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नशे के खिलाफ अब सेवानिवृत्त सैनिक संभालेंगे मोर्चा, स्कूलों में चलाएंगे ये विशेष अभियान

पूर्व सैनिक विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने, अनुशासन अपनाने और जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित करेंगे.

Drug Awareness Campaign
नशे के खिलाफ छात्रों को जागरूक करेंगे पूर्व सैनिक (FILE@ETVBHARAT)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 31, 2026 at 8:11 PM IST

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Updated : September 1, 2026 at 3:40 PM IST

4 Min Read
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शिमला: स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को नशे से दूर रखने के लिए अब सेवानिवृत्त सैनिक और पूर्व सैन्य अधिकारी भी मोर्चा संभालेंगे. शिमला जिला प्रशासन ने नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान में पूर्व सैनिकों को जोड़ने का फैसला लिया है. प्रशासन ने ऐसे सेवानिवृत्त सैनिकों और सैन्य अधिकारियों की सूची भी तैयार कर ली है, जिसमें उनके संपर्क नंबर और पते शामिल हैं. यह सूची जिले के स्कूलों को दी जाएगी, ताकि प्रधानाचार्य जरूरत के अनुसार उन्हें बुलाकर विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर सकें.

बैठकों तक सीमित न रहे अभियान

यह फैसला शनिवार को उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई जिला एंकॉर्ड समिति की बैठक में लिया गया. बैठक में जिले में नशे के खिलाफ चल रहे अभियानों, संवेदनशील पंचायतों को रेड जोन से येलो जोन में लाने और विभिन्न विभागों की ओर से किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई. उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नशे के खिलाफ अभियान केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका असर जमीनी स्तर पर भी दिखाई देना चाहिए. उन्होंने स्कूलों, पंचायतों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में होने वाले जागरूकता कार्यक्रमों में अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा. फील्ड में आयोजित जागरूकता अभियानों में भाग नहीं लेने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए.

19 पंचायतों को रेड से येलो जोन में लाने का लक्ष्य

उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि जिले की 19 संवेदनशील पंचायतों को रेड जोन से येलो जोन में लाना प्रशासन की प्राथमिकता है. इसके लिए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ ठोस कार्ययोजना तैयार कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं. पंचायत स्तर पर नशे के स्रोतों और नशे के कारोबार से जुड़े मामलों पर नजर रखने के साथ युवाओं को जागरूक करने के लिए नियमित गतिविधियां आयोजित करने को भी कहा गया है.

स्कूलों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में पूर्व सैनिक विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने, अनुशासन अपनाने और जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित करेंगे. इसके साथ ही विद्यार्थियों को चुनौतियों का सामना करने और सकारात्मक सोच विकसित करने का संदेश दिया जाएगा. उपायुक्त ने कहा कि पूर्व सैनिकों के अनुभव विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक साबित हो सकते हैं. इससे विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके परिवारों और समाज में भी नशे के खिलाफ सकारात्मक संदेश पहुंच सकता है.

उपायुक्त ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है. इसमें प्रशासन, शिक्षा विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं, अभिभावकों और आम जनता की सामूहिक भागीदारी जरूरी है. उन्होंने युवाओं को खेल, शिक्षा, रचनात्मक गतिविधियों और सकारात्मक जीवनशैली से जोड़ने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश भी दिए.

'पूर्व सैनिकों को प्रशिक्षण देना जरूरी'

वर्ष 2009 से नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहे सामाजिक कार्यकर्ता ओपी शर्मा ने पूर्व सैनिकों को अभियान से जोड़ने के फैसले को अच्छा कदम बताया. उन्होंने कहा कि इससे अच्छे परिणाम मिल सकते हैं, लेकिन अभियान से पहले पूर्व सैनिकों को उचित प्रशिक्षण देना बेहद जरूरी है. उनके अनुसार नशे की प्रवृत्ति के लिए कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं होता. इसमें पारिवारिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक सहित कई पहलू शामिल होते हैं. इसलिए जागरूकता कार्यक्रमों से जुड़ने वाले लोगों को पहले पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। इसके लिए सरकार को पर्याप्त बजट की व्यवस्था भी करनी होगी.

एचपीयू के समाजशास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अश्वनी शर्मा ने भी इस पहल को अच्छा बताया. उन्होंने कहा कि सैनिकों को समाज में सम्मान की नजर से देखा जाता है. यदि पूर्व सैनिक नशे के खिलाफ अभियान में सक्रिय रूप से काम करेंगे तो इसके अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं. उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चे भी नशे की चपेट में आ रहे हैं. ऐसे में स्कूल स्तर पर अभी और अधिक काम करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इस अभियान से समाज के हर वर्ग को जोड़ना होगा, तभी इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे.

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Last Updated : September 1, 2026 at 3:40 PM IST