घूंघट से निकल लाखों में कर रहीं कमाई, कबाड़ से कलाकृतियां गढ़कर समाज के लिए बनीं मिसाल
सीधी की बीना जायसवाल कबाड़ से कर रही कमाल, थर्माकोल, प्लास्टिक और नारियल के खोल से बना रही खूबसूरत कलाकृतियां.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 8, 2026 at 4:30 PM IST
सीधी: मध्य प्रदेश के सीधी से एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है, जो यह साबित करती है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर हौसला और हुनर साथ हो तो कबाड़ भी सोना बन सकता है. बीना जायसवाल ने बगैर किसी औपचारिक शिक्षा के अपनी मेहनत, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास के दम पर न सिर्फ आत्मनिर्भरता हासिल की, बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए भी एक नई राह दिखाई है.
कबाड़ से तैयार कलाकृतियां बनीं आकर्षण का केंद्र
बीना जायसवाल ने वेस्ट मटेरियल से टेडी बेयर और सजावटी उत्पाद बनाने का काम शुरू किया. शुरुआत बेहद साधारण थी, लेकिन आज यह काम एक मजबूत पहचान बन चुका है. कबाड़, थर्माकोल, प्लास्टिक, नारियल के खोल और पुराने मटकों जैसे बेकार समझे जाने वाले सामान को वह खूबसूरत कलाकृतियों में बदल देती हैं. नगर के विभिन्न पार्कों में उनके द्वारा तैयार किए गए कृत्रिम पेड़, पुराने मटकों से बनी महिला-पुरुष की मूर्तियां और स्वच्छता से जुड़े मॉडल लगे हुए हैं. जो लोगों को न सिर्फ आकर्षित कर रहे हैं, बल्कि जागरूकता भी फैला रहे हैं.
प्रदूषण को कम करने में मदद
बीना जायसवाल ने बताया कि "वह प्लास्टिक से पावदान, थर्माकोल से लैंप और नारियल के खोल को पेंट कर हैंगिंग पॉट बनाती हैं. इन प्रयासों से जहां एक ओर उनकी आमदनी बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर शहर में बढ़ते कचरे और प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिल रही है."

भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे बड़े शहरों में बेचती हैं कलाकृतियां
बीना की जिंदगी में असली बदलाव तब आया, जब वह ड्रीम स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं. बीना बताती हैं कि "कभी वह घूंघट में रहकर घर के भीतर सिलाई-बुनाई का काम करती थीं, लेकिन आज अमरकंटक, भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे बड़े शहरों में जाकर अपने उत्पाद बेचती हैं. स्वच्छता समूह में पढ़ी-लिखी ग्रेजुएट महिलाएं भी शामिल हैं, जो यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से नए-नए प्रोडक्ट बनाना सीख रही हैं."

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बीना जायसवाल सालाना लगभग एक लाख रुपये का मुनाफा कमा रही हैं. इससे बच्चों की पढ़ाई बेहतर हो रही है, घर की आर्थिक स्थिति सुधरी है. सबसे बड़ी बात कि उन्हें आत्मसम्मान और आत्मविश्वास के साथ जीने की ताकत मिली है. बीना जायसवाल की यह कहानी न सिर्फ सीधी, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा है. उनका संघर्ष और सफलता यह संदेश देती है कि अगर सोच सकारात्मक हो, तो कचरे में भी अवसर और बदलाव की ताकत छिपी होती है.

