शिमला में 22 दिनों से अनशन पर क्यों बैठे हैं शिक्षक? सरकार को दी ये चेतावनी, जानें क्या है मामला
शिक्षक पिछले 22 दिनों से अनशन पर बैठे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगों पर लिखित फैसला होने तक आंदोलन जारी रहेगा.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 16, 2026 at 4:31 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों और सरकार के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. प्राथमिक शिक्षक संघ का शिमला में क्रमिक अनशन रविवार को 22वें दिन में पहुंच गया है. अब महिला शिक्षक भी अनशन में शामिल हो गई हैं. शिक्षक 'न्यू कॉम्प्लेक्स व्यवस्था' का विरोध कर रहे हैं. उनका आरोप है कि सरकार शिक्षकों की मूल समस्याओं का समाधान किए बिना नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है. संघ ने साफ किया है कि लिखित आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा.
कॉम्प्लेक्स व्यवस्था का क्यों हो रहा विरोध?
प्राथमिक शिक्षक संघ का सबसे बड़ा विरोध स्कूलों को क्लस्टर या कॉम्प्लेक्स व्यवस्था के तहत लाने को लेकर है. संघ के अनुसार, 15 से 20 प्राथमिक विद्यालयों को एक वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल के प्रधानाचार्य के अधीन लाने की व्यवस्था से प्राथमिक शिक्षा का विकेंद्रीकरण प्रभावित होगा. शिक्षक नेताओं का कहना है कि सरकार को नई व्यवस्था लागू करने के बजाय पहले स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करनी चाहिए.
5 हजार से ज्यादा JBT पद खाली होने का दावा
शिक्षक संघ का दावा है कि प्रदेश में JBT के 5 हजार से अधिक पद खाली हैं और करीब 3 हजार प्राथमिक स्कूल केवल एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं. संघ के अनुसार, करीब 200 स्कूल ऐसे भी हैं, जहां नियमित शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं. शिक्षकों का कहना है कि जब प्रदेश में शिक्षकों की कमी है तो युक्तीकरण के नाम पर नई व्यवस्था लागू करने का औचित्य समझ से परे है.
क्या है शिक्षकों की प्रमुख मांगें?
- स्कूल कॉम्प्लेक्स व्यवस्था की अधिसूचना वापस ली जाए.
- JBT से TGT पदोन्नति पर लगी रोक हटाई जाए.
- लंबित JBT से TGT, HT और CHT पदोन्नति प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए.
- बैचवाइज भर्तियों को आगे बढ़ाया जाए.
- कमीशन के माध्यम से निकाले गए 1,762 पदों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जाए.
- शिक्षकों का हायर ग्रेड-पे बहाल किया जाए.
- छठे वेतन आयोग और महंगाई भत्ते के लंबित वित्तीय लाभ दिए जाएं.
- शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो.
- अंडर-12 खेल गतिविधियों को दोबारा शुरू किया जाए.
वार्ता के बाद भी नहीं निकला समाधान
संघ के अनुसार, 5 अगस्त को सरकार के साथ हुई समीक्षा बैठक भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची. इससे पहले शिक्षक 15 दिनों की पैदल न्याय यात्रा कर 26 जुलाई को शिमला पहुंचे थे. शिक्षकों का आरोप है कि मुख्यमंत्री की ओर से बातचीत का आश्वासन मिलने के बावजूद विभागीय स्तर पर मामलों का समाधान नहीं हुआ. संघ का कहना है कि करीब डेढ़ साल पहले भी आंदोलन के दौरान आश्वासन दिया गया था, लेकिन मांगें पूरी नहीं हुईं.
शिक्षकों ने आंदोलन जारी रखने की दी चेतावनी
धरने पर बैठीं शिक्षिका संदीप कुमारी ने कहा कि शिक्षक तब तक अनशन खत्म नहीं करेंगे, जब तक उनकी मांगों को लिखित रूप में स्वीकार नहीं किया जाता. वहीं प्राथमिक शिक्षक संघ, जिला कांगड़ा के अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने कहा कि शिक्षकों ने छुट्टियों के दौरान आंदोलन इसलिए किया, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो. उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है.
गैर-शैक्षणिक कार्यों पर भी नाराजगी
शिक्षक संघ चुनाव, जनगणना और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का भी विरोध कर रहा है. संघ का कहना है कि इस तरह की ड्यूटी के कारण शिक्षकों का शैक्षणिक कार्य प्रभावित होता है. शिक्षकों का तर्क है कि यदि सरकार प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना चाहती है तो शिक्षकों को मुख्य रूप से अध्यापन कार्य के लिए ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
प्राथमिक शिक्षक संघ का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से चल रहा है. विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए न्याय यात्रा और आंदोलन के कार्यक्रम छुट्टियों के दौरान रखे गए. अब 22 दिनों से चल रहे क्रमिक अनशन के बीच शिक्षकों की नजर सरकार के अगले कदम पर है. संघ ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर ठोस और लिखित फैसला होने तक आंदोलन जारी रहेगा.
ये भी पढे़ं: हिमाचल में सरकारी कर्मियों को मिल गया सारा DA , निराशा के बीच सोशल मीडिया पर मजेदार चुटकियां
ये भी पढे़ं: बाबा रामदेव के समर्थन में उतरे CM सुक्खू, बोले- तुरंत शुरू करें आंदोलन, हिमाचल में नहीं होते पेपर लीक

