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शिवपुरी की अद्भुत डाक कांवड़ यात्रा, शिवभक्तों की 48 घंटे में 400 किमी नॉन स्टॉप दौड़

शिवपुरी के खैरोना के कांवड़ियों का अनूठा संकल्प, 50 शिवभक्त युवाओं की 48 घंटे लगातार दौड़. यतीश कुमार की रिपोर्ट.

Shivpuri Dak Kanwar Yatra
शिवपुरी की अद्भुत डाक कांवड़ यात्रा (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : August 10, 2026 at 1:52 PM IST

4 Min Read
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​शिवपुरी : धर्म और आस्था जब जुनून बन जाए तो कठिन से कठिन लक्ष्य भी आसान हो जाते हैं. ऐसा ही कर दिखाया है शिवपुरी के खैरोना गांव के 50 शिवभक्त युवाओं ने. इन शिवभक्तों का अनोखा महासंकल्प पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना है. 50 युवकों का ये समूह 48 घंटे में 400 किमी की दौड़ लगा रहा है.

​शनिवार सुबह 6 बजे उत्तरप्रदेश के सोरोंजी स्थित कचला घाट से इन युवाओं ने डाक कांवड़ उठाई. इनका लक्ष्य सोरोंजी से गंगाजल लेकर 48 घंटे के भीतर लगातार 400 किलोमीटर की दौड़ पूरी करना है. ये युवा अपने अपने गांव खैरोना पहुंचने वाले हैं. 11 अगस्त को गांव के प्रसिद्ध पहाड़ वाले शिव मंदिर में इसी पवित्र जल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया जाएगा. ​

शिवपुरी के खैरोना के कांवड़ियों का अनूठा संकल्प (ETV BHARAT)

भोजन के दौरान भी कांवड़ यात्रा जारी

इस अद्भुत डाक कांवड़ यात्रा के 3 बड़े नियम हैं. नियम के अनुसार कचला घाट से पवित्र गंगाजल उठाने के बाद से लेकर खैरोना के शिव मंदिर पहुंचने तक कांवड़ को एक क्षण के लिए भी ज़मीन पर नहीं रखा जाएगा. जैसे ही कांवड़ लेकर दौड़ रहा धावक थकता है, तुरंत दूसरा साथी दौड़ते हुए ही उस कांवड़ को अपने कंधों पर संभाल लेता है. यात्रा के दौरान जब पूरा दल भोजन या जलपान के लिए रुकता है, तब भी कांवड़ की गति नहीं थमती. जिस युवा के कंधे पर कांवड़ होती है, वह विश्राम करने के बजाय उसी स्थान पर गोल-गोल घेरे में दौड़ता रहता है, जब तक बाकी साथी जलपान करते हैं.

​रिले रेस की तरह कांवड़ यात्रा

यह पूरी यात्रा एक 'रिले रेस' की तर्ज पर आयोजित की गई. एक धावक कांवड़ लेकर सड़क पर दौड़ता है, तो दूसरा साथी बाइक से उसके साथ चलता है. समय पूरा होते ही दूसरा धावक दौड़ते-दौड़ते कांवड़ अपने हाथ में ले लेता है और आगे बढ़ जाता है.

Shivpuri Dak Kanwar Yatra
50 शिवभक्त युवाओं की 48 घंटे लगातार दौड़ (ETV BHARAT)

इस पूरी प्रक्रिया में कांवड़ की रफ्तार कभी भी शून्य नहीं होती. ​7 अगस्त को यह पूरा दल खैरोना के पहाड़ वाले शिव मंदिर में पूजा-अर्चना कर सोरोंजी के लिए रवाना हुआ था. इस पूरी यात्रा को सुचारु रूप से चलाने के लिए 50-55 युवाओं की एक विशेष समिति गठित की गई.

कांवड़ यात्रा में 10 बाइक व एक पिकअप

व्यवस्था बनाए रखने के लिए कांवड़ियों के साथ 10 मोटरसाइकिलें और 1 पिकअप वाहन भी साथ में चला. इसमें आवश्यक सामग्री और दवाएं मौजूद हैं. हर युवा पूरी योजनाबद्ध तरीके से बारी-बारी से दौड़ में हिस्सा ले रहा है. ​गांव के बुजुर्गों और स्थानीय निवासियों ने बताया कि 11 अगस्त को शिव मंदिर में अपने इन युवा कांवड़ियों का स्वागत करने और जलाभिषेक में शामिल होने का ग्रामीण बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

कांवड़ियों के लिए नियमावली

कांवड़ यात्रा एक अत्यंत पवित्र और कठिन धार्मिक यात्रा है. इसके तहत कांवड़िए पवित्र नदियों से जल भरकर पैदल अपने गंतव्य शिवालय तक लाते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. कांवड़ यात्रा लाने के लिए अपने-अपने संकल्प होते हैं. लेकिन कुछ नियम सभी जगह और सबके लिए लागू होते हैं. भोजन सात्विक होता है. मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और किसी भी तरह के नशीले पदार्थों का सेवन नहीं किया जाता. कांवड़ को छूने या उठाने से पहले स्नान करना अनिवार्य है.

डाक कांवड़ सबसे तेज मानी जाती है

बिना स्नान किए कांवड़ को स्पर्श नहीं किया जाता. कांवड़ रखने और ले जाने के दौरान कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखा जाता. आमतौर पर डाक कांवड़ को तेज गति वाला माना जाता है. इसमें शिवभक्त बिना रुके गंगाजल को लेकर अपने गंतव्य की ओर जाते हैं. कभी-कभी इस कांवड़ में कई लोगों का समूह भी शामिल होता है. इस कांवड़ का उद्देश्य एक निश्चित समय सीमा के अंदर शिव मंदिर पहुंचना होता है.