साइलेंट खतरा : जिन दवाओं को इलाज के लिए बनाया गया, अब उसी से युवा कर रहे नशा
राजस्थान में फैलता साइलेंट खतरा. युवाओं की सेहत और भविष्य हो रहा बर्बाद.

Published : December 31, 2025 at 5:29 PM IST
जयपुर: हाल ही में प्रदेश में ड्रग डिपार्टमेंट और पुलिस की ओर से नशे को लेकर कई बड़ी कार्रवाई की गई है, जिसके बाद सामने आया कि राजस्थान में नशे का एक नया और बेहद खतरनाक ट्रेंड शुरू हुआ है. शराब, गांजा या स्मैक की जगह अब चिकित्सीय दवाओं का नशे के रूप में सेवन बढ़ता जा रहा है.
हैरानी की बात यह है कि जिन दवाओं को इलाज के लिए बनाया गया, वही अब युवाओं की सेहत और भविष्य दोनों को बर्बाद कर रही है. बीते कुछ महीनों में पुलिस और ड्रग कंट्रोल विभाग की कार्रवाई में इस बात की पुष्टि हुई है कि कई प्रतिबंधित दवाएं नशे के तौर पर इस्तेमाल की जा रही हैं, जिनमें सबसे अधिक एविल दवा का उपयोग किया जा रहा है.
ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक का कहना है कि एविल टैबलेट और इंजेक्शन का उपयोग खुजली, एलर्जी और एलर्जिक रिएक्शन में किया जाता है. आम तौर पर नशा करने वाले लोग किसी भी तरह की एलर्जी से बचने के लिए भी इस दवा का उपयोग करते हैं.

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दवा में सेडेशन : फाटक का कहना है कि एविल दवा के उपयोग से सेडेशन भी बढ़ता है, जिसका मतलब है कि इस दवा के उपयोग से हल्की बेहोशी आने लगती है. फाटक का कहना है कि बिना चिकित्सकीय परामर्श के यह दावा नहीं बेची जा सकती. इस दवा से नशा इसलिए बढ़ रहा है, क्योंकि ये सस्ती, आसानी से उपलब्ध और शुरुआत में कम खतरनाक लगती हैं. हाल ही में पुलिस और ड्रग डिपार्टमेंट की टीम ने जयपुर में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था और लगभग 800 से अधिक एविल इंजेक्शन जब्त किए थे.

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सेहत पर गंभीर : चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह की दवाओं का नशा शरीर और दिमाग दोनों पर गहरा असर डालता है. लंबे समय तक सेवन से लत लग जाती है, जिससे व्यक्ति खुराक बढ़ाता चला जाता है.

