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शिवपुरी के करैरा में 35 साल पुराना फिल्टर प्लांट जर्जर, 50 हजार लोगों पर बीमारी का खतरा

करैरा में पेयजल समस्या गंभीर है. फिल्टर प्लांट जर्जर. 12 हजार की आबादी के लिए बना था प्लांट. अब आबादी 50 हजार.

Karera Filter Plant dilapidated
शिवपुरी में 35 साल पुराना फिल्टर प्लांट, बीमारी का खतरा (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 2, 2026 at 6:08 PM IST

3 Min Read
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शिवपुरी : शिवपुरी के करैरा नगर की पेयजल व्यवस्था गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है. महुअर नदी पर बना फिल्टर प्लांट करीब 35 वर्ष पहले 1990 के दशक में स्थापित किया गया था. ये अब पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है. उस समय शहर की आबादी लगभग 12 हजार थी. बीते वर्षों में शहर का तेजी से विस्तार हुआ.

वर्ष 2011 की जनगणना में आबादी 28 हजार से अधिक हो गई. वर्तमान में यह आंकड़ा 50 हजार से ऊपर पहुंच चुका है. इसके बावजूद फिल्टर प्लांट की क्षमता बढ़ाने या उसके आधुनिकीकरण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. इसलिए फिल्टर प्लांट की स्थिति बेहद दयनीय है.

नदी में पानी स्टॉक वाला हिस्सा क्षतिग्रस्त

फिल्टर प्लांट के गेट क्षतिग्रस्त पड़े हैं और लगातार पानी का रिसाव हो रहा है. हर साल मरम्मत के नाम पर लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं. प्लांट परिसर में गंदगी का अंबार है, जिससे पानी की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है. शहरवासियों को जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, वह कई बार मटमैला और बदबूदार होता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ गए हैं. कुछ क्षेत्रों में तो नल मात्र 20 मिनट तक ही चलते हैं, वह भी दूषित पानी के साथ.

50 करोड़ रुपए की जलावर्धन योजना अधर में

नागरिकों का आरोप है कि नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या की अनदेखी कर रहे हैं. बार-बार शिकायतों के बावजूद स्थाई समाधान नहीं निकाला जा रहा. स्थिति अब केवल असुविधा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप लेती जा रही है. यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में समस्या और विकराल हो जाएगी.

जलावर्धन योजना का काम अधूरा

करैरा की बढ़ती आबादी की जल जरूरतों को देखते हुए वर्ष 2018 में समोहा डेम से शहर तक पानी लाने की जलावर्धन योजना स्वीकृत की गई थी. करीब 50 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है. पाइपलाइन बिछ चुकी है, लेकिन अब तक शहर को पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी. इससे जनता में रोष है.

जल योजना में भ्रष्टााचार का आरोप

लोगों का आरोप है कि योजना भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ गई. परिणामस्वरूप 50 हजार से अधिक आबादी आज भी पुराने और जर्जर फिल्टर प्लांट पर निर्भर रहने को मजबूर है. वार्ड क्रमांक 3 की पार्षद शालिनी सोनी का कहना है "एलम ब्लीचिंग के नाम पर भारी भ्रष्टाचार है. दूषित पानी नगर में पेयजल के नाम भेजा जा रहा है." वहीं, सीएमओ गोपाल गुप्ता का कहना है "इस मामले को जल्द ही दिखवाते हैं. जहां कमी होगी, सुधार करवा लेंगे."