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बारिश में वर्मी कंपोस्ट बनाने में बरतें सावधानी, जरा सी गलती केंचुओं की जान पर भारी

बारिश के मौसम में वर्मी कंपोस्ट बनाने में बेहद सतर्क रहने की जरूरत. वर्षा जल अगर बेड में गया तो सारी मेहनत पर पानी फिरेगा.

rainy season vermi compost
वर्मी कंपोस्ट में क्या-क्या मिलाएं (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : July 6, 2026 at 4:31 PM IST

3 Min Read
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सीधी: बारिश के मौसम में वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए अनुकूल माना जाता है. लेकिन यही मौसम किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती भी बन रहा है. इसमें थोड़ी सी लापरवाही से वर्मी कंपोस्ट बेड में पानी भर सकता है, जिससे केंचुओं की मौत हो सकती है और पूरी खाद खराब होने का खतरा रहता है. ऐसे में किसानों को कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए, ताकि जैविक खाद की गुणवत्ता बनी रहे और उत्पादन प्रभावित न हो.

बेड की हिफाजत करने के उपाय

सीधी जिले के पपरा निवासी प्रगतिशील किसान रमाशंकर कुशवाहा बताते हैं ''वर्मी कंपोस्ट बेड हमेशा ऐसी ऊंची जगह पर बनाया जाना चाहिए, जहां बारिश का पानी जमा न होने पाए. यदि बेड खुले स्थान पर है तो उसके ऊपर तिरपाल, टिन शेड या पॉलीथीन की ढलानदार छत लगाना जरूरी है, ताकि वर्षा का पानी सीधे बेड में न पहुंचे. उस बेड के चारों ओर पानी निकासी के लिए नालियां भी बनाई जानी चाहिए.''

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बारिश में वर्मी कंपोस्ट बनाने में बेहद सतर्क रहने की जरूरत (ETV BHARAT)

उन्होंने यह भी बताया कि, ''केंचुओं को जीवित रहने के लिए नमी की आवश्यकता होती है, लेकिन अत्यधिक पानी ऑक्सीजन की कमी पैदा कर देता है. जिसकी वजह से केंचुओं का दम घुटने लगता है और वे बड़ी संख्या में मर सकते हैं. इसलिए बेड की नियमित जांच करें और कहीं भी पानी जमा दिखाई दे तो उसे तुरंत बाहर निकाल दें.''

वर्मी कंपोस्ट में क्या-क्या मिलाएं

किसान रमाशंकर कुशवाहा के अनुसार, ''वर्मी कंपोस्ट में केवल अच्छी तरह सड़ा हुआ गोबर, सूखी पत्तियां, फसल अवशेष और अन्य जैविक कचरा ही डालना चाहिए. इसमें ताजा गोबर, प्लास्टिक, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक या अन्य हानिकारक पदार्थों का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे केंचुओं के साथ-साथ खाद की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है.''

जल निकासी की ठोस व्यवस्था करें

सीधी जिले के कृषि विशेषज्ञ परवेश शुक्ला का कहना है कि, ''इस समय हुई बरसात के दौरान यदि किसान नियमित निगरानी, उचित जल निकासी, पर्याप्त हवा के आवागमन और सही जैविक सामग्री का उपयोग सुनिश्चित करें, तो कम समय में उच्च गुणवत्ता की वर्मी कंपोस्ट तैयार की जा सकती है. जहां इस जैविक खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और खेती की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आती है. यही कारण है कि बारिश के मौसम में थोड़ी सावधानी किसानों को बड़ा लाभ दिला सकती है.''

इस जैविक खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और खेती की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आती है. यही कारण है कि बारिश के मौसम में थोड़ी सावधानी किसानों को बड़ा लाभ दिला सकती है.