महाशिवरात्रि पर भोले के जयकारों से गूंजा शिमला, मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब
महाशिवरात्रि के अवसर पर शिमला के बाजारों में भोलेनाथ की पसंदीदा चीजें जैसे घोटा, पकौड़े और अन्य पकवान भी बनाए गए.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 15, 2026 at 6:15 PM IST
शिमला: राजधानी शिमला में रविवार को महाशिवरात्रि का पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया. सुबह 6 बजे तक शहर के अधिकतर शिवालयों के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए थे. हाथों में जल का लोटा, दूध और बेल पत्र लेकर श्रद्धालु रुद्राभिषेक के लिए कतारों में खड़े दिखाई दिए. आठ बजे तक कालीबाड़ी, मिडल बाजार, विकासनगर, पंथाघाटी, बड़ागांव, मल्याना, ढली और घणाहट्टी के शिव मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी लाइनें लग चुकी थीं. शाम पांच बजे तक यही स्थिति बनी रही और 'हर-हर महादेव' के जयकारों से पूरा शहर गूंजता रहा.
फूलों और बेल पत्रों से सजे शिवालय
शहर के सभी प्रमुख मंदिरों को फूलों और बेल पत्रों से सजाया गया था. मंदिरों के बाहर पूजा सामग्री, बेल पत्र और फल बेचने वालों की भी अच्छी रौनक रही. स्थानीय व्यक्ति प्रेम और दयाराम ने बताया कि मंदिरों में आए श्रद्धालुओं के लिए पकौड़े और अन्य प्रसाद की व्यवस्था की गई थी. दिनभर "मेरा भोला है भंडारी" और "शिव कैलाशों के वासी" जैसे भजनों पर भक्त झूमते रहे.
राधा-कृष्ण गंज मंदिर से निकली भव्य शिव बारात
महाशिवरात्रि के अवसर पर राधा-कृष्ण गंज मंदिर से भगवान शिव की भव्य बारात निकाली गई. इस शोभायात्रा में हजारों की संख्या में शहरवासियों और विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. बारात गंज मंदिर से निकलकर सीटीओ चौक पहुंची, जहां से ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के साथ लोअर बाजार, मिडिल बाजार होते हुए शेरे पंजाब और फिर राम मंदिर शिमला पहुंची. रास्ते भर श्रद्धालु नाचते-गाते रहे.
बाजारों में बना भोले का प्रिय 'घोटा'
शिमला के लोअर बाजार में शिव भक्तों ने आकर्षक झांकियां निकालीं. ढोल-नगाड़ों की थाप पर युवाओं और बच्चों ने नृत्य किया. यह झांकी लोअर बाजार से होते हुए मिडिल बाजार और गंज बाजार राम मंदिर तक पहुंची. जगह-जगह श्रद्धालुओं ने बारात का स्वागत किया. राम मंदिर सूद सभा की ओर से बारात का भव्य स्वागत किया गया. शाम पांच बजे शिव विवाह का विदाई समारोह आयोजित हुआ. महाशिवरात्रि के अवसर पर शिमला के बाजारों में भोलेनाथ की पसंदीदा चीजें जैसे घोटा, पकौड़े और अन्य पकवान भी बनाए गए. कई स्थानों पर मुफ्त में घोटा वितरित किया गया. लोगों ने श्रद्धा के साथ प्रसाद ग्रहण किया.
राम मंदिर में संपन्न हुआ शिव विवाह
राम मंदिर में देर रात शिव-पार्वती विवाह का आयोजन किया गया. पार्वती को ब्याहने के लिए गंज मंदिर से शिव की बारात निकली थी. मंदिर में विधि-विधान से सात फेरे संपन्न हुए. इस अवसर पर शिव के गण, विष्णु और ब्रह्मा की झांकियां भी सजाई गईं. भक्तों ने विवाह समारोह में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.
शिवरात्रि व्रत का महत्व
शिमला के मिडिल बाजार स्थिति शिव मंदिर के पंडित वासुदेव ने बताया कि शिवपुराण के अनुसार महाशिवरात्रि व्रत से भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है. इस दिन रुद्राभिषेक, उपवास और शिव मंदिर में पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है. उन्होंने बताया कि गन्ने के रस से अभिषेक करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है, जबकि शक्कर मिले दूध से अभिषेक करने से बुद्धि का विकास होता है. शिव पूजा में आंकड़े का फूल चढ़ाना सोने के दान के बराबर फल देता है. शमी पत्र चढ़ाना मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है.
400 साल पुराना ऐतिहासिक शिव मंदिर
शिमला का ऐतिहासिक शिव मंदिर करीब 400 साल पुराना माना जाता है. मालरोड के समीप स्थित होने के कारण अंग्रेजी शासनकाल में भी यहां पूजा-अर्चना होती थी. मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू है, यानी वह जमीन से स्वयं प्रकट हुआ था. पुजारी वासुदेव ने बताया कि 1842 में मदन गिरी नामक श्रद्धालु ने मंदिर का निर्माण करवाया था. उससे पहले शिवलिंग खुले में था. समय-समय पर मंदिर का जीर्णोद्धार होता रहा और आज यह भव्य रूप में श्रद्धालुओं के सामने है.
महाशिवरात्रि पर यहां चार पहर विशेष पूजा होती है. पहले विशेष अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं, उसके बाद श्रद्धालुओं के लिए कपाट खोले जाते हैं. मान्यता है कि जो भी सच्ची श्रद्धा से यहां पूजा करता है, उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है. महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर शिमला में उमड़ी आस्था ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि देवभूमि हिमाचल में भगवान शिव के प्रति श्रद्धा आज भी उतनी ही गहरी है जितनी सदियों पहले थी. पूरा शहर भक्तिमय माहौल में डूबा नजर आया और हर ओर भोलेनाथ के जयकारे गूंजते रहे.
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