क्रिसमस के रंग में रंगा शिमला, ऐतिहासिक क्राइस्ट चर्च में उमड़े श्रद्धालु, देर रात तक होंगी प्रार्थनाएं
क्रिसमस के लिए शिमला का ऐतिहासिक क्राइस्ट चर्च पूरी तरह सजकर तैयार है. क्रिसमस के अवसर पर क्राइस्ट चर्च देर रात तक खुला रहेगा.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : December 24, 2025 at 5:35 PM IST
|Updated : December 24, 2025 at 5:50 PM IST
शिमला: क्रिसमस पर्व से पहले हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला का ऐतिहासिक क्राइस्ट चर्च श्रद्धा, प्रार्थना और रोशनी से जगमगा उठा है. रिज मैदान पर स्थित यह चर्च न केवल शिमला, बल्कि पूरे हिमाचल का एक प्रमुख लैंडमार्क माना जाता है. क्रिसमस के मौके पर चर्च में विशेष सजावट, प्रार्थनाएं और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें देश-विदेश से आए पर्यटक और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में हिस्सा ले रहे हैं.
क्राइस्ट चर्च की प्रीस्ट-इन-चार्ज डॉ. विनिता रॉय ने बताया कि चर्च में क्रिसमस का उत्सव केवल 25 दिसंबर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसकी तैयारियां काफी पहले शुरू हो जाती हैं. उन्होंने कहा, "हमारे क्रिसमस कार्यक्रम एडवेंट के समय से ही शुरू हो जाते हैं. इस वर्ष एडवेंट 30 नवंबर से प्रारंभ हुआ था और तभी से चर्च में विभिन्न धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं."
डोर-टू-डोर कैरोल सिंगिंग से दिया प्रेम का संदेश
डॉ. विनिता रॉय ने कहा कि दिसंबर के पहले सप्ताह में चर्च की ओर से डोर-टू-डोर कैरोल सिंगिंग का आयोजन किया गया. उन्होंने कहा, "यह क्रिसमस की एक पुरानी परंपरा है, जिसमें हम एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं देते हैं, प्रार्थना करते हैं और प्रेम व भाईचारे का संदेश साझा करते हैं." इस दौरान चर्च से जुड़े लोग अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर लोगों को क्रिसमस की शुभकामनाएं देते हैं.

क्रिसमस ईव और क्रिसमस डे पर विशेष प्रार्थनाएं
चर्च प्रशासन के अनुसार 24 दिसंबर को क्रिसमस ईव और 25 दिसंबर को क्रिसमस डे पर विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जाएंगी. डॉ. रॉय ने बताया, "24 दिसंबर को हम प्रभु यीशु को धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने समस्त मानवता के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया. 25 दिसंबर को पूरी दुनिया में क्रिसमस मनाया जाता है, जो प्रेम, शांति, आनंद और आशा का प्रतीक है."
देर रात तक खुला रहेगा चर्च
डॉ. विनिता रॉय ने जानकारी दी कि क्रिसमस ईव की रात क्राइस्ट चर्च देर रात तक खुला रहेगा. उन्होंने कहा कि इससे पर्यटक और श्रद्धालु देर रात तक चर्च में प्रार्थना कर सकेंगे और आशीर्वाद प्राप्त कर पाएंगे. इस दौरान चर्च परिसर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है.
हर धर्म के लोग लेते हैं प्रार्थना में भाग
क्राइस्ट चर्च की एक खास पहचान यह है कि यहां केवल ईसाई समुदाय ही नहीं, बल्कि हिंदू, मुस्लिम, सिख सहित सभी धर्मों के लोग साल भर दर्शन और प्रार्थना के लिए आते हैं. क्रिसमस के अवसर पर भी विभिन्न धर्मों के लोग चर्च में मोमबत्तियां जलाकर प्रार्थना करते नजर आए.

पर्यटकों ने साझा किए शांति और सुकून के अनुभव
चंडीगढ़ से आए पर्यटक हरमन सिंह ने कहा, "यहां आकर बहुत शांति महसूस होती है. मोमबत्तियां जलाकर प्रार्थना करने से मन को सुकून मिलता है. क्रिसमस का संदेश यही है कि हम प्रेम और भाईचारे के साथ रहें." वहीं चंडीगढ़ की सिमरन कौर ने कहा कि वे हर साल शिमला आती हैं और क्रिसमस के दौरान क्राइस्ट चर्च जरूर जाती हैं.
एशिया का दूसरा सबसे पुराना चर्च है क्राइस्ट चर्च
क्राइस्ट चर्च को एशिया का दूसरा सबसे पुराना चर्च माना जाता है. इस ऐतिहासिक चर्च की नींव 9 सितंबर 1844 को कोलकाता के बिशप डेनियल विल्सन ने रखी थी. इसका निर्माण कार्य 1857 में पूरा हुआ. चर्च को नियो-गोथिक शैली में बनाया गया है और इसका डिजाइन कर्नल जे.टी. बालू ने तैयार किया था.
150 साल पुरानी बेल बनी चर्च की पहचान
क्राइस्ट चर्च में इंग्लैंड से लाई गई 150 साल से अधिक पुरानी बेल भी मौजूद है. यह बेल मेटल से बने छह बड़े पाइपों से बनी है, जिनसे ‘सा, रे, ग, म, प’ जैसी ध्वनियां निकलती हैं. इसे मशीन से नहीं, बल्कि हाथ से रस्सी खींचकर बजाया जाता है. हर रविवार सुबह 11 बजे और क्रिसमस व नए साल की रात 12 बजे इस बेल की ध्वनि पूरे रिज क्षेत्र में गूंजती है.
क्रिसमस और न्यू ईयर पर सैलानियों से गुलजार शिमला
क्रिसमस और नए साल के मौके पर शिमला हर साल सैलानियों से गुलजार हो जाता है. रिज मैदान, मॉल रोड और क्राइस्ट चर्च में खास रौनक देखने को मिलती है. बर्फीला मौसम, रोशनी से सजा चर्च और प्रार्थनाओं के बीच शिमला एक बार फिर प्रेम, शांति और सौहार्द का संदेश देता नजर आ रहा है.
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