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UP में SIR; ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होते ही मचा सियासी घमासान, करीब 2.89 करोड़ नाम कटे, सपा और बीजेपी आमने-सामने

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने लगाई सवालों की झड़ी, भाजपा का पलटवार.

UP में SIR.
UP में SIR. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : January 8, 2026 at 7:12 AM IST

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के प्रकाशन के बाद प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है. चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रारूप मतदाता सूची में करीब 2 करोड़ 89 लाख मतदाताओं के नाम कटने के दावे के साथ ही विपक्ष ने सरकार और आयोग पर सवालों की झड़ी लगा दी है. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी समाजवादी पार्टी आमने-सामने हैं.

समाजवादी पार्टी शुरू से ही SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग को घेरती रही है. ड्राफ्ट लिस्ट सामने आने के बाद पार्टी का आरोप है कि प्रदेश में करीब 3 करोड़ मतदाता 'गायब' हो गए हैं, जिसका सीधा असर चुनावी राजनीति पर पड़ेगा.

सपा के सवाल: ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर एक वीडियो साझा करते हुए तंज कसा
'जाने वो कहां लोग चले गए'. पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि मुस्लिम बहुल जिलों में करीब 20 प्रतिशत वोटरों के नाम काटे गए हैं.

इसके बाद अखिलेश यादव ने एक और पोस्ट में सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगते हुए लिखा 'ये ‘डबल इंजन’ की सरकार है या डबल ब्लंडर की सरकार? विधानसभा, पंचायत और नगर निकाय की मतदाता सूचियों में लाखों मतदाताओं का अंतर कैसे है? इसका स्पष्टीकरण अपेक्षित है'.

अखिलेश ने आंकड़े साझा करते हुए लिखा है-

उत्तर प्रदेश विधानसभा मतदाता सूची (SIR के बाद, प्रारूप-2026): 12.56 करोड़
उत्तर प्रदेश पंचायत मतदाता सूची (SIR संशोधित अस्थायी-2026): 12.70 करोड़
उत्तर प्रदेश नगर निकाय (ULB) मतदाता सूची (चुनाव वर्ष-2023): लगभग 4.32 करोड़

अखिलेश यादव ने तर्क दिया कि यदि नगर निकाय मतदाता सूची में अधिकतम 25 प्रतिशत (करीब 1.08 करोड़) की कमी भी मान ली जाए, तब भी संशोधित ULB सूची में लगभग 3.24 करोड़ मतदाता होने चाहिए. ऐसे में पंचायत और नगर निकाय मतदाता सूचियों का कुल योग करीब 15.80 करोड़ बैठता है.
उन्होंने सवाल उठाया कि फिर लगभग 3 करोड़ मतदाता कहां गायब हो गए? सपा ने आरोप लगाया कि क्या चुनाव आयोग पर भाजपा का दबाव है और क्या पिछड़े वर्गों व अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है?

बीजेपी का पलटवार: भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने अखिलेश यादव के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सपा प्रमुख को पहले यह तय करना चाहिए कि SIR उन्हें अच्छा लग रहा है या बुरा? कुछ दिन पहले अखिलेश यादव खुद कह रहे थे कि भाजपा के 3 करोड़ वोट कट गए हैं और अब सपा की सरकार बनने जा रही है. अब जब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आई है तो कह रहे हैं कि उनका वोट कट गया. यह दोहरी राजनीति नहीं चलेगी?

मनीष शुक्ला ने आगे कहा कि अगर समाजवादी पार्टी को राजनीति में बने रहना है तो उसे सकारात्मक राजनीति करनी होगी. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, अच्छा होता कि सपा के कार्यकर्ता SIR प्रक्रिया में सहयोग करते. 2027 में भाजपा फिर से प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगी और जनता का पूरा समर्थन मिलेगा.

सपा की क्या है रणनीति: समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद पार्टी नेतृत्व ने इसकी समीक्षा का फैसला किया है. उन्होंने बताया कि 6 जनवरी से 6 फरवरी तक दावा-आपत्ति का समय है और इस दौरान पार्टी अपने 'पीडीए प्रहरी' तैनात कर उन लोगों के वोट बनवाएगी, जिनके नाम सूची से कट गए हैं या शामिल नहीं हो पाए हैं. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनके वोट नहीं बन पाए हैं. समाजवादी पार्टी का हर कार्यकर्ता इस प्रक्रिया में सहयोग करेगा. फखरुल हसन चांद ने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग की कथित साजिश को पार्टी नाकाम करेगी.
कहा, हम जनता के एक-एक वोट की रक्षा करेंगे और किसी भी कीमत पर लोकतंत्र से खिलवाड़ नहीं होने देंगे.

संजय सिंह बोले- इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला: आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी व राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने लखनऊ में पार्टी मुख्यालय से जारी बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी ने मिलकर लोकतंत्र के साथ खुला खिलवाड़ किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में दो करोड़ 90 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से काट दिए गए हैं. ये देश के इतिहास का सबसे बड़ा 'वोट घोटाला' है. संजय सिंह ने कहा कि यह चुनाव सुधार नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से गरीब, पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक और मजदूर वर्ग को मताधिकार से वंचित करने की साजिश है.

कहा कि दिसंबर में राज्य निर्वाचन आयोग ने ग्रामीण क्षेत्रों की मतदाता सूची जारी की थी, जिसमें 12 करोड़ 70 लाख ग्रामीण मतदाता दर्ज थे, लेकिन अब एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद छह जनवरी को जो नई सूची जारी हुई है, उसमें पूरे उत्तर प्रदेश के शहरी और ग्रामीण मिलाकर सिर्फ 12 करोड़ 55 लाख मतदाता बताए जा रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जब दिसंबर में सिर्फ ग्रामीण मतदाता 12 करोड़ 70 लाख थे तो अब शहरी मतदाता मिलाकर संख्या कैसे घट गई? यह अंतर अपने आप में लोकतंत्र का मजाक है. आप सांसद ने कहा कि चुनाव आयोग ने मनमाने ढंग से अलग-अलग श्रेणियां बनाकर वोट काटने का खेल खेला है.

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