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लेबर कोड के विरोध में सिंगरौली में NCL खदानों में काम ठप, 2 लाख टन से ज्यादा कोल उत्पादन प्रभावित

सिंगरौली में एनसीएल खदानों में राष्ट्रव्यापी हड़ताल का दिखा असर, कोयला उत्पादन प्रभावित होने से बढ़ सकती हैं मुश्किलें. ठप हो सकती है बिजली आपूर्ति.

SINGRAULI NCL TRADE UNION STRIKE
लेबर कोड के विरोध में सिंगरौली में NCL खदानों में काम ठप (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 12, 2026 at 8:29 PM IST

4 Min Read
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सिंगरौली: कोल इंडिया की इकाई एनसीएल में भी ट्रेड यूनियनों की हड़ताल का गुरुवार को व्यापक असर देखने को मिला. नए लेबर कोड के विरोध में एनसीएल कर्मियों ने हड़ताल की और 4 श्रमिक संगठनों ने मिलकर एनसीएल का काम ठप कर दिया. जिससे लगभग 2 लाख टन से ज्यादा कोयल का उत्पादन प्रभावित होने का अनुमान है.

एनसीएल की कुल 10 परियोजनाओं में काम ठप

पूरे देश में नए लेबर कोड कानून का लगातार विरोध किया जा रहा है और यह कानून वापस लेने के मांग की जा रही है. इसी क्रम में कोल इंडिया की सभी अनुषांगिक इकाइयों में नए लेबर कोड के विरोध में गुरुवार को हड़ताल का आह्वान किया गया. इस हड़ताल में ट्रेड यूनियन के 4 संयुक्त मोर्चा शामिल रहे. ट्रेड यूनियन की हड़ताल से एनसीएल की 10 परियोजनाओं का काम पूरी तरह से ठप रहा.

2 लाख टन से ज्यादा कोल उत्पादन प्रभावित (ETV Bharat)

2 लाख टन से ज्यादा कोयले का उत्पादन प्रभावित

सिंगरौली के एनसीएल से प्रतिदिन लगभग 2 से 3 लाख टन कोयले का उत्पादन होता है. नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) सिंगरौली में 10 खुली खदानों से सालाना लगभग 122 मिलियन टन से अधिक कोयले का उत्पादन होता है. यह प्रतिदिन के औसत से लगभग 3 लाख टन से ज्यादा होता है.

हड़ताल का आम लोगों पर असर

एनसीएल में ट्रेड यूनियन की हड़ताल के कारण कोयला खदानों से कोयले की ढुलाई पर गहरा असर पड़ा. कई परियोजनाओं में कोयले के डिस्पैच का काम पूरी तरह ठप हो गया. ट्रेड यूनियनों से जुड़े श्रमिकों ने कोयला ले जाने वाली मालगाड़ी के सामने भी प्रदर्शन किया. जिससे रेल परिवहन भी प्रभावित हुआ है. यह कोल इंडिया की कंपनी मुख्य रूप से बिजली क्षेत्र के लिए कोयले का खनन करती हैं. देश में कई बिजली संयंत्रों को समय से कोयले की आपूर्ति नहीं होने का असर बिजली व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है. इससे आने वाले समय में आम लोगों को बिजली कटौती और बिजली महंगी होने जैसी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है.

कोयल का उत्पादन रुकने से हो सकता है बड़ा नुकसान

देश में कोयले की आपूर्ति को लेकर वैसे भी कमी की बात की जा रही है. ऐसे में जिस तरह से कोल इंडिया के कर्मचारियों के द्वारा एक दिन की हड़ताल की गई है. इस हड़ताल से एक दिन में ही उत्पादन पर असर पड़ा है. इससे कई समस्याएं आने की संभावना है. जिसमें कोयला उत्पादन रुकने से बिजली उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है. इसके साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों के थमने का भी खतरा बढ़ जाता है. पूरे देश में कई बिजली संयंत्रों को समय से कोयले की आपूर्ति नहीं होने पर सरकार को भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.

नए लेबर कोड का कोल कर्मचारी क्यों कर रहे विरोध?

देशव्यापी इस हड़ताल का सबसे बड़ा कारण नया लेबर कोड है, जिसका विरोध किया जा रहा है. ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मोर्चा के सचिव अभिमन्यु यादव का कहना है कि "यह लेबर कोर्ट मजदूरों को गुलाम बनाने का एक नया फरमान है. यह लागू नहीं होना चाहिए, जिसके लिए यह हड़ताल और विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है."

उन्होंने बताया कि "नए लेबर कोर्ट में शिफ्ट का समय 8 घंटे से बढ़कर 12 घंटे किया जा सकता है. साथ ही कोल इंडिया का निजीकरण और तेजी से होने की आशंका जताई जा रही है. इस नए लेबर कोड से ठेका कर्मियों को एचपीसी वेजेस मिलना बंद किया जा सकता है साथ ही जमीन के बदले नौकरी पुनर्वास का प्रावधान को समाप्त किया जा सकता है. इसी कारण कर्मचारी इस लेबर कोड का विरोध कर रहे हैं."