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भूखे पेट कैसे मनाएं होली! श्योपुर के आदिवासी बाहुल्य गांवों में सन्नाटा, घरों पर लटके ताले

कुपोषण की मार झेलने वाला श्योपुर जिला बेरोजगारी और पलायन संकट से जूझ रहा. गांवों में अधिकांश घर खाली, मजदूर काम के लिए बाहर रवाना.

Sheopur tribals migration
श्योपुर के आदिवासी बाहुल्य गांवों से मजदूरों का पलायन (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : March 3, 2026 at 4:23 PM IST

4 Min Read
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रिपोर्ट : धीरज कुमार बालोठिया

श्योपुर : बड़े त्यौहारों पर लोग और खासकर मजदूर वर्ग अपने गांव वापस आ जाते हैं. लेकिन श्योपुर जिले की तस्वीर कुछ हटकर है. होली जैसे त्यौहार पर गांव खाली हो गए हैं. गांवों में अधिकांश घरों में ताले लटकने लगे हैं. मजदूर वर्ग आसपास के जिलों में मजदूरी के लिए एक से दो माह के लिए पलायन कर चुके हैं. मजदूरों की हालत इतनी खस्ता है कि वे होली मनाने के बजाय पलानयन करने को मजबूर हैं, क्योंकि बच्चों का पेट पालना मजबूरी है.

श्योपुर से मजदूरों का पलायन बड़े स्तर पर (ETV BHARAT)

क्षेत्र से दो आदिवासी नेता दर्जा प्राप्त मंत्री

फिलहाल गेहूं व सरसों कटाई का काम चल रहा है तो मजदूरों ने होली को दरकिनार कर एक से दो महीने के लिए पलायन कर दिया है. कुछ मजदूर दिल्ली, पंजाब व हरियाणा पलायन कर चुके हैं. पलायन करने वाले ज्यादातर लोग आदिवासी जनजाति के हैं. विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से ज्यादा पलायन हो रहा है.

सहारिया विकास प्राधिकरण अध्यक्ष तुरसन पाल बरैया दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री और सहरिया विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सीताराम आदिवासी भी इसी विधानसभा क्षेत्र से हैं. इसके बाबजूद आदिवासी जनजाति के लोग पलायन जैसी समस्या से जूझ रहे हैं.

Sheopur tribals migration
श्योपुर से फसल काटने राजस्थान जाते मजदूर (ETV BHARAT)

फसल काटने राजस्थान जाते हैं मजदूर

श्योपुर जिलें में ऐसा कोई उद्योग नहीं है, जो 50 युवाओं को भी रोजगार दे सके. विजयपुर, वीरपुर और कराहल में बेरोजगारी इतनी है कि युवा महानगरों में पलायन करने को मजबूर हैं. विकासखंड कराहल और विजयपुर क्षेत्र के लगभग 80 से अधिक गांवों के आदिवासी फसल कटाई के लिए श्योपुर क्षेत्र के साथ ही राजस्थान की ओर पलायन करते हैं. मार्च के पहले दिन से पलायन शुरू हो गया है और अब ये लोग अप्रैल के दूसरे सप्ताह में लौटेंगे.

विधानसभा सत्र में गूंजा पलायन का मद्दा

हाल ही में विजयपुर के कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा ने विधानसभा में पलायन को लेकर मुद्दा उठाया था. कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा ने कहा "श्योपुर जिले में 50% से अधिक सहारिया आदिवासी लोग राजस्थान, गुजरात, पंजाब,उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, सहित अन्य प्रदेशों में स्थानीय स्तर पर रोजगार नहीं मिलने के कारण पलायन कर चुके हैं. आदिवासी अंचल में गांव के गांव खाली हो गए हैं. घरों में ताले लगे हुए हैं. स्थानीय स्तर पर सरकार और प्रशासन आदिवासियों के लिए रोजगार देने में विफल हो चुकी है. आदिवासियों को रोजगार देने का वादा सिर्फ कागजों तक ही सीमित है. किसी भी व्यक्ति को ग्राम पंचायत स्तर पर रोजगार नहीं मिल रहा है."

पंचायत मंत्री का जवाब हकीकत से उलट

विधायक के जवाब में पंचायत मंत्री ने जवाब में कहा "आदिवासी पलायन नहीं कर रहे हैं, उनको रोजगार मिल रहा है." लेकिन जमीनी हकीकत इस जवाब से मेल नहीं खाती." हथेड़ी गांव निवासी रमेश आदिवासी ने बताया "जिले में कोई रोजगार नहीं है. बाहर जाकर मजदूरी कर रहे हैं." बाग गांव निवासी मिश्री आदिवासी ने बताया "रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं है. मजदूरी करने के लिए बाहर जाना पड़ रहा है. चीते भले ही आ गए हैं लेकिन रोजगार नहीं मिला."

फसल कटाई के लिए मुरैना पहुंचे मजदूर

स्थानीय युवा संदीप गुर्जर ने बताया "मैं गाड़ी चालक हूं और मेरा काम है आदिवासी लोगों को मजदूरी पर छोड़कर आना और उनको लेकर आना. मैं उनको मजदूरी के लिए मुरैना छोड़ने जा रहा हूं. सरसों काटने के लिए ये मजदूर जा रहे हैं. यहां पर कोई काम नहीं है जिससे आदिवासी परिवार का पोषण हो सके." हथेड़ी गांव निवासी जशराम आदिवासी ने बताया "रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं है. चीते आने के बाद वन विभाग के लोग परेशान कर रहे हैं."

इस मामले में कराहल एसडीएम बीएस श्रीवास्तव का कहना है "फसल काटने का काम आदिवासियों को परंपरागत है. यह वर्षों फसल काटने का काम करते आ रहे है. हम मॉनिटरिंग करते हैं. कलेक्टर अर्पित वर्मा को पत्र लिखकर अवगत भी कराएंगे और जिससे शासन स्तर पर आदिवासियों को रोजगार मिल सके."