हांसी के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा, नेत्र रोग के मरीजों को सप्ताह भर करना पड़ता है इंतजार
हांसी जिला बन चुका है, लेकिन नागरिक अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञों की कमी से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

Published : July 3, 2026 at 8:02 PM IST
हांसी: हिसार से कटकर हांसी जिला तो बना लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी हकीकत अब भी सवालों के घेरे में है. नागरिक अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञों की कमी के कारण आंखों के मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सप्ताह में केवल शुक्रवार को ही आंखों की जांच होने से मरीजों को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है. लोगों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जल्द समाधान किया जाए.
डॉक्टर के आभाव में इलाज बाधितः हांसी के नागरिक अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञों की कमी के चलते आंखों की जांच और उपचार प्रभावित हो रहा है. अस्पताल में सप्ताह में केवल एक दिन, शुक्रवार को ही नेत्र रोग विशेषज्ञ उपलब्ध होते हैं. ऐसे में अन्य दिनों में आने वाले मरीजों को या तो अगली तारीख दी जाती है या फिर बिना उपचार के वापस लौटना पड़ता है.
जिला बना, सुविधाओं को भी बढ़ाना चाहिएः रोहनात निवासी बंटी ने बताया है कि आर्थिक रूप से सक्षम लोग तो निजी अस्पतालों में इलाज करा लेते हैं, लेकिन गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए सरकारी अस्पताल ही एकमात्र सहारा है. जिला बनने के बाद भी यदि विशेषज्ञ डॉक्टरों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो पाई है, तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है.
नियमित नेत्र चिकित्सक की तैनाती होः रामायण गांव से पहुंचे कृष्ण कुमार ने कहा कि हांसी नागरिक अस्पताल में नियमित रूप से नेत्र रोग विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाए, ताकि मरीजों को समय पर जांच और इलाज मिल सके और उन्हें बार-बार अस्पताल के चक्कर न लगाने पड़ें.
गरीब मरीजों के लिए सरकारी अस्पताल ही एक मात्र सहाराः चानौत निवासी मरीज रविन्द्र का कहना है कि "सप्ताह में केवल एक दिन विशेषज्ञ डॉक्टर मिलने से बाकी दिनों में आने वाले लोगों को बिना इलाज लौटना पड़ता है. आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए निजी अस्पताल में इलाज कराना आसान नहीं है, इसलिए वे सरकारी अस्पताल पर ही निर्भर हैं."
नेत्र रोग विशेषज्ञ के लिए भेजा जा चुका है पत्रः वहीं हांसी के सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. राहुल बुद्धिराजा ने बताया कि "नेत्र रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति को लेकर उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है. विभाग इस समस्या से अवगत है और जल्द ही इसका समाधान होने की उम्मीद है, ताकि मरीजों को नियमित रूप से नेत्र संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें."

