कूनो नेशनल पार्क पहुंचे सीएम मोहन यादव, कछुओं और घड़ियाल के 78 बच्चों को नदी में छोड़ा
श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, कूनो नदी में 53 घड़ियाल और स्ट्रिप्ड रूफ टर्टल प्रजाति के 25 कछुए छोड़े.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 1, 2026 at 9:45 PM IST
श्योपुर: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में वन्य जीव संरक्षण कार्यक्रम में रविवार को सीएम मोहन यादव हेलीकॉप्टर से पहुंचे. जहां उन्होंने कूनो नदी में वन्य जीव घड़ियाल और कछुओं को छोड़ा. बीती 28 फरवरी को बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों को केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बाड़े में रिलीज किया था.
53 घड़ियाल और 25 कछुओं को किया रिलीज
रविवार को सीएम डॉ. मोहन यादव ने 53 घड़ियाल और 25 कछुओं को कूनो नेशनल कूनो पार्क की कूनो नदी में रिलीज किया. इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ी संख्या में वन और पुलिस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे. कूनो नदी किनारे भी पुलिस फोर्स की तैनाती की गई थी.
केंद्रीय मंत्री ने 3 चीतों को किया रिलीज
बीते शनिवार को श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों को छोड़ने का कार्यक्रम तय था. इसमें सीएम मोहन यादव और केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव शामिल होने वाले थे, लेकिन अचानक मोहन यादव का दौरा निरस्त हो गया था. जिसके बाद केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 9 चीतों में से 3 चीतों को क्वारींटिन बाड़े में रिलीज किया था. जिसके बाद रविवार को सीएम मोहन यादव का कार्यक्रम बना और वह कूनो नेशनल पार्क पहुंचे.

स्ट्रिप्ड रूफ टर्टल प्रजाति के कछुए
घड़ियाल और कछुए छोड़ने की यह पहल राज्य सरकार की वन्यजीव संरक्षण नीति का हिस्सा है. इसका उद्देश्य कूनो नेशनल पार्क में जैव विविधता को मजबूत करना और नदी तंत्र को संतुलित बनाना है. यह सभी कछुए स्ट्रिप्ड रूफ टर्टल प्रजाति के हैं, जिनका वैज्ञानिक नाम वाटागुरु डोगोका है.

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सीएम डॉक्टर मोहन यादव ने कहा, " कूनो वन्यजीवों के लिए एक तरह से स्वर्ग समान है. हमारा फॉरेस्ट डिपार्मेंट सरकार के माध्यम से सभी प्रकार के प्रजातियों के संरक्षण के लिए काम कर रहा है. कूनो नदी में 53 घड़ियाल छोड़े गए हैं. इनको अंडों से निकालकर पर्यावरण सिस्टम के अनुकूल लगभग 2.5 साल पाला गया है. जिसके बाद नदी में छोड़ा गया है.
घड़ियाल मगरमच्छ नदी के जीवन में प्रकृति के साथ अद्भुत तालमेल रखते हैं. यह हजारों साल पुरानी डायनासोर के जमाने के बचे हुए प्राणी है. तीन धारी के कछुआ भी देशभर में बहुत दुर्लभ है. इनको भी नदी में छोड़ा गया है."

