चीतों ने बदला टेस्ट और मेन्यू, लंच और डिनर को लज्जतदार बनाने राजस्थान तक दौड़
श्योपुर के चीतों को लंच और डिनर में चीतल और हिरण से ज्यादा बकरे पसंद. खोज में लांघ रहे मध्य प्रदेश से राजस्थान. कूनो नेशनल पार्क की विशाल सरहद पड़ रही छोटी.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 30, 2026 at 3:19 PM IST
|Updated : June 30, 2026 at 4:42 PM IST
श्योपुर : कूनो नेशनल पार्क का दायरा करीब साढ़े 750 वर्ग किमी है. अगर आसपास के जंगल के एरिया को इसमें शामिल कर लें तो ये डेढ़ हजार वर्ग किमी का हो जाता है. चीता प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए इस इलाके में पर्याप्त इंतजाम किए गए. चीतों के शिकार के लिए सैकड़ों चीतल छोड़े जा रहे हैं. इसके बाद भी चीते कूनो की सरहद लांघ रहे हैं.
कूनो से निकलकर चीते श्योपुर जिले के आसपाास के 6 जिलों में उछलकूद कर रहे हैं. मध्य प्रदेश की सरहद नाक कर चीते राजस्थान तक धमाचौकड़ी मचा रहे हैं. इसकी वजह मानी जा रही है चीतों का बदला टेस्ट. एक सा भोजन कर चीते बोर हो रहे हैं. मनपसंद खाने की चाह में चीते कूनो से बाहर दौड़ लगा रहे हैं.
फिलहाल 19 चीते कूनो से बाहर घूम रहे
बीते एक साल से कूनो पार्क प्रबंधन चीतों के बदले व्यवहार से परेशान है. क्योंकि चीते अक्सर कूनो की सरहद लांघकर बाहर जा रहे हैं. कॉलर आईडी की मदद से कूनो का स्टाफ चीतों को वापस लाता है, तब तक कोई और चीता सरपट दौड़ लगाकर बाहर निकल जाता है. हालत ये है कि कूनो नेशनल पार्क में फिलहाल कुल 54 चीते हैं. इनमें से 19 चीते अभी कूनो से बाहर विचरण कर रहे हैं. श्योपुर के आसपास के जिलों में ये चीते लगातार शिकार कर रहे हैं. चीतों की धमाचौकड़ी से ग्रामीण व पशु मालिक दहशत में रहते हैं. हालांकि अभी तक किसी भी चीते ने किसी इंसान पर हमला नहीं किया.

कैसे बदलता गया चीतों का टेस्ट
कूनो नेशनल पार्क से चीतों के भागने की मुख्य वजह उनके खाने का पैटर्न बदलने को माना जा रहा है. कूनो नेशनल पार्क में चीतलों-हिरणों को बड़ी संख्या में छोड़ा गया है. प्रोजेक्ट शुरू होने के कुछ माह तक तो चीतों ने चीतलों का शिकार बड़े शौक से किया. लेकिन जैसे-जैसे ये चीते भारतीय परिवेश और नई आबोहवा में घुलते-मिलते गए तो इनके स्वाभाव में परिवर्तन आने लगा. इनके खाने का टेस्ट भी बदलने लगा. अब चीते चीतलों-हिरणों की जगह बकरों व मवेशियों का शिकार कर रहे हैं. कूनो में ये डिश चीतों को नहीं मिल पाती. इसलिए वे कूनो से बाहर निकल कर मध्य प्रदेश व राजस्थान के कुल मिलाकर 12 जिलों में विचरण कर रहे हैं.
चीतों की पसंद बने बकरे-बकरियां
चीतों के टेस्ट बदलने की बात केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट भी साबित करती है. रिपोर्ट के अनुसार "खाने की चीजों की विविधता इकोलॉजिकल बदलाव को दिखाती है. पिछले दो सालों में चीतों की लगातार मॉनिटरिंग से पता चलता है कि खुले में घूमने वाले चीतों ने जो शिकार किया है, उनमें 42 फीसदी चीतल, 30 फीसदी बकरी, 20 फीसदी मवेशी, दो फीसदी नीलगाय, खरगोश, सांभर, चिंकारा, भेड़ और जंगली सुअर हैं."
इसमें भी खास बात ये है कि शिकार करने में मादा चीता ज्यादा आगे हैं. ज्वाला और गामिनी चीते ने सबसे ज्यादा शिकार किए. चीतल-हिरण की तुलना में चीते पालतू मवेशियों को शिकार बना रहे हैं. इनकी पसंद बकरे-बकरियां हैं.
भारतीय चीतों ने अपनी डिश बदली
एक और बात ध्यान देने योग्य है कि जब चीता प्रोजेक्ट शुरू हुआ तो कूनो में चीतल व हिरण को ये चटकर जाते थे. ये सारे चीते अफ्रीका से आए थे और अफ्रीका में इंपाला जैसे जानवरों को शिकार करने में वहां के चीतों को मजा आता है. लेकिन जब भारत में जन्मे चीते बड़े हुए तो उनका टेस्ट बदला हुआ दिखा. पहले इन चीतों ने कूनो में रहने वाले चीतल-हिरण का शिकार किया और बड़े शौक से इन्हें खाया. लेकिन कुछ दिनों बाद इनका टेस्ट बदल गया और बकरे-बकरियों की तलाश में कूनो से बाहर निकलने लगे. जब चीतों को अलग व मनपसंद स्वाद मिलना शुरू हो गया तो कूनो से चीतों के भागने की घटनाएं भी बढ़ने लगी.
कूनो नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर आर थिरुकुरल ने बताया "चीतों को खासतौर पर चीतल और बकरे का मांस पसंद है. कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकलने के बाद बह अपनी पसंदीदा जानवरों का शिकार करता है, इसकी जानकारी हमारे पास नहीं है. कूनो नेशनल पार्क से बाहर चीता निकलते हैं तो उनको यह पता नहीं होता है कि वह कूनो नेशनल पार्क का जंगल है या फिर अन्य जंगल."
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बीते 4 माह में कूनो से कब-कब भागे चीते
27 फरवरी 2026 : कूनो नेशनल पार्क से KP-2 चीता राजस्थान के बारां जिले की सीमा में पहुंचा. कूनो से वह कई बार निकलकर राजस्थान की सीमा में जा चुका है. इसके बाद वह वापस कूनो नेशनल पार्क की सीमा में भी आ चुका है.
08 मार्च 2026 : कूनो नेशनल पार्क से निकला चीता KP-3 राजस्थान के बारां जिले के बाँझ आमली क्षेत्र में पहुंचा. चीता KP-3 ने गोवंश का भी शिकार किया . इसी इलाके में KP-2 चीता भी सक्रिय.
23 मार्च 2026 : दो चीतों ने फिर की बॉर्डर क्रॉस, कूनो से भागकर राजस्थान के कोटा और बारां पहुंचे. KP-2 चीता बारां जिले से निकलकर कोटा जिले की रेंज में पहुंचा. वहीं, KP-1 नामक चीता बारां जिले की रिहायशी इलाके में देखा गया.
17 अप्रैल 2026 : कूनो से निकली चीता वीरा लाड़ले के साथ राजस्थान घूमकर पहुंची श्योपुर. खेतों में धमाचौकड़ी. यहां से कूनो नेशनल पार्क लगा हुआ है. वीरा अपने शावक के साथ कोर एरिया और बफर जोन से बाहर मूवमेंट करती रही.
28 अप्रैल 2026 : कूनो से निकला भारतीय चीता KP-2 राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिज़र्व में घूमता दिखा.
01 मई 2026 : कूनो से निकला चीता KP-3 राजस्थान की बारां जिले की सीमा में करीब 2 माह पहले पहुंचा. झालावाड़ जिले की सीमा में घुसा. 6-7 दिन रहने के बाद गुना जिले की सीमा में प्रवेश किया.
21 मई 2026 : कूनो नेशनल पार्क से निकला चीता KTS-1 शिवपुरी के नरवर के मोहिनी बांध क्षेत्र में पहुंचा. ग्रामीणों ने चीते को बस्ती और सड़क किनारे घूमते हुए देखा.

