श्योपुर के गांव में बैन है मांस और मदिरा, पीने-खाने वालों को मिलती है कुदरती सजा
श्योपुर के मेवाड़ा गांव में अनोखी प्रथा, यहां शराब और मांस पर पूरी तरह से प्रतिबंध, जो इसका सेवन करता है, उसको मिलती है सजा.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 11, 2026 at 10:47 AM IST
श्योपुर: मध्य प्रदेश सरकार ने भले ही कुछ शहरों में शराब पर पूरी तरह पाबंदी लगा रखी है, लेकिन प्रदेश के श्योपुर में आज भी एक ऐसा गांव है. जहां पर शराबबंदी और मांस पूरी तरह से प्रतिबंध है. गांव में हुई शराबबंदी और मांस प्रतिबंध पर सरकार और प्रशासन का हाथ नहीं है, बल्कि पीर बाबा की अनूठी मान्यता है. यहां के ग्रामीणों कि माने तो यह परंपरा करीब 300 साल से चली आ रही है.
इसको मानने वाले सभी ग्रामीण हिन्दू और मुस्लिम दोनों वर्ग के होते हैं. खास बात यह है कि कहा जाता है कि मुस्लिम परिवार भी मांस का सेवन नहीं करता. अगर कोई मांस-मदिरा का सेवन करता है, तो गांव के बाहर. फिर दूसरे दिन उसको गांव आने मिलता है.
मेवाड़ा में प्रतिबंधित है शराब और मांस
श्योपुर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर मेवाड़ा गांव में आज भी लोग मांस और मदिरा यानि शराब को छूते तक नहीं हैं. अगर किसी ने शराब या मदिरा का सेवन कर लिया, तो इस गांव की सीमा में कोई भटकने की हिमत तक नहीं करता है. कहा जाता है कि इस गांव में पीर बाबा का स्थान है. 300 साल पहले पीर बाबा की लगी मांस मदिरा की इस पाबंदी को लोग मानते आ रहे हैं.
यदि किसी के घर कोई मेहमान शराब या मांस का सेवन करके आ जाता है, तो उसको वह पास के ही गांव बेहराबदा गांव में लेकर चले जाते हैं. वहीं पर बह रुकता है. इसके अलावा दूसरे गांव के लोग भी इस गांव में शराब और मदिरा का सेवन करने के बाद इस गांव में प्रवेश नहीं करते हैं.
शराब और मांस का सेवन करने वाले को कुदरती दंड
ग्रामीण हंसराज मीणा बताते हैं कि "मेवाड़ गांव में पीर बाबा का स्थान है. मान्यता है कि पीर बाबा की इस प्रथा को जो भी तोड़ता है. उसे कुदरती सजा जरूर मिलती है. अगर जो व्यक्ति शराब और मांस खाता है, वह गांव में रह नहीं पाता है. अगर वह फिर भी नहीं मानता है, तो वह ग्रसित बीमारी से पीड़ित रहता है."

सभी जाति और धर्म के लोग पीर बाबा मानते हैं गुरु
वैसे तो इस गांव में मीणा और मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या काफी है. हालांकि इस गांव में सभी जाति के लोग रहते हैं. सभी जाति और धर्म के लोग पीर बाबा को ही अपना गुरु मानते हैं. हर साल आषाढ़ मास में गुरु पूर्णिमा के दिन पीर बाबा की मजार पर हाजिरी लगाकर गुरु दक्षिणा में नारियल के साथ दाल बाटी चूरमा का भोग भी लोग चढ़ाते हैं. हर वर्ष गुरु पूर्णिमा के दिन पीर बाबा की मजार पर धार्मिक मेला का आयोजन भी होता है. ग्रामीणों के मुताबिक सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक मेवाड़ा गांव में एक ही जगह पर हनुमान जी का मंदिर और पीर बाबा की मजार बनी हुई है.
हनुमान मंदिर में जल रही अखंड ज्योत, पीर बाबा की चौखट में जाते हैं लोग
ग्रामीणों के मुताबिक किसी परिवार में अगर शादी और विवाह है, या फिर संतान का जन्म हो परिवार के लोग सबसे पहले गुरु महाराज पीर बाबा की चौखट पर मत्था देखने जरूर जाते हैं. ग्रामीण ईश्वर मीणा ने बताया कि "हनुमान जी मंदिर में कई वर्षों से अखंड ज्योति जल रही है. आंधी हो या फिर तूफान और सीप नदी मैं आने वाली बाढ़ के दौरान आज तक अखंड ज्योति कभी नहीं बुझी है. इसे ग्रामीण चमत्कार मानते हैं. इस गांव में मीणा, मुस्लिम, गौड़, कनेरा, माली(कुशवाह) और बैरवा (जाटव) समाज के लोग रहते हैं. लेकिन आज भी किसी के घर में मांस तक नहीं पकाया जाता है.
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वहीं ग्रामीण रामजनम मीणा बताते हैं कि "हमारे गांव मेवाड़ा में शराब मांस पूरी तरह से वर्जित है. अगर फिर भी कोई जरूरी मेहमान शराब या मांस का सेवन करता भी है, तो उसे पास के गांव बेहरावदा गांव में ले जाते हैं. शराब और मांस का सेवन करने वाले मेहमानों को उस गांव में रात बितानी पड़ती है. हमारे गांव की सीमा में कोई भी ऐसा काम नहीं करते हैं. जिससे गुरु महाराज पीर बाबा की आन पर विपरीत असर पड़े. नियम तोड़ने वाले को सजा मिलने में देर नहीं लगती है।

