सिंगरौली में दिनदहाड़े कोयले का काला खेल, गुड्स ट्रेन के रुकते ही चढ़ जाते हैं 100 से ज्यादा लोग
सिंगरौली की एनसीएल खदान से कोयले का रैक निकलते ही चोरी हो जाता है सैकड़ों टन कोयला. एनसीएल प्रबंधन और रेलवे विभाग ने झाड़ा पल्ला.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 26, 2026 at 4:11 PM IST
सिंगरौली: कोयला उत्पादन के क्षेत्र में सिंगरौली देश में अहम भूमिका निभाता है, वहीं दूसरी ओर यह तस्वीर आपको हैरान और परेशान कर देगी. यहां खुलेआम सरकारी संपत्ति की लूट की जा रही है. खदान से लोड होकर निकलने वाली कोयले से लदी मालगाड़ी से कोयला चोरी कर लिया जाता है. दिनदहाड़े 100 से ज्यादा लोग ट्रेन के ऊपर चढ़ते हैं और कुछ ही देर में कई टन कोयला नीचे गिरा देते हैं. यह कोयला सरकारी पावर प्लांट को यहां से भेजा जाता है.
चंद कदमों की दूरी पर ही रेलवे स्टेशन मौजूद है और वहां रेलवे के अधिकारी और सुरक्षा विभाग भी मौजूद है. इसके बावजूद यहां कोयले का काला खेल चलता है. बताया यह भी जाता है कि इस पूरे सिंडिकेट के पीछे बड़े-बड़े कोल माफिया हैं जो हर रोज 3-4 ट्रेन से हजारों टन कोयला उतारकर बेचने का काम करते हैं.
बिजलीघरों तक पहुंचने वाला कोयला चोरी
सिंगरौली के मोरवा थाना क्षेत्र में कोल इंडिया की अनुषंगी इकाई नॉर्दर्न कोलफील्ड लिमिटेड की ब्लॉक बी खदान स्थित है जहां से लोडिंग के माध्यम से सरकारी बिजलीघरों को कोयला पहुंचाया जाता है. इस दौरान जब कोयले से लदी मालगाड़ी महादेईया गांव के पास रेलवे स्टेशन के पास पहुंची तो कोयले को लेकर लूट मच गई.
ईटीवी भारत की टीम जब यहां पहुंची तो देखा कि गुरुवार की सुबह 11:00 बजे एक ट्रेन ब्लॉक बी सीएचपी से लोड होकर रेलवे स्टेशन के पास जा रही थी और वहां पहुंचने से पहले ही रास्ते में अचानक रुक गई. इसी दौरान सैकड़ों की तादाद में लोग ट्रेन पर चढ़ गए और कोयला नीचे गिरने लगे. कोयला गिरने के बाद लोग उसे बोरों में भरकर ले जाते हैं. हर रोज तीन-चार रैक से ऐसे ही हजारों टन कोयले की चोरी की जाती है.
कोयला चोरी के पीछे कोल माफिया
कोयला चोरी की यह प्रक्रिया दिनदहाड़े होती है. एनसीएल अपने कोयले को सरकारी पावर प्लांट पर भेजने के लिए सीएचपी लोडिंग कर जैसे ही खदान से बाहर निकलती है तो 3 किलोमीटर दूरी पर स्थित रेलवे स्टेशन है. यहां से उसे रूट दिया जाता है जहां उस रैक को जाना होता है. इसी दौरान रेलवे स्टेशन पहुंचने से पहले ही ट्रेन रुक जाती है और तभी सैकड़ों की तादाद में लोग उस पर चढ़ जाते हैं और घंटों तक कोयला नीचे गिराने लगते हैं.
हर रोज तीन-चार ट्रेनों के रैक से कोयला हर रोज ऐसे ही गिराया जाता है. हजारों टन कोयले की खुलेआम दिनदहाड़े चोरी की जाती है. कोल माफिया इस कोयले को खरीदकर बाजारों में बेचकर लाखों की कमाई करते हैं.
'हमारा काम पार्टी को कांटा कराकर भेजना'
कोयला चोरी को लेकर एनसीएल के पीआरओ राम विजय सिंह से ईटीवी भारत ने बात की. इस मामले में उन्होंने कहा कि "हमारा काम पार्टी को कांटा कराकर कोयला भेज देना है, अब रास्ते में कौन कोयला उतरता है कहां ले जाता है, उसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं होती. हमारा काम अपना कोयला बेचना है. हम कांटा करवाकर अपनी प्रक्रिया पूरी करते हैं."
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रेलवे सुरक्षा विभाग ने भी झाड़ा पल्ला
रेलवे सुरक्षा विभाग के आरपीएफ उपनिरीक्षक मणिकांत यादव ने बताया कि "जहां कोयला गिराया जा रहा है वह रेलवे अधिकृत क्षेत्र नहीं है. वह ना तो रेलवे की जमीन है और ना ही वहां पर रेलवे की पटरी है. यह हमारे सुरक्षा क्षेत्र में नहीं आता है."

