सिद्धार्थनगर में 80 फीट ऊंची जर्जर टंकी पर चढ़े थे 5 बच्चे; सीढ़ी टूटने से एक बच्चे की मौत, एयरफोर्स ने दो को बचाया
पानी की टंकी की सीढ़ी टूटने से 3 बच्चे नीचे गिर गए, इसमें एक की मौत हो गई. दो बच्चे हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किये गये.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : May 6, 2026 at 6:19 PM IST
|Updated : May 7, 2026 at 3:04 PM IST
सिद्धार्थनगर: सिद्धार्थनगर जनपद के सदर थाना क्षेत्र में कांशीराम आवास योजना के पास बनी पानी की टंकी की सीढ़ी टूटने से शनिवार को एक हादसा हो गया था. दोपहर के समय पांच बच्चे इस टंकी पर चढ़ रहे थे, जिनमें से दो बच्चे ऊपर पहुंच गए जबकि तीन अन्य सीढ़ी पर ही थे.
इसी दौरान अचानक बीच की सीढ़ी भरभराकर टूट गई और लटक गई, जिससे लगभग 80 फीट की ऊंचाई से तीन बच्चे नीचे गिर पड़े. इस हादसे में 14 वर्षीय सिद्धार्थ की मौत हो गई थी, जबकि 13 वर्षीय गोलू और 11 वर्षीय सनी का मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है.
टंकी पर फंसे बच्चों का सेना ने किया रेस्क्यू: सीढ़ी और बच्चों के गिरने की तेज आवाज सुनकर कॉलोनी के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को सूचित किया. दो बच्चे ऊपर टंकी में ही फंस गए थे, जिन्हें सुरक्षित नीचे उतारना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था. जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी एन ने बताया कि शुरुआत में हाइड्रोलिक सीढ़ी का इस्तेमाल करके बच्चों को उतारने का प्रयास किया गया था. हालांकि, वाहन के अत्यधिक भारी होने, रास्ते में पानी भरा होने और दलदली जमीन में वाहन फंसने के डर के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका.
मुख्यमंत्री कार्यालय और सेना की मदद से बची जान: प्रशासन ने मिट्टी डालकर रास्ता बनाने का प्रयास भी किया, लेकिन रात में वर्षा होने के कारण वह रास्ता फिर से गीला हो गया. इसके बाद जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क किया और बचाव अभियान के लिए सेना की मदद मांगी. सेना के हेलिकॉप्टर की मदद से एक साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें जवानों ने टंकी पर फंसे दोनों बच्चों को सकुशल नीचे उतारा. हेलिकॉप्टर के पंखों की हवा से हो रहे कंपन के कारण यह ऑपरेशन काफी जोखिम भरा था, लेकिन सेना के जवानों ने सफलतापूर्वक बच्चों को गोरखपुर पहुंचाया. वहां उपचार के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया.
लोहे की सीढ़ी टूटने के कारण हादसा: 2 मई 2026 को दोपहर करीब 3:00 बजे के बीच हुआ था. कांशीराम आवास कॉलोनी में बच्चे सोशल मीडिया के लिए रील बनाने के लिए जर्जर पानी की टंकी पर चढ़े थे. पांच बच्चे टंकी पर चढ़े थे, उतरते समय इसकी पुरानी और जंग लगी लोहे की सीढ़ी टूट गई. तीन बच्चे नीचे गिर गए, जिनमें से एक की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हो गए. बाकी के 2 बच्चे करीब 16 से 18 घंटे तक टंकी के ऊपर ही फंसे रहे। उन्हें अगले दिन रविवार (3 मई) को सुबह करीब 5:20 - 5:30 बजे भारतीय वायु सेना के Mi-17 हेलीकॉप्टर की मदद से रेस्क्यू किया गया.
टंकी का निर्माण 1989 में हुआ था: यह पानी की टंकी 1989 में बनाई गई थी. स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार, निर्माण के मात्र 4 साल बाद ही इसमें लीकेज शुरू हो गया था और पिछले 27-28 वर्षों से यह उपयोग में नहीं थी. पानी की टंकी को लगभग 20 साल पहले ही निष्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका था. यह टंकी लगभग 60 से 80 फीट ऊंची है.
दो दशक से कंडम थी पानी की टंकी: क्षेत्रीय सभासद सतीश रस्तोगी ने बताया कि कांशीराम कॉलोनी के पीछे बनी यह पानी की टंकी दो दशक पहले ही कंडम घोषित की जा चुकी थी. जर्जर अवस्था में होने के बावजूद इसके आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है. मामले की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी, आला अधिकारियों सहित भारी संख्या में पुलिस बल और राहत बचाव दल मौके पर पहुंच गया था. फिलहाल, इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और पुरानी इमारतों व ढांचों के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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