Explainer : छत्तीसगढ़ में एड्स के आंकड़े चिंताजनक, जानिए पड़ोसी राज्यों में बढ़ते संक्रमण के बीच प्रदेश कितना है तैयार ?
छत्तीसगढ़ में एड्स को लेकर हालात किस दिशा में जा रहे हैं. इसकी पूरी पड़ताल की गई है. प्रवीण कुमार सिंह की रिपोर्ट

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : August 27, 2026 at 2:22 PM IST
रायपुर: भारत के कई राज्यों में एचआईवी संक्रमण के बढ़ते मामलों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है. छत्तीसगढ़ के पड़ोसी महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में संक्रमण के आंकड़े चर्चा में हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि छत्तीसगढ़ में एचआईवी और एड्स की मौजूदा स्थिति क्या है.
प्रदेश में कितने लोग उपचार ले रहे हैं, किन जिलों में संक्रमण की चुनौती ज्यादा है और सरकार की रोकथाम की तैयारियां कितनी प्रभावी हैं, इसी पड़ताल में एक तरफ रायगढ़ जैसे जिलों से बढ़ते मामलों की तस्वीर सामने आती है, तो दूसरी तरफ मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर यानी एमसीबी जिले की 95-95-95 लक्ष्य में उपलब्धि उम्मीद भी जगाती है.
पड़ोसी राज्यों में बढ़ते मामले, छत्तीसगढ़ भी अलर्ट
पड़ोसी राज्यों में एचआईवी संक्रमण के बढ़ते मामलों ने छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र को भी सतर्क कर दिया है. स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का कहना है कि सरकार जागरूकता के माध्यम से लगातार लोगों को एचआईवी से बचाव के बारे में जानकारी दे रही है.स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि अगर सीमावर्ती राज्यों में संक्रमण बढ़ रहा है, तो छत्तीसगढ़ को भी सतर्क रहने की जरूरत है. उनका कहना है कि एचआईवी की रोकथाम केवल सरकार या स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है.

रायगढ़ में बढ़े एचआईवी के मामले, 747 सक्रिय मरीज
छत्तीसगढ़ में एचआईवी संक्रमण को लेकर रायगढ़ से सामने आए आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं. जून 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिले में 56 नए एचआईवी संक्रमित मरीज सामने आए, जिसके बाद सक्रिय मरीजों की संख्या 747 तक पहुंच गई. सबसे चिंता की बात यह है कि इनमें 14 वर्ष तक की उम्र के 16 बच्चे भी शामिल हैं. स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में नशीले इंजेक्शनों का साझा इस्तेमाल संक्रमण फैलने की बड़ी वजहों में से एक माना जा रहा है. नशे के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान कुछ बच्चों को नशीले पदार्थों का सेवन करते पकड़ा गया था. बाद में उनकी काउंसलिंग और स्वास्थ्य जांच कराई गई. जांच के दौरान तीन बच्चों के एचआईवी संक्रमित होने की पुष्टि हुई.

कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी संक्रमण की संख्या
रायगढ़ में एचआईवी संक्रमण के मामलों का आंकड़ा पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है. वर्ष 2022-23 में जिले में 77 एचआईवी संक्रमितों का आंकड़ा दर्ज था. वर्ष 2024 में यह संख्या 125 तक पहुंची. वर्ष 2025 में 193 नए मामले सामने आए. वहीं वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में 56 नए मरीज सामने आने के बाद सक्रिय मरीजों की संख्या 691 से बढ़कर 747 हो गई. स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक युवाओं में नशीले इंजेक्शनों का साझा इस्तेमाल संक्रमण फैलने की गंभीर वजह बनकर सामने आया है.

प्रदेश में कितने एचआईवी संक्रमित ?
छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026 के लिए पूरे प्रदेश का एकल और लगातार अपडेट होने वाला कुल मरीज आंकड़ा सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है. हालांकि, राज्य एड्स नियंत्रण समिति के दस्तावेज में प्रदेश के आठ प्रमुख एंटीरेट्रोवायरल उपचार केंद्रों पर उपचाररत एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या दर्ज है. रायपुर केंद्र में 5 हजार 225, दुर्ग में 4 हजार 569, बिलासपुर में 3 हजार 641, सरगुजा में 1 हजार 58, बस्तर में 1 हजार 137, कोरबा में 410, रायगढ़ में 345 और राजनांदगांव में 320 लोगों का उपचार भार दर्ज किया गया था. इन आठ केंद्रों का आंकड़ा जोड़ें तो संख्या 16 हजार 705 होती है. हालांकि यह पूरे प्रदेश के कुल संक्रमितों की संख्या नहीं है. राज्य एड्स नियंत्रण समिति के अनुसार उपचार केंद्रों का यह भार लगातार बदलने वाला आंकड़ा है.
बिलासपुर में 2010 से अब तक 9 हजार से ज्यादा पंजीकरण
बिलासपुर के सिम्स एंटीरेट्रोवायरल उपचार केंद्र के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2010 से 2025 तक कुल 9 हजार 423 एचआईवी संक्रमित पंजीकृत हुए. इनमें 5 हजार 492 पुरुष, 3 हजार 295 महिलाएं और 74 ट्रांसजेंडर शामिल हैं. वर्तमान में 4 हजार 472 मामले सक्रिय बताए गए हैं और ये मरीज नियमित रूप से दवा ले रहे हैं. यह आंकड़ा केवल बिलासपुर एंटीरेट्रोवायरल उपचार केंद्र से संबंधित है, इसलिए इसे पूरे प्रदेश का आंकड़ा नहीं माना जा सकता.
एमसीबी में करीब 312 संक्रमित, 95-95-95 लक्ष्य में बड़ी उपलब्धि
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर यानी एमसीबी जिले में स्वास्थ्य विभाग के अनुसार करीब 312 एचआईवी संक्रमित लोग हैं. इनमें 226 लोग मनेंद्रगढ़ विकासखंड से संबंधित हैं. सीमावर्ती क्षेत्रों और दूसरे जिलों से भी मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं. लेकिन संक्रमण की चुनौती के बीच एमसीबी ने एचआईवी नियंत्रण कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले ने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के 95-95-95 लक्ष्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है.

पहला लक्ष्य है: एचआईवी से संक्रमित लोगों की पहचान.
दूसरा: पहचान किए गए लोगों को उपचार से जोड़ना.
तीसरा: उपचार के जरिए उनके शरीर में वायरस की मात्रा यानी वायरल भार को नियंत्रित करना.
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि एमसीबी ने इन लक्ष्यों को लगभग पूरी तरह हासिल करते हुए छत्तीसगढ़ में अलग पहचान बनाई है.
डेढ़ साल पहले शुरू हुआ एंटीरेट्रोवायरल उपचार केंद्र
एमसीबी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के मुताबिक करीब डेढ़ साल पहले जिले में एंटीरेट्रोवायरल उपचार केंद्र की शुरुआत की गई थी. इससे स्थानीय मरीजों को अपने जिले में ही दवाएं मिलने लगीं। पहले मरीजों को दवा लेने के लिए दूसरे स्थानों पर जाना पड़ता था, जिससे उनका समय और आने-जाने का खर्च बढ़ता था. अब स्थानीय स्तर पर दवा उपलब्ध होने से मरीजों को काफी सुविधा हुई है.
सरकारी एंटीरेट्रोवायरल उपचार केंद्रों में निशुल्क दवा है उपलब्ध
एंटीरेट्रोवायरल उपचार यानी एआरटी के जरिए शरीर में वायरस की गतिविधि को नियंत्रित किया जा सकता है. नियमित दवा लेने वाले व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं. सरकारी एंटीरेट्रोवायरल उपचार केंद्रों पर यह दवा निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है.
सरकार की रोकथाम क्या है रणनीति
छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति और स्वास्थ्य विभाग की ओर से एचआईवी की रोकथाम के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है.
जांच और परामर्श : सरकारी अस्पतालों में एकीकृत परामर्श एवं जांच केंद्र यानी आईसीटीसी के माध्यम से एचआईवी की निशुल्क जांच और परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है.
उपचार से जोड़ना : जांच में एचआईवी संक्रमित पाए जाने वाले लोगों को एंटीरेट्रोवायरल उपचार केंद्रों से जोड़ा जाता है. यहां निशुल्क दवाएं और नियमित चिकित्सकीय निगरानी की व्यवस्था की जाती है.
जोखिम वाले समूहों तक पहुंच : जिन समुदायों में संक्रमण का जोखिम अधिक है, वहां जागरूकता, परामर्श, जांच और रोकथाम की गतिविधियां संचालित की जाती हैं.
सुरक्षित रक्त : रक्त संक्रमण के जरिए एचआईवी फैलने के जोखिम को कम करने के लिए रक्त की जांच और सुरक्षित रक्त व्यवस्था पर जोर दिया जाता है.
यौन संक्रमणों का उपचार : यौन और प्रजनन मार्ग से होने वाले संक्रमणों की जांच और उपचार को भी एचआईवी रोकथाम कार्यक्रम से जोड़ा गया है.
युवाओं तक पहुंचने के लिए जागरूकता अभियान
एचआईवी की रोकथाम के लिए सिर्फ अस्पतालों तक सीमित रहने के बजाय युवाओं और समुदाय तक पहुंचने पर भी जोर दिया जा रहा है. कॉलेजों में रेड रिबन क्लब के माध्यम से एचआईवी से बचाव, सुरक्षित व्यवहार, स्वैच्छिक रक्तदान और एचआईवी से जुड़े भ्रम दूर करने के लिए गतिविधियां आयोजित की जाती हैं. सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों के जरिए भी लोगों तक सही जानकारी पहुंचाई जा रही है.
छत्तीसगढ़ में एड्स के खिलाफ अभियान की जानकारी
- जुलाई 2026 में छत्तीसगढ़ में एचआईवी जागरूकता को लेकर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए.
- 23 जुलाई को बिलासपुर में एक कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें सामाजिक माध्यमों से जुड़े प्रभावशाली लोगों को एचआईवी जागरूकता अभियान से जोड़ने की पहल की गई.
- 30 जुलाई को रायपुर में पुलिस विभाग और सशस्त्र बलों के अधिकारियों के लिए एचआईवी और एचआईवी/एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण अधिनियम 2017 पर संवेदनशीलता बैठक आयोजित की गई.
- 27 जुलाई को रायपुर में परिवहन विभाग और राज्य एड्स नियंत्रण समिति के बीच समन्वय बैठक हुई. इसमें एचआईवी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और जनजागरूकता गतिविधियों के विस्तार पर चर्चा हुई.
- 26 जुलाई को एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारियों के लिए संवेदनशीलता कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें एचआईवी नियंत्रण कार्यक्रम की नई रणनीतियों पर चर्चा हुई.
गीत-नाटक के जरिए गांवों तक पहुंचेगी जागरूकता
बिलासपुर जिले में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कला दलों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम कराने की तैयारी की गई है. इन कार्यक्रमों में गीत, नाटक और दूसरे सांस्कृतिक माध्यमों के जरिए एचआईवी से बचाव, जांच और उपचार से जुड़ी जानकारी लोगों तक पहुंचाने की योजना है.
संक्रमित लोगों के लिए सिर्फ दवा नहीं, सहारे की भी जरूरत
छत्तीसगढ़ नेटवर्क ऑफ पॉजिटिव पीपल यानी सीएनपी प्लस की अध्यक्ष रिंकी अरोड़ा का कहना है कि उनकी संस्था वर्ष 2009 से एचआईवी संक्रमित लोगों के लिए काम कर रही है. इससे 9 हजार से ज्यादा सदस्य जुड़े हैं. उनका दावा है कि प्रदेश में करीब 40 हजार एचआईवी संक्रमित लोग हैं, जिनमें करीब 26 हजार लोग दवा ले रहे हैं।.उनके मुताबिक बाकी लोगों में कुछ दूसरे स्थानों पर चले गए, कुछ की मृत्यु हो चुकी है और कुछ लोगों ने अपनी इच्छा से दवा लेना बंद कर दिया है.
एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के लिए सिर्फ दवा उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है. उसे परामर्श, भावनात्मक सहारा, सामाजिक भेदभाव से सुरक्षा, कानूनी सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने जैसी मदद की भी जरूरत होती है- रिंकी अरोड़ा,अध्यक्ष, नेटवर्क ऑफ पॉजिटिव पीपल(CNP+), छत्तीसगढ़
देखभाल एवं सहायता केंद्र बंद होने का दावा
रिंकी अरोड़ा का आरोप है कि एचआईवी संक्रमित लोगों के लिए काम करने वाली तीन संस्थाओं को समाप्त कर दिया गया है. उनका कहना है कि इन संस्थाओं के जरिए संक्रमित लोगों को इलाज के साथ-साथ सामाजिक और भावनात्मक सहयोग भी मिलता था. उनका दावा है कि इस मुद्दे को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से लेकर स्वास्थ्य मंत्री और गृह मंत्री तक बातचीत की गई, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है. उनके मुताबिक अगर संस्थाओं को दोबारा शुरू नहीं किया गया, तो वे न्यायालय की शरण लेने की तैयारी कर रहे हैं.
गर्भवती महिलाओं और गरीब मरीजों को लेकर चिंता
रिंकी अरोड़ा के मुताबिक एचआईवी संक्रमित समुदाय के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में आर्थिक कमजोरी और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच शामिल है. उनका कहना है कि खासकर गर्भवती महिलाओं के मामलों में समय पर उपचार और प्रसव की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है. एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला और उसके बच्चे की उचित चिकित्सा निगरानी जरूरी होती है, ताकि बच्चे में संक्रमण के जोखिम को न्यूनतम किया जा सके.उन्होंने यह भी कहा कि कई मरीज आर्थिक कारणों से दूर-दराज के इलाकों से रायपुर आने में सक्षम नहीं हैं. इसलिए जिला स्तर पर सेवाओं को मजबूत करना जरूरी है.
235 लोगों ने प्रदर्शन में उठाई आवाज
रिंकी अरोड़ा के मुताबिक हाल ही में हुए प्रदर्शन में करीब 235 लोग शामिल हुए. उनका कहना है कि इनमें से ज्यादातर एचआईवी संक्रमित लोग आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं और बार-बार रायपुर आना उनके लिए आसान नहीं है.उनका कहना है कि यदि बातचीत और प्रशासनिक स्तर पर समाधान नहीं निकलता, तो संगठन न्यायालय जाने की तैयारी कर रहा है.

एमसीबी की उपलब्धि से उम्मीद, लेकिन चुनौतियां बरकरार
एक तरफ रायगढ़ में नए संक्रमण के मामले और नशीले इंजेक्शनों के साझा इस्तेमाल जैसी चुनौती सामने है, तो दूसरी तरफ एमसीबी में 95-95-95 लक्ष्य की उपलब्धि बताती है कि समय पर जांच, उपचार और नियमित निगरानी से एचआईवी नियंत्रण में प्रभावी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं. यानी प्रदेश के सामने तस्वीर दोहरी है,एक तरफ बढ़ते जोखिम वाले समूहों तक पहुंच बढ़ाने की जरूरत है, तो दूसरी तरफ पहले से संक्रमित लोगों को लगातार उपचार और सामाजिक सहयोग देना भी जरूरी है.

आम लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए
एचआईवी से बचाव के लिए असुरक्षित यौन संबंध से बचना, संक्रमित रक्त से बचाव करना और संक्रमित सुई या सिरिंज का इस्तेमाल नहीं करना बेहद जरूरी है. गर्भवती महिलाओं की समय पर एचआईवी जांच भी महत्वपूर्ण है, ताकि जरूरत पड़ने पर मां और बच्चे दोनों के लिए समय पर चिकित्सकीय कदम उठाए जा सकें. इसके साथ ही एचआईवी से जुड़ा सामाजिक भ्रम दूर करना भी जरूरी है. एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ हाथ मिलाने, साथ बैठने, खाना खाने या सामान्य सामाजिक संपर्क से एचआईवी नहीं फैलता.

डर नहीं, जांच और उपचार जरूरी
एचआईवी पॉजिटिव होना जिंदगी का अंत नहीं है. समय पर जांच, नियमित एंटीरेट्रोवायरल उपचार और चिकित्सकीय सलाह के साथ एचआईवी के साथ लंबा और स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है. जरूरत है कि लोग संक्रमण को लेकर डरने के बजाय समय पर जांच कराएं और संक्रमित पाए जाने पर उपचार शुरू करें. एचआईवी की निशुल्क जांच और परामर्श के लिए नजदीकी सरकारी एकीकृत परामर्श एवं जांच केंद्र से संपर्क किया जा सकता है. राज्य एड्स नियंत्रण समिति की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1097 भी उपलब्ध है.

छत्तीसगढ़ में एचआईवी की तस्वीर पूरी तरह चिंतामुक्त नहीं है. रायगढ़ में बढ़ते मामले और नशे में इंजेक्शनों के साझा इस्तेमाल जैसी चुनौतियां खतरे की घंटी हैं. वहीं एमसीबी का प्रदर्शन यह उम्मीद देता है कि मजबूत जांच, उपचार और निगरानी व्यवस्था से संक्रमण के खिलाफ बेहतर नतीजे हासिल किए जा सकते हैं.अब जरूरत है कि जागरूकता अभियानों को और व्यापक बनाया जाए, जोखिम वाले समूहों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जाए और एचआईवी के साथ जीवन जी रहे लोगों को दवा के साथ-साथ सामाजिक और भावनात्मक सहयोग भी मिले. क्योंकि एचआईवी के खिलाफ लड़ाई सिर्फ वायरस के खिलाफ नहीं, बल्कि अज्ञानता, डर और भेदभाव के खिलाफ भी है.

