 PM IST
सिरमौर: हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के नाहन वन मंडल में बीती रात का घटनाक्रम किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं था. चंडीगढ़-देहरादून हाईवे पर जोगीबन गांव स्थित एक गोट फार्म में तेंदुआ घुस आया. फार्म में सैकड़ों बकरियां मौजूद थीं. तेंदुए के घुसते ही अफरातफरी मच गई, लेकिन सुरक्षा में तैनात गद्दी कुत्तों ने बहादुरी दिखाते हुए हालात को संभाल लिया. रात गहराते ही तेंदुआ फार्म में दाखिल हुआ. गद्दी कुत्तों की टोली तुरंत सतर्क हो गई और उन्होंने तेंदुए को एक कोने में घेर लिया. पूरी रात कुत्तों ने उसे खुले क्षेत्र में भागने नहीं दिया. सुबह जब फार्म का गेट खुला तो घिरा हुआ तेंदुआ अचानक आक्रामक हो गया और पास के नाले के संकरे पाइप में जा घुसा.
तेंदुए ने युवकों पर हमला
भागने की कोशिश में तेंदुए ने संग्राम और नीरज नामक दो युवकों पर हमला कर दिया. अचानक हुए हमले से हड़कंप मच गया. इसी बीच गद्दी कुत्तों ने दोबारा साहस दिखाया और तेंदुए का ध्यान भटकाया. उनकी बहादुरी से दोनों युवक उसके चंगुल से छूट गए. इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसने इलाके में चर्चा बढ़ा दी.
तीन घंटे चला हाई-रिस्क रेस्क्यू
दोपहर करीब एक बजे वन्य प्राणी विभाग की टीम मौके पर पहुंची. सबसे बड़ी चुनौती थी कि पाइप में छिपे तेंदुए को सुरक्षित बाहर निकाला जाए. टीम ने पहले पाइप के एक सिरे को मजबूत जाली से बंद किया और दूसरे सिरे पर पिंजरा लगाया. जब तेंदुआ बाहर नहीं निकला, तो ट्रैंक्विलाइजर गन से बेहोशी का शॉट दिया गया. पाइप के भीतर पानी का रिसाव हो रहा था, जिससे खतरा और बढ़ गया. यह सुनिश्चित करना जरूरी था कि तेंदुआ पूरी तरह बेहोश हो चुका है. एक वनरक्षक जोखिम उठाते हुए पाइप में घुसा, रस्सी से तेंदुए को बांधा और धीरे-धीरे बाहर खींचा गया. करीब साढ़े तीन बजे ऑपरेशन सफल हुआ.
टूटीकंडी रेस्क्यू सेंटर भेजा जाएगा तेंदुआ
रेस्क्यू के दौरान सैकड़ों ग्रामीण मौके पर जमा रहे. अधिकारियों को आशंका थी कि अगर तेंदुआ अचानक होश में आ जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था. सफल रेस्क्यू के बाद तेंदुए को प्राथमिक उपचार के लिए शंभूवाला वन परिक्षेत्र ले जाया गया. जहां से उसे शिमला के टूटीकंडी रेस्क्यू सेंटर भेजने की तैयारी की गई.
वन मंडलाधिकारी अवनी भूषण ने बताया कि करीब तीन घंटे चले इस जटिल ऑपरेशन में टीम ने धैर्य और सूझबूझ से काम लिया. उन्होंने गद्दी कुत्तों की बहादुरी की भी प्रशंसा की. समय पर की गई कार्रवाई से दो जिंदगियां बचीं और एक घायल वन्यजीव को सुरक्षित संरक्षण मिल सका.
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