यहां एक ही छत के नीचे शिवलिंग और मजार, हिंदू करते हैं पूजा और मुस्लिम इबादत
बिहार में एक ऐसा शिवालय है, जहां मंदिर के अंदर ही शिवलिंग भी है और मजार भी. पढ़ें इसके पीछे की रोचक कहानी..

Published : February 16, 2026 at 8:46 PM IST
समस्तीपुर: वैसे तो शिव की महिमा अपरंपार है और हर शिवालय की अपनी महत्ता है लेकिन बिहार के समस्तीपुर का बाबा खुदनेश्वर धाम अपनी अलौकिकता और अनन्य ख्याति के लिए प्रसिद्ध है. इसे हिंदू-मुस्लिम एकता की आस्था का भी केंद्र माना जाता है, क्योंकि इस शिवालय में शिवलिंग के साथ-साथ मजार भी है. जहां एक तरफ शिवभक्त महादेव की पूजा करते हैं, वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम समाज के लोग मजार पर इबादत करते हैं.
समस्तीपुर में शिवलिंग और मजार एक साथ: समस्तीपुर जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर मोरवा ब्लॉक में भगवान भोलेनाथ का विशाल मंदिर खुदनेश्वर स्थान अवस्थित है. वैसे तो श्रद्धालुओं को बाहर से यह मंदिर भगवान भोलेनाथ के अन्य मंदिरों की तरह ही दिखेगा लेकिन जब आप इसके गर्भ गृह में जाएंगे तो आपको आस्था का एक अलग ही रंग दिखेगा. यहा आपको भगवान भोलेनाथ के विशाल शिवलिंग के साथ ही उनके करीब मजार नजर आएगी.
शिवलिंग और मजार की कहानी दिलचस्प: एक छत के नीचे शिवलिंग और इस मजार की कहानी दशकों पुरानी है. खुदनेश्वर स्थान मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष इंद्रेश्वर शर्मा बताते हैं कि मंदिर का प्राचीन इतिहास काफी खास है. उन्होंने इस धाम को लेकर अपने पूर्वजों से जो कहानी सुनी, उसके अनुसार वर्तमान मंदिर स्थल पर पहले घनघोर जंगल हुआ करता था. जहां आसपास के लोग अपने जानवरों को चराने आते थे.
क्या है पीछे की कहानी?: इंद्रेश्वर शर्मा बताते हैं कि ये जो शिव मंदिर अवस्थित है, उस जगह पर कई वर्षों पहले एक मुस्लिम महिला (खुदनी बीबी) रोज गाय चराने आती थी. जब गाय चराकर वापस घर जाने लगती थी, तभी शाम को 5 बजे गाय वहां (पत्थरनुमा शिव) खड़ी हो जाती थी. उसके बाद गाय के थन का सारा दूध उस पत्थर पर बह जाता था.

वह बताते हैं कि जब लगातार ऐसे होने लगा तो घरवालों को संदेह हुआ कि उसकी बेटी गाय का दूध चुराकर बेच देती है, क्योंकि रात को गाय दूध नहीं देती. माता-पिता ने कड़ाई से पूछताछ की लेकिन वह बताना नहीं चाहती. खुदनी को सपने में ऐसा एहसास हुआ था कि जिस दिन इस बारे में किसी को बताएगी, उसकी मृत्यु हो जाएगी.
हालांकि जब खुदनी के माता-पिता ने बहुत डांटा-फटकारा तो उसने मजबूर होकर सच्चाई बता दी. ये बात सुनकर भी मां-बाप को यकीन नहीं हुआ. उसने कहा कि अगर ये बात सच तो है तो गाय को चराने ले चलो, आज हमलोग भी अपनी आंखों से सबकुछ देखना चाहते हैं.

खुदनी जब गाय चराने गई तो माता-पिता भी झाड़ियों में छिपकर देखने लगे. जब शाम का समय हुआ तो गाय रोजाना की तरह उस दिन भी पत्थरनुमा शिव के ऊपर खड़ी हो गई. गाय के थन से सारा दूध बहने लगा. माता-पिता ने इसे कोई विशेष 'शक्ति' समझकर वहां से बेटी को लेकर चले गए.
रात को खुदनी की मौत हो गई लेकिन मरने से पहले उसने माता-पिता के सामने अच्छी आखिरी ख्वाहिश जताई कि जहां वह गाय चराने जाती थी, उसी जगह उसको दफना देना. अगली सुबह खुदनी की मां ने सबके सामने ये बात बताई. जिसके बाद तय हुआ कि खुदनी को वहीं पर दफन कर दिया जाए, जहां के लिए उसने इच्छा जाहिर की थी.

मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष बताते हैं कि जब मुस्लिम भाइयों ने कब्र के लिए कुदाल चलाई तो बहुत जोर से आवाज आई. ऐसा लगा कि कोई चमत्कारिक घटना घटी है. उस पत्थर के आकर्षण को देखते हुए वहां पर एक शिवलिंग का गर्भगृह तैयार किया गया. पास में ही खुदनी बीबी की मजार भी है. उसी के नाम पर मंदिर का नाम खुदनेश्वर धाम रखा गया.
"जब ग्रामीण खुदनी बीवी को दफन करने के लिए उस पत्थर पर कुदाल से वार किया, अचानक वहां एक अलग ही रोशनी फैल गई. जिससे ग्रामीण डरकर पीछे हट गए. वैसे कुदाल के निशान आज भी भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग के ऊपर साफ दिखता है. उस दैविक शक्ति को पहचान ग्रामीणों ने उसी पत्थर के करीब खुदनी बीवी को दफन किया."- इंद्रेश्वर शर्मा, अध्यक्ष, खुदनेश्वर स्थान मंदिर न्यास समिति
खुदनी के नाम पर पड़ा खुदनेश्वर धाम: खुदनेश्वर स्थान मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष इंद्रेश्वर शर्मा ने बताया कि इस खास स्थल पर हिन्दू-मुस्लिम समुदाय ने मिलकर एक मंदिर का निर्माण किया, जिसे आज खुदनेश्वर धाम के रूप मे जाना है. वर्तमान में यह मंदिर बिहार राज धार्मिक न्यास बोर्ड के अधीन आता है. वे बताते हैं कि वैसे तो सालो भर भक्तों का जन सैलाब उमरता है लेकिन सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां की विशेष पूजा देखने लायक होती है. मुस्लिम समाज के लोग भी हर पर्व-त्योहार पर अपना सहयोग देते हैं.

हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक: वास्तव में मोरवा स्थित बाबा खुदनेश्वर धाम हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है. जहां एक साथ प्रार्थना और इबादत होती है. दोनों धर्मों के लोगों में इसको लेकर गहरी आस्था है. मुस्लिम समाज के लोग भी इस मंदिर के प्रति अगाध श्रद्धा रखते हैं. हालांकि लोगों की शिकायत है कि सरकारी स्तर पर इसके विस्तार और विकास के लिए कोई खास पहल नहीं होती.
"इस मंदिर को हिंदू और मुस्लिम भाई एक ही नजर से देखते हैं. हमलोगों की इस धाम में गहरी आस्था है. चाहे हिंदू भाइयों का पर्व हो या मुस्लिम समाज का त्योहार, हमेशा लोगों की भीड़ रहती है. सरकार ध्यान दे तो खुदनेश्वर धाम धार्मिक स्थल के साथ पर्यटन के लिहाज से भी अहम हो सकता है."- अब्दुल सत्ता, स्थानीय
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