साल के पहले दिन जाखू मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, 108 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा के दर्शन को पहुंचे पर्यटक
नये साल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने जाखू मंदिर में हनुमान जी के दर्शन किए और सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : January 1, 2026 at 3:19 PM IST
|Updated : January 1, 2026 at 3:51 PM IST
शिमला: नया साल 2026 के स्वागत के लिए पहाड़ों की रानी शिमला पर्यटकों से गुलजार है. साल के पहले दिन अपनी मनोकामनाएं लेकर हजारों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक शिमला की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित ऐतिहासिक जाखू मंदिर पहुंच रहे हैं. कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी. 108 फीट ऊंची भगवान हनुमान की भव्य प्रतिमा के दर्शन करने और आशीर्वाद लेने के लिए सुबह 5 बजे से ही मंदिर के बाहर लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं.
नये साल पर पर्यटकों में दिखा उत्साह
चंडीगढ़ से आए पर्यटक अमित खन्ना ने बताया, 'हमने तय किया था कि नए साल की शुरुआत भगवान के आशीर्वाद से करेंगे. रिज मैदान से जाखू तक की चढ़ाई थोड़ी थकान भरी जरूर है, लेकिन मंदिर पहुंचते ही जो शांति मिलती है, वह अद्भुत है और हनुमान जी की इतनी विशाल मूर्ति को करीब से देखना एक अलग ही अनुभव है'.

वहीं, दिल्ली से अपनी फैमिली के साथ आईं अंजलि शर्मा ने कहा, 'बच्चों को हनुमान जी की मूर्ति बहुत पसंद आई. हालांकि यहां बंदरों से थोड़ा बचकर रहना पड़ता है, लेकिन मंदिर का वातावरण बहुत ही सकारात्मक है. नए साल पर इससे बेहतर शुरुआत और क्या हो सकती है'.
108 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा
पर्यटकों की भीड़ का एक बड़ा कारण जाखू रोपवे भी रहा. नये साल पर पैदल चढ़ाई से बचने के लिए बुजुर्गों और बच्चों ने रोपवे का सहारा लिया, जिससे वे मिनटों में मंदिर परिसर पहुंच गए. 108 फीट ऊंची प्रतिमा के साथ सेल्फी लेने और फोटो खिंचवाने के लिए युवाओं में खासा क्रेज देखा गया. स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों को आगाह किया है कि वे मंदिर परिसर में अपने चश्मे, मोबाइल और खाने-पीने का सामान बंदरों से बचाकर रखें. क्योंकि जाखू के वानर अपनी शरारतों के लिए भी जाने जाते हैं.

मंदिर की व्यवस्था और महत्व पर जानकारी साझा करते हुए जाखू मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया, 'आज साल का पहला दिन है, इसलिए भीड़ सामान्य दिनों से चार गुना ज्यादा है. हमने सुबह विशेष आरती और चोला पूजन किया है. भक्तों की सुविधा के लिए हमने दर्शन की व्यवस्था को सुचारू बनाया है. ताकि किसी को असुविधा न हो. जाखू मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यह शिमला की पहचान भी है. हम प्रार्थना करते हैं कि बजरंग बली सभी के लिए यह साल खुशियों भरा रखें. श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन और मंदिर कमेटी ने सुरक्षा और सफाई के पुख्ता इंतजाम किए हैं'.
मंदिर तक पहुंचने के लिए टैक्सी और रोपवे की सुविधा
जाखू मंदिर जाने के लिए रिज मैदान से पैदल मार्ग भी हैं जो खड़ी चढ़ाई है. वहीं, निजी और एचआरटीसी की टैक्सी सेवा के साथ रोपवे से भी जाखू मंदिर पहुंचा जा सकता है. मंदिर के मुख्य गेट से पैदल मार्ग और एस्केलेटर की सुविधा उपलब्ध है, जो मंदिर परिसर तक जाती है.
जाखू मंदिर का इतिहास
मंदिर के इतिहास की बात करें तो यहां के पुजारी रामलाल शर्मा बताते हैं, 'शिमला के जाखू की पहाड़ियों की यह चोटी बजंरग बली के स्पर्श से पवित्र हुई है. जब रामायण काल में रावण के साथ युद्ध में लक्ष्मण जी बाण लगने से मूर्छित ही गए थे तो भगवान राम के परम भक्त वीर हनुमान संजीवनी बूटी लाने के लिए द्रोणागिरी पर्वत की ओर जा रहे थे तो वह यहां जाखू पर्वत पर रुके थे. इस पर्वत पर तपस्या कर रहे यक्ष ऋषि से हनुमान जी ने संजीवनी बूटी के बारे में जानकारी ली और रास्ता पूछा. जब हनुमान जी यहां से संजीवनी बूटी लाने के लिए रवाना हुए तो उन्होंने वापसी पर यक्ष ऋषि से मिलकर जाने का वादा किया, लेकिन समय की कमी के कारण वह वापस जाखू पर्वत पर नहीं आ पाए. लेकिन अपने भक्त यानी यक्ष ऋषि को उन्होंने एक पत्थर में दर्शन दिए, जिसके बाद यहां भव्य मंदिर की स्थापना की गई और भगवान हनुमान जी की पूजा अर्चना की गई. इस स्थान का नाम भी इन्ही ऋषि के नाम पर पहले याकू ओर फिर जाखू पड़ा जो आज इसकी पहचान है'.
विश्व की सर्वाधिक ऊंची हनुमान जी की मूर्ति
जाखू मंदिर में वैसे तो हर रोज दोपहर की आरती होती है. सुबह चार बजे मंदिर के द्वार खुलते है, जिसके बाद शृंगार होता है. वहीं, मंदिर में मंगलवार और शनिवार को विशेष आरती होती है. आरती सुबह चार बजे और सुबह सात बजे के साथ ही शाम को सात बजे आरती होती है. आरती में केवल घंटियां ओर नगाड़े बजाए जाते है. मंदिर में रविवार को ज्येष्ठ मंगलवार को भंडारे का आयोजन किया जाता है. जाखू मंदिर में पर्यटकों के आकर्षण की एक और जो वजह है, वो है मंदिर परिसर में लगी विश्व की सर्वाधिक ऊंची हनुमान जी की मूर्ति.

