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झारखंड स्थापना दिवस पर देवघर में जश्न, लोगों ने वीर आंदोलनकारियों को दी श्रद्धांजलि

झारखंड स्थापना दिवस की रजत जयंती देवघर में धूमधाम से मनाई जा रही है. इस अवसर पर रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

Program On Jharkhand Foundation Day
झारखंड स्थापना दिवस की रजत जयंती के अवसर पर देवघर में प्रस्तुति देते कलाकार. (फोटो-ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : November 15, 2025 at 1:55 PM IST

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देवघर:झारखंड की धरती आज एक बार फिर उत्सव के रंगों में रंग गई है. 15 नवंबर वह तिथि जिसने इस प्रदेश के इतिहास को नई पहचान दी, जब संघर्ष की तपिश से तपे सपनों ने आकार लिया और झारखंड का अलग राज्य के रूप में गठन हुआ. इसी दिन राज्य को पहला मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के रूप में मिला और उसके बाद सत्ता के कई दौर आए. कभी भाजपा का शासन, तो कभी कांग्रेस समर्थित सरकारों का दौर. विकास की रेखा खींचने में सबने अपने-अपने प्रयासों की छाप छोड़ी.

आंदलनों के अंगारों से भरा है झारखंड का निर्माण

झारखंड के निर्माण का इतिहास आंदोलन के अंगारों से भरा है. 1990 से 2000 के दशक में चलाए गए जनांदोलनों की बदौलत झारखंड राज्य का गठन हुआ. संथाल परगना की मिट्टी में कदम-कदम पर अमर पुरोधा दिवंगत शिबू सोरेन की संघर्ष गाथा दर्ज है. उनकी अनवरत आवाज जिसने दुमका और आसपास के जिलों में राज्य गठन को जनभावना का रूप दिया. शिबू सोरेन केवल जननायक नहीं, बल्कि झारखंडी अस्मिता के जीवंत शिल्पकार माने जाते हैं.

झारखंड स्थापना दिवस पर देवघर में कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार और पदाधिकारी का बयान. (वीडियो-ईटीवी भारत)

साथ ही देवघर के मोहनपुर प्रखंड के रहने वाले चंद्रशेखर यादव जिन्होंने झारखंड आंदोलन को संथाल परगना के गांव-गांव तक आवाज देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था. उन्हें भी उनकी चौथी पुण्यतिथि पर विधायक सहित अनेक गणमान्य लोगों ने श्रद्धांजलि दी. इस मौके पर विधायक ने कहा कि चंद्रशेखर यादव न केवल संथाल परगना क्षेत्र में हुए आंदोलन की धुरी थे, बल्कि देवघर में सामाजिक विकास के मार्गदर्शक भी रहे.

राज्य स्थापना दिवस पर देवघर में रंगारंग कार्यक्रम

झारखंड स्थापना दिवस की रजत जयंती के अवसर पर देवघर में जिला प्रशासन की ओर से नृत्य, संगीत और रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. साथ ही जिले के स्थानीय आंदोलनकारियों को याद किया जा रहा है. जिलेवासी उल्लास में डूबे हुए हैं. लोगों ने कार्यक्रम में शामिल होकर कलाकारों का हैसला बढ़ाया.

वहीं जिले के उप समाहर्ता सह खेल पदाधिकारी ने बताया कि जिले में झारखंड का स्थापना दिवस समारोह धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है. सभी प्रखंडों में स्थानीय कला, संस्कृति और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष आयोजन किए जा रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में जागरुकता अभियान चलाकर लोगों को राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी दी जा रही है, ताकि स्थापना दिवस केवल उत्सव न होकर प्रगति का संवाद भी बने.

सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद

झारखंड स्थापना दिवस को लेकर देवघर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. बाबा बैद्यनाथ मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बलों की तैनाती की गई है. स्थापना दिवस पर उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए कंट्रोल रूम और फील्ड की टीमों को विशेष सतर्कता के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यह कार्यक्रम शांति और सौहार्द के माहौल में संपन्न हो सके.

झारखंड स्थापना दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि विकास, संघर्ष और अस्मिता की गूंज है. एक ऐसी गूंज, जिसे आज संथाल परगना से लेकर राजधानी रांची तक हर शख्स एक साथ महसूस कर रहा है.

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