शिमला में बनेगा 80 KM लंबा साइकिलिंग ट्रैक, ADB के सहयोग से होगा निर्माण
शिमला में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए साइकिलिंग ट्रैक का निर्माण किया जाएगा.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : June 25, 2026 at 7:55 PM IST
शिमला: राजधानी शिमला में एडवेंचर स्पोर्ट्स, फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए साइकिलिंग ट्रैक परियोजना पर काम शुरू हो गया है. शिमला में एशियाई विकास बैंक (ADB) के सहयोग से 80 किलोमीटर का लंबा साइकिल ट्रैक बनाने जा रहा है. इसको लेकर गुरुवार को नगर निगम शिमला, वन विभाग, राजस्व विभाग और एशियाई विकास बैंक (ADB) के अधिकारियों के बीच हुई विस्तृत चर्चा की गई. यह परियोजना न केवल शहर को नई पहचान देगी, बल्कि युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित करेगी. इस परियोजना पर 23 करोड़ खर्च होगा.
शिमला नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा, "शिमला में साइकिलिंग ट्रैक बनाने की लंबे समय से योजना चल रही थी और अब इसको अंतिम रूप दिया जा रहा है. शिमला में एशियाई विकास बैंक (ADB) के सहयोग से 80 किलोमीटर लंबा ट्रैक बनाया जाएगा, इसको लेकर रोडमैप तैयार कर लिया है और जल्द ही इस पर काम शुरू किया जाएगा. उन्होंने कहा कि आज बैठक कर इस पर चर्चा की गई ओर जल्द ही इसकी डीपीआर तैयार की जाएगी".
परियोजना के तहत शिमला और आसपास के क्षेत्रों को जोड़ते हुए कई प्रमुख साइकिलिंग रूट विकसित किए जाएंगे. पहला रूट सीटीओ से ढली और संजौली होते हुए पोर्टर हिल तक जाएगा, जिसकी कुल लंबाई आने-जाने सहित लगभग 15 से 20 किलोमीटर होगी. दूसरा रूट दादा-दादी पार्क से जाखू तक फॉरेस्ट ट्रैक के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें संजौली कॉर्नर और रिज क्षेत्र को भी जोड़ा जाएगा. इसके अलावा मशोबरा से चायल तक भी एक आकर्षक साइकिलिंग ट्रैक बनाया जाएगा. सभी प्रस्तावित मार्गों को मिलाकर ट्रैक की कुल लंबाई करीब 80 किलोमीटर होगी.
परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसके निर्माण में पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ट्रैक पर किसी प्रकार का स्थायी कंक्रीट निर्माण नहीं किया जाएगा. पर्यटकों और साइकिल चालकों की सुविधा के लिए बनाए जाने वाले टॉयलेट, बुक कैफे और पेयजल स्टॉल फैब्रिकेटेड या लकड़ी आधारित संरचनाओं में विकसित किए जाएंगे, ताकि प्राकृतिक वातावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़े.
करीब 23 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को एडीबी के सहयोग से वित्तपोषित किया जाएगा. अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से लगभग 25 हजार लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा. साथ ही, साइकिलिंग को बढ़ावा मिलने से वाहनों पर निर्भरता कम होगी, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी और शिमला का पर्यावरण अधिक स्वच्छ व सुंदर बनेगा.
फिलहाल परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है. डीपीआर को अंतिम रूप मिलने के बाद वन विभाग द्वारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी. नगर निगम और संबंधित विभाग इस महत्वाकांक्षी योजना को जल्द धरातल पर उतारने के लिए प्रयासरत हैं. यह परियोजना भविष्य में शिमला को देश के प्रमुख साइकिलिंग और इको-टूरिज्म गंतव्यों में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.

