छत्तीसगढ़ का केदारनाथ धाम, पहाड़ पर विराजे सिद्ध बाबा, सावन में मिलता महादेव का आशीर्वाद
छत्तीसगढ़ में पहाड़ की चोटी पर विराजे सिद्ध बाबा शिवभक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं. रजनीश श्रीवास्तव की रिपोर्ट

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : August 22, 2026 at 7:21 PM IST
मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 290 किलोमीटर दूर मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले की पहाड़ियों पर सिद्ध बाबा का मंदिर है. भगवान महादेव के भक्तों के लिए यह मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है. यह मंदिर केदारनाथ बाबा की थीम पर बना हुआ है. इस वजह से यह श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है.
केदारनाथ के तर्ज पर मंदिर हुआ विकसित
सिद्ध बाबा धाम को नया स्वरूप देने और इसे केदारनाथ की तर्ज पर विकसित करने का काम 20 फरवरी 2020 से शुरू किया गया. मंदिर का स्वरूप और पहाड़ के ऊपर इसकी स्थिति श्रद्धालुओं को काफी आकर्षित करती है इसी वजह से बड़ी संख्या में भक्त इसे प्यार से मिनी केदारनाथ भी कहने लगे हैं. मंदिर तक पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं को चारों ओर पहाड़ों और हरियाली का जो दृश्य दिखाई देता है, वह इस धाम की खूबसूरती को और बढ़ा देता है धार्मिक वातावरण के साथ प्राकृतिक सौंदर्य का यह मेल सिद्ध बाबा धाम को एक अलग पहचान देता है.
पहाड़ के ऊपर बना सिद्ध बाबा का मंदिर बेहद भव्य है और प्रकृति की गोद में बसा हुआ है. श्रद्धालुओं के बीच इसे मिनी केदारनाथ के रूप में पहचान मिल रही है-सिद्धार्थ तिवारी, श्रद्धालु, मरवाही

जो लोग केदारनाथ नहीं जा पाते उनके लिए सिद्ध बाबा धाम में भगवान के दर्शन और पहाड़ों के बीच आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव बेहद खास है-रश्मि तिवारी, श्रद्धालु
सिद्ध बाबा मंदिर के बारे में जानकारी
सिद्ध बाबा धाम स्थित भोलेनाथ मंदिर को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं. इस मंदिर की स्थापना साल 1905 में हुई थी. मंदिर की लंबाई करीब 65 फीट है. इस मंदिर की चौड़ाई 30 फीट है. गर्भगृह की ऊंचाई लगभग 16 फीट बताई जाती है. मंदिर के आसपास मौजूद प्राचीन शिलालेख भी इस स्थान के ऐतिहासिक महत्व की ओर इशारा करते हैं. सिद्ध बाबा धाम लंबे समय से क्षेत्रवासियों की आस्था का केंद्र रहा है समय के साथ इस स्थान की प्रसिद्धि आसपास के जिलों से निकलकर प्रदेश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचने लगी है.

सिद्ध बाबा धाम की महिमा
सिद्ध बाबा धाम को लेकर श्रद्धालुओं के बीच कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं. स्थानीय आस्था के अनुसार सिद्ध बाबा कभी सांप के रूप में तो कभी बाबा के स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस पवित्र धाम में सच्चे मन से की गई प्रार्थना जरूर स्वीकार होती है और बाबा अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं. इस मंदिर की आस्था दूर-दराज से लोगों को यहां खींचकर लाती है.

कई श्रद्धालु वर्षों से लगातार सिद्ध बाबा के दर्शन करने पहुंच रहे हैं कुछ भक्त विशेष अवसरों पर जल लेकर मंदिर पहुंचते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं.सिद्ध बाबा धाम से जुड़े श्रद्धालुओं में भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था देखने को मिलती है. श्रद्धालु हसदेव नदी से जल लेकर बाबा को अर्पित करते हैं. कई भक्तों के लिए यह सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि वर्षों से चली आ रही आस्था और परंपरा का हिस्सा है.

करीब सात-आठ वर्षों से मैं लगातार सिद्ध बाबा धाम का दर्शन करते आ रहा हूं. कई श्रद्धालु सुल्तानगंज से करीब 120 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर यहां पहुंचते हैं और बाबा पर जल चढ़ाते हैं. कई श्रद्धालु हसदेव नदी से जल लेकर बाबा को अर्पित करते हैं- प्रिंस, श्रद्धालु
सावन में सिद्ध बाबा धाम दिखता है खूबसूरत
सिद्ध बाबा धाम जिस क्षेत्र में स्थित है वह आदिवासी बाहुल्य इलाका है. मंदिर के आसपास आदिवासी समुदाय के लोग निवास करते हैं स्थानीय संस्कृति और धार्मिक आस्था का प्रभाव यहां साफ दिखाई देता है. आदिवासी समुदाय के बीच सिद्ध पूजा की परंपरा भी इस स्थान को विशेष धार्मिक पहचान देती है. बारिश के मौसम में यहां की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है.
पहाड़ियों पर छाई हरियाली और बादलों से घिरा आसमान इस पूरे क्षेत्र को बेहद मनोरम बना देता है. यही कारण है कि धार्मिक यात्रा के साथ-साथ बड़ी संख्या में लोग यहां प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने भी पहुंचते हैं सिद्ध बाबा धाम की सबसे बड़ी ताकत यहां की श्रद्धा है. कोई भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचता है, कोई मनोकामना लेकर आता है तो कोई वर्षों पुरानी परंपरा को निभाने के लिए कई श्रद्धालु ऐसे हैं जो हर साल इस धाम में पहुंचते हैं.

