श्रावण माह का आज अंतिम सोमवार, कर लीजिए पहाड़ पर विराजे दुर्लभ कैलाश महादेव के दर्शन
मान्यता है कि यहां जो भी भक्त महादेव के दरबार में अर्जी लगाता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है. मुकेश श्रीवास की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : August 24, 2026 at 8:06 PM IST
दंतेवाड़ा: श्रावण माह का आज अंतिम सोमवार है. छोटे कारली पहाड़ पर विराजे श्री श्री 108 कैलाश महादेव मंदिर में आज भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी. कारली पहाड़ पर विराजे शिव मंदिर में दूर-दूर से भक्त भगवान के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि यहां महादेव के दरबार में जो भक्त अर्जी लगाता है, उसकी इच्छा महादेव जरूर पूरी करते हैं. स्थानीय लोग और मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यह मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र दशकों से रहा है.
कारली पहाड़ी पर विराजे शिव जी के दर्शनों के लिए भक्तों को ऊंचे नीचे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है. दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से ये मंदिर करीब 6 किमी दूर है. इलाके की प्राकृतिक छटा मंदिर की सुंदरता में चार चांद लगाता है. भक्तों का कहना है कि मंदिर में स्थापित भगवान की प्रतिमा अदभुत है.
लाल कपड़े में नारियल बांधकर लगाते हैं भक्त अर्जी
श्रावण के अंतिम सोमवार को मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की. यहां भक्त अपनी मनोकामना को अर्जी के रूप में लिखकर लाल कपड़े में नारियल के साथ बांधकर मंदिर में चढ़ाते हैं. भक्तों के बीच मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने के बाद वे दोबारा मंदिर पहुंचकर अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भेंट भोलेनाथ को अर्पित करते हैं. सावन सोमवार के आज आखिरी दिन सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया और देर शाम तक जारी रहा.
''7 वर्ष की उम्र से स्वप्न में आते थे महादेव''
मंदिर के पुजारी महेश मुरामी, जिन्हें लोग प्यार से बाबा के नाम से पुकारते हैं, उन्होने बताया कि जब वे करीब 7 वर्ष के थे और हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहे थे, तभी से उन्हें स्वप्न में अक्सर भगवान महादेव के दर्शन होने लगे. एक दिन नदी में स्नान करने के दौरान उन्हें एक पत्थर दिखाई दिया, जिसे उन्होंने सामान्य पत्थर समझकर छोड़ दिया और घर लौट आए. घर पहुंचकर उन्होंने अपने माता-पिता को नदी में दिखाई दिए उस पत्थर के बारे में बताया. इसके बाद वे माता-पिता के साथ दोबारा नदी के पास पहुंचे और उस पत्थर को घर लाकर विधि-विधान से स्थापित किया. इसके बाद महेश मुरामी पूरी तरह भगवान शिव की भक्ति में लीन हो गए. उन्होंने लंबे समय तक कठिन साधना और उपवास किया और इसके बाद भगवान शिव की सेवा को ही अपना जीवन समर्पित कर दिया.
2010 में हुआ भव्य मंदिर का निर्माण
पुजारी महेश मुरामी की मानें तो, साल 2010 में घर के नजदीक भगवान शिव के लिए भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया. विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा के बाद मंदिर में भगवान महादेव के साथ माता पार्वती की प्रतिमा भी स्थापित की गई. शुरुआत में आसपास के ग्रामीण ही मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचते थे, लेकिन समय के साथ मंदिर की ख्याति बढ़ती गई. स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच मनोकामना पूरी होने की मान्यताओं के चलते धीरे-धीरे दूर-दराज के लोग भी यहां पहुंचने लगे.
ओडिशा से भी आते हैं यहां भक्त
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यहां पड़ोसी राज्य ओडिशा सहित दूसरे जिलों से भी भक्त बड़ी संख्या में दर्शनों के लिए पहुंचते हैं. मंदिर तक पहुंचने वाले रास्ते को बेहतर बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों और स्थानीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि बुजुर्गों, महिलाओं और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में परेशानी न हो.
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