शिमला में हर शौचालय में महिलाओं को मिलेगा सेनेटरी पैड, स्तनपान के लिए माल रोड-रिज पर बनेंगे फीडिंग रूम
शिमला नगर निगम ने आज 688 करोड़ रुपये का बजट पेश किया. पिछली बार ये बजट 188 करोड़ रुपये थे.


By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 20, 2026 at 5:45 PM IST
शिमला: राजधानी शिमला में कांग्रेस शासित नगर निगम का बजट शुक्रवार को पेश हुआ. महापौर सुरेंद्र चौहान ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 688 करोड़ रुपये का सरप्लस बजट पेश किया, जबकि बीते साल यह 188 करोड़ रुपये था. नगर निगम ने कोई नया कर शहरवासियों पर नही लगाया है.
बजट में शिमला के हर वार्ड में पार्किंग, पार्क बनाने, शहर के सभी सार्वजनिक शौचालयों में महिलाओं को सेनेटरी नेपकिन मुहैया करवाने, बच्चों को दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए रिज और माल रोड पर फीडिंग रूम बनाने की घोषण की गई है. महापौर ने शिमला शहर में 26 चिन्हित जगहों पर फूड वैन देने की भी घोषणा की, ताकि बेरोजगार महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार मिल सके. इसके अलावा शिमला के कोर एरिया में ई-कार्ट चलाने की बात बजट में कही गई है.
कर्मचारियों के लिए बीमा योजना
शिमला शहर में 6 साइकलिंग ट्रेक बनाने की घोषण महापौर ने बजट में की है. इसके साथ ही नगर निगम शिमला अपने कर्मचारियों के पहली बार बीमा योजना शुरू करेगा. बीमा का कोई पैसा कर्मचारियों से नहीं लिया जाएगा. शिमला शहर में खराब पेयजल वाली बावडी के पानी का इस्तेमाल शौचालय में किया जाएघा. शहर में सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी लगाने के लिए 50 लाख का प्रावधान होगा. नगर निगम कर्मचारियों के लिए बालूगंज में 34 करोड़ से 72 आवास बनेंगे. आय बढ़ाने के लिए नगर निगम शहर में आवासीय फ्लैट बना कर बेचेगा. तारादेवी के पास वर्ड क्लास वेलनेस सेंटर बनाने की घोषणा बजट में की गई है. सचिवालय से चौड़ा मैदान तक भूमिगत डक्ट बनाए जा रहे हैं. फाइबर और पाइप बिछाने के लिए नगर निगम कंपनियों से पैसे लेगा. इसके साथ भरयाल में दो मेगावॉट सोलर प्रोजेक्ट का निर्माण होगा. सभी वार्ड में एक हजार सोलर लाइट लगाई जाएंगी और साइकिल स्टैंड बनाए जाएंगे.
बीजेपी पार्षदों का हंगामान
वहीं, महापौर सुरेंद्र चौहान शुक्रवार को अपना तीसरा बजट पेश करने के लिए बचत भवन पहुंचे. मेयर नेजैसे ही बजट पेश करना शुरू किया बीजेपी पार्षदों ने सदन के अंदर हंगामा शुरू कर दिया और नारेबाजी करने लगे. बीजेपी पार्षद बजट का बायकॉट करते हुए बाहर निकल गए. इससे हाउस के अंदर कुछ समय के लिए गहमागहमी हो गई. भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि महापौर का कार्यकाल खत्म हो गया है. उन्हें ढाई साल के लिए ही महापौर बनाया था और उनकी जगह किसी महिला को इस कुर्सी के लिए चयनित करना था, लेकिन सरकार ने 5 साल के लिए कार्यकाल कर दिया है. इसकी अभी तक राज्यपाल से भी मंजूरी नहीं मिली है. ऐसे में महापौर बजट पेश नहीं कर सकते हैं. मामला भी हाईकोर्ट में विचाराधीन है. उन्हें नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.
'ऐतिहासिक कै शिमला नगर निगम का बजट'
शिमला नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि 'ये बजट ऐतिहासिक बजट है और आने वाले समय में नगर निगम अपने पांव पर खड़ा होगा. बजट में शहर में विकासात्मक कार्यो को प्राथमिकता दी गई. भाजपा पार्षद राजनीति कर रहे है. मामला कोर्ट में है और भाजपा के ही पार्षद कोर्ट गए हैं. अब वही कोर्ट की अवमानना कर रहे हैं. अभी तक कोर्ट का फैसला आया नहीं आया है. बजट में भाजपा पार्षदों की ओर से हगांमा किया गया. इसके बाद बाहर चले गए, जबकि उन्हें अंदर रहना चाहिए था. इससे साफ दिखता है कि वो शिमला शहर के लोगो के प्रति कितने गभीर हैं.'
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