मंत्री का मध्य प्रदेश सरकार पर आरोप, 'मुझे बैठक में नहीं बुलाते, रामनिवास रावत को मिल रही तवज्जो'
मोहन यादव सरकार में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सीताराम आदिवासी ने लगाए गंभीर आरोप, मेरी जगह रामनिवास रावत को दी जा रही तवज्जो.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 1, 2026 at 12:29 PM IST
श्योपुर: मध्य प्रदेश सहरिया विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सीताराम आदिवासी का दर्द छलका है. सीताराम आदिवासी ने खुद को रामनिवास रावत से परेशान बताया है. सीताराम आदिवासी ने कहा कि मैं वर्तमान में मंत्री हूं. इसके बावजूद न तो बैठकों में बुलाया जा रहा और न ही कोई सम्मान दिया जा रहा है. जबकि रामनिवास रावत को हर स्तर पर तवज्जो मिल रही है. सीताराम आदिवासी ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी ज्वाइन की है.
'रावत किसी पद पर नहीं, कोई राजनीतिक हैसियत नहीं'
सीताराम आदिवासी ने कहा कि "हाल ही में श्योपुर में बैठक हुई, लेकिन उन्हें आमंत्रित तक नहीं किया गया. जब वे पिछली बैठक में गए थे, तो वहां भी उनका कोई सम्मान नहीं हुआ. मुख्यमंत्री मोहन यादव भी रामनिवास रावत को ही तवज्जो देते हैं. उन्होंने तीखे शब्दों में अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि मैं वर्तमान में मंत्री हूं, जबकि रामनिवास रावत किसी पद पर नहीं हैं.
इसके बावजूद मुख्यमंत्री, कलेक्टर और प्रभारी मंत्री सभी उन्हें प्राथमिकता दे रहे हैं. समझ नहीं आता कि सीएम बार-बार रामनिवास को तवज्जो क्यों दे रहे हैं? जबकि क्षेत्र में उनकी कोई राजनीतिक हैसियत नहीं है.
लोकसभा चुनाव में आदिवासियों ने बीजेपी कैंडिडेट को जिताया
लोकसभा चुनाव को लेकर भी सीताराम ने कहा कि रामनिवास ने नहीं, बल्कि उनकी विधानसभा क्षेत्र के आदिवासियों ने भाजपा के सांसद को जिताया है. उन्होंने दावा किया कि रावत समाज के 10-15 हजार वोटों से चुनाव नहीं जीता जा सकता, बल्कि पूरे ट्राइबल क्षेत्र के आदिवासियों ने एकजुट होकर मतदान किया था. इसके बावजूद बार-बार रामनिवास को श्रेय दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि विजयपुर, जौरा और बमोरी जैसी 10-15 विधानसभा सीटें आदिवासी वोटों से ही तय होती है. जब मुझे टिकट नहीं दिया गया, तो आदिवासी नाराज हो गए और भाजपा पूरी सीट हार गई.

'रामनिवास की वजह से क्षेत्र का माहौल हो खराब'
मंत्री सीताराम ने आरोप लगाया कि रामनिवास रावत की वजह से पूरे क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है. उन्होंने कहा कि रामनिवास रावत जनता का काम नहीं करते, सिर्फ जमीन के पीछे पड़े रहते हैं. आदिवासियों की जमीनों पर दबाव बनवाया जा रहा है. इसके साथ उन्होंने सहरिया विकास प्राधिकरण को बजट न देने का भी आरोप लगाया. जबकि रामनिवास से जुड़े हर प्रस्ताव पर फौरन दस्तखत हो जाते हैं.
'सोलर प्लांट के नाम पर आदिवासियों की छीन रहे जमीन'
सीताराम ने रघुनाथपुर और भमपुरा क्षेत्र का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि आदिवासी इलाकों में सोलर पंप और सोलर प्लांट के नाम पर आदिवासियों की जमीन छीनी जा रही है. जिन जमीनों पर सोलर प्लांट लगाने की कोशिश हो रही है, वहां आदिवासी वर्षों से खेती कर रहे हैं. आखिर आदिवासियों की जमीन पर ही क्यों परियोजनाएं थोपी जा रही है. क्या और कहीं जमीन नहीं है?"
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि "मंत्री सीताराम ने भाजपा सरकार में आदिवासियों की उपेक्षा और प्रताड़ना की असली तस्वीर बताई है. सरकार ने मंत्री का दर्जा तो दे दिया, लेकिन न तो उन्हें अधिकार दिए, न बजट दिया और न ही सम्मान दे रहे.
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मंत्री नागर सिंह का बयान
अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने विभागीय उपलब्धियां गिनाने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उनसे पूछा गया कि आपसे वन मंत्रालय लेकर रामनिवास रावत को वन मंत्री बनाया गया था. उसके बाद वे चुनाव हार गए. जब से आपके पास से वन मंत्रालय गया है, आप कैबिनेट की बैठकों में कम ही दिखते हैं ? इस सवाल पर मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा "रामनिवास रावत के बीजेपी में शामिल होने के बाद मुझसे वन मंत्रालय लेकर रावत को वन मंत्री बनाया गया था."

