स्कूल के गेट से लेकर पेड़ों तक क्यूआर, हर सवाल का डिजिटल जवाब, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित
सीधी के माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक शैलेंद्र प्रताप सिंह बालेंदु राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से होंगे सम्मानित. मनोज कुमार शुक्ला की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 22, 2026 at 10:53 PM IST
सीधी: शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय की पाठशाला कंजवार के माध्यमिक शिक्षक शैलेंद्र प्रताप सिंह बालेंदु को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चुना गया है. उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें सम्मानित करेंगी. इस साल प्रदेश भर से 2 शिक्षकों का नाम राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित हुए हैं. इनमें शैलेंद्र प्रताप का चयन होना प्रदेश के लिए गर्व की बात है. वहीं, दूसरी शिक्षक भोपाल की डॉ. अर्चना शुक्ला का नाम शामिल है.
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित
1 जुलाई 1978 को जन्में शैलेंद्र प्रताप सिंह ने अंग्रेजी, इतिहास और भूगोल विषयों से एमए किया है. इसके अलावा उन्होंने बीएड और डीएड भी कंप्लीट किया है. जहां वर्ष 2011 में उनकी पहली पदस्थापना अगरियान टोला कंजवार के प्राथमिक विद्यालय में हुई थी. तब वहां केवल 11 बच्चों का ही नामांकन था और नियमित रूप से केवल तीन बच्चे ही स्कूल आते थे. लगातार प्रयासों के बाद नामांकन 121 तक पहुंचा है.
घर-घर से चंदा जुटाकर स्कूल का किया कायाकल्प
शैलेंद्र प्रताप सिंह ने 13 अगस्त 2024 को कंजवार स्कूल के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में प्रभारी प्रधानाध्यापक का दायित्व संभालना. इसके बाद उन्होंने जर्जर और सीमित संसाधनों वाले स्कूल की तस्वीर ही पूरी तरह से बदल दी. जनभागीदारी से घर-घर जाकर उन्होंने लोगों से बात की और करीब 5 लाख रुपये जुटाकर बाउंड्रीवॉल, पेयजल, मरम्मत, रंगाई-पुताई और फर्नीचर की व्यवस्था कराई. इसके बाद विद्यालय में छात्रों का नामांकन 69 से बढ़कर 202 हो गया और पढ़ने आने वाले छात्रों की संख्या 36 से बढ़कर 107 तक पहुंच गई. इसके साथ ही 26 ड्रॉपआउट बच्चों का पुनः नामांकन भी कराया गया है.
क्यूआर कोड बना स्कूल की मुख्य पहचान
इस विद्यालय के मेन गेट पर बड़ा क्यूआर कोड लगाया गया है. इसे स्कैन करते ही स्कूल की पुरानी और वर्तमान स्थिति, गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी वीडियो के माध्यम से मिल जाती है. इसके अलावा परिसर में लगाए गए पेड़ों पर भी अलग-अलग क्यूआर कोड हैं. जिन्हें स्कैन करने पर पौधे, उसे लगाने वाले जनप्रतिनिधि या गणमान्य व्यक्ति और उससे जुड़ी जानकारी सामने आ जाती है. वहीं स्कूल में 30 से 35 क्यूआर कोड के माध्यम से सौरमंडल, ग्रहों और सामान्य ज्ञान के कठिन प्रश्नों के उत्तर वीडियो व टेक्स्ट के रूप में उपलब्ध भी कराए गए हैं.

सामान्य ज्ञान को दीवारों पर उतारा
इस स्कूल की सबसे खास बात ये है कि सप्ताह के हर शनिवार को नो बैग डे के तहत बच्चे किताबों की जगह मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन सीखते हैं. बाद में उनकी परीक्षा भी ली जाती है. यहां तक की सामान्य ज्ञान को स्कूल परिसर की दीवारों और मैदान तक उतारा गया है, ताकि बच्चे खेल-खेल में सीख सकें. इसके अलावा पर्यायवाची शब्दों को चित्रों के माध्यम से रोचक ढंग से पढ़ाया जाता है.
स्कूल में जैविक तरीके से उगाई जाती है सब्जियां
इसके अलावा यहां के मिड-डे मील के लिए स्कूल परिसर में जैविक तरीके से सब्जियां भी उगाई जाती हैं. बच्चे और शिक्षक ही उन्हें तोड़कर लाते हैं और इन्हीं से बच्चों के लिए भोजन तैयार किया जाता है. शिक्षण बगीचा, पोषण वाटिका, बाल संसद, छात्र प्रधानाध्यापक जैसी गतिविधियों के साथ स्कूल को निजी और कॉन्वेंट स्कूलों जैसी सुविधाओं और माहौल में विकसित करने का प्रयास भी किया गया है. वहीं शिक्षक बताते हैं कि शासन से मिलने वाली राशि के अतिरिक्त जरूरत पड़ने पर शिक्षक और सक्षम अभिभावक सहयोग करते हैं.
सरकारी स्कूल पर बढ़ा विश्वास
इस माध्यमिक विद्यालय में शैलेंद्र सिंह के साथ अंजलि विश्वकर्मा, संदीप प्रजापति, विष्णु देव सिंह, आलोक मिश्रा और शिक्षा मिश्रा भी पदस्थ हैं. स्थानीय निवासी राजकुमार जायसवाल बताते हैं, "पहले मेरे बच्चे निजी स्कूल में पढ़ते थे, लेकिन शैलेंद्र सिंह के आने के बाद गांव के लोगों का भरोसा सरकारी स्कूल पर बढ़ा है. अब हमने निजी स्कूल से बच्चों का नाम कटवाकर सरकारी स्कूल में बच्चों का नामांकन कराया है. अब हमारे गांव की प्राइवेट स्कूल बंद हो गई है."
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शिक्षा से समाज में स्थाई बदलाव लाना मकसद
शिक्षक रामबहोर मिश्र ने कहा, "हम यहां की गतिविधियां देखने और सीखने आते हैं. हमारे अलावा दूर-दूर से लोग इस स्कूल को देखने पहुंचते हैं. राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयन से सीधी जिले का नाम रोशन हुआ है." राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित शैलेंद्र प्रताप सिंह बालेंदु ने बताया, "मेरा लक्ष्य सरकारी स्कूलों में ऐसा माहौल बनाना है जहां सभी बच्चों को आधुनिक, रोचक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके. शिक्षा के जरिए समाज में स्थायी बदलाव आए."

