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शिवलिंग पर जलाभिषेक से होती थी बारिश! अद्भुत है हिमाचल के इस मंदिर की मान्यता, शिवरात्रि पर भक्तों का सैलाब

हिमाचल में आज शिवरात्रि के अवसर पर शिवालयों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है.

SHIVRATRI 2026
शिवरात्रि 2026 (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 15, 2026 at 2:54 PM IST

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बिलासपुर: महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर बिलासपुर शहर में श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में रविवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है. भक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा की कामना कर रहे हैं. मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयकारों से भक्तिमय वातावरण बना हुआ है. शिवरात्रि के अवसर पर बिलासपुर आज महादेव की भक्ति में रंगा हुआ नजर आ रहा है.

अद्भुत है हिमाचल के इस मंदिर की मान्यता (ETV Bharat)

मंदिर से जुड़ी है अद्भुत मान्यता

वहीं, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में स्थापित खन्मुकेश्वर महादेव शिवलिंग को लेकर एक प्राचीन और अद्भुत मान्यता जुड़ी हुई है. श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के पुजारी बाबूराम पंडित ने बताया कि प्राचीन समय में जब बिलासपुर क्षेत्र में कई वर्षों तक बारिश नहीं होती थी और किसान सूखे की मार से परेशान हो जाते थे, तब यहां के राजा इस शिवलिंग पर विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करते थे. मान्यता है कि जैसे ही राजा शिवलिंग पर जल अर्पित करते, वैसे ही आसमान में बादल घिर आते और क्षेत्र में बारिश शुरू हो जाती थी. इस चमत्कारी विश्वास के कारण यह शिवलिंग आज भी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

SHIVRATRI 2026
श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर (ETV Bharat)

पुजारी बाबूराम पंडित ने बताया कि आज भी महाशिवरात्रि के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव से समय पर वर्षा और अच्छी फसल की कामना कर रहे हैं. किसानों के लिए यह स्थान विशेष महत्व रखता है. कई ग्रामीण आज भी मानते हैं कि खन्मुकेश्वर महादेव की कृपा से क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा होती है.

"यह पवित्र शिवलिंग पहले पुराने बिलासपुर में स्थित था. नए बिलासपुर शहर की स्थापना के बाद इसे विधि-विधान के साथ वर्तमान मंदिर परिसर में स्थापित किया गया. तब से लेकर अब तक यहां निरंतर पूजा-अर्चना होती आ रही है. महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि श्रद्धालु सुचारू रूप से जलाभिषेक कर सकें." - बाबूराम पंडित, पुजारी, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर

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