लंच-डिनर में चीतों ने जमकर उड़ाई दावत, 1 करोड़ से ज्यादा के बकरे कर गए चट
कूनो के चीतों ने एक साल में खाए करोड़ों के बकरे, मध्य प्रदेश विधानसभा में पूछा गया चीतों के खानपान का सवाल.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 25, 2026 at 8:29 PM IST
भोपाल: तीन साल पहले कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए गए चीतों के पुर्नवास समेत उनके रखरखाव का खर्च पहले ही 100 करोड़ के पार चला गया है, लेकिन विधानसभा में दी गई जानकारी से ये पता चला है कि कूनो में रह रहे 38 चीते बीते एक साल में 1 करोड़ 27 लाख से ज्यादा कीमत के बकरों का डिनर और लंच कर चुके हैं. विधानसभा में सरकार की ओर से दी गई जानकारी में ये बताया कि अलग से बकरों की खरीदी के लिए कोई राशि नहीं दी जाती है.
चीतों की 1 साल की डाइट कितनी और बकरे कितने
कांग्रेस के विधायक मुकेश मल्होत्रा का सवाल था कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों को भोजन के लिए एक साल में कितनी राशि खर्च की गई. इसके अलावा एक दिन में कितने बकरे खिलाए जा रहे हैं. विधायक ने पूछा कि कूनो नेशनल पार्क में अभ्यारण्य में चीतों की संख्या कितनी है? ये भी पूछा गया कि क्या राष्ट्रीय उद्यान कूनो में दिनांक 17 सितंबर 2022 से 1 वर्ष में बकरा क्रय करने के लिए 1 करोड़ 30 लाख रुपए प्रति वर्ष दिया जा रहे है?
इस प्रश्न के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बताया कि "कूनो नेशनल पार्क में चीतों के भोजन के लिए अलग से कोई बजट नहीं दिया गया, लेकिन इनकी चिकित्सीय देखभाल के साथ उनके प्रबंधन में जो अलग-अलग योजनाओं में राशि दी जाती है. वही बकरा मीट खरीदने में खर्च की गई है. उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में बकरा मीट खरीदने के लिए 1 करोड़ 27 लाख 10 हजार 870 रुपए की राशि खर्च की गई है
मुख्यमंत्री ने लिखित जवाब में बताया कि 1 दिन में कितने बकरे खिलाए जाते हैं, इसका कोई मानक निर्धारित नहीं है. आवश्यकता अनुसार मीट खिलाया जाता है. उन्होंने बताया कि कूनो नेशनल पार्क में कुल 38 चीते मौजूद हैं."
ग्रामीणों की बकरी और मवेशी का शिकार करते चीते
कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा ने ये भी पूछा था कि क्या चीता ग्वालियर, शिवपुरी, राजस्थान, मुरैना जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में घूम रहे हैं और ग्रामीणों की बकरी-मवेशी का शिकार कर रहे हैं? बीते साल दिसंबर में हाइवे पर एक्सीडेंट में हुई चीते की मौत को लेकर भी उन्होंने पूछा था कि क्या अभ्यारण्य के अंदर चीतों को भोजन नहीं दिया जा रहा है, जिसके कारण एक चीते की घाटीगांव हाइवे रोड पर दिनांक 6 दिसंबर 2025 को एक्सीडेंट में मौत हो गई?

इसके जवाब में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बताया कि "कूनो नेशनल पार्क में 32 चीते मौजूद थे, जिनकी संख्या बढ़कर अब 38 हो गई है. कूनो पार्क के खुले जंगल में विचरण कर रहे चीते समय-समय पर वनमंडल की सीमा से बाहर चले जाते हैं. कभी-कभी ग्रामीणों की बकरी-मवेशी का शिकार कर लेते हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस विधायक द्वारा यह कहा जाना सही नहीं है कि अभ्यारण्य में चीतों को भोजन नहीं दिया जा रहा. उन्होंने कहा कि चीता निगरानी और ट्रैकिंग टीम प्रभावी ढंग से काम कर रही है. राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क दुर्घटना के कारण एक चीते की मौत हुई है."
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वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे का कहना है कि "चीता प्रोजेक्ट के तहत साउथ अफ्रीका, नामीबिया से चीते लाए गए, वहीं अब बोत्सवाना से चीते लाए जा रहे हैं. कूनो नेशनल पार्क में फ्री रेंज के लिए लाए गए चीते कैद में है. चीतों को करोड़ों के बकरे खिलाना प्रोजेक्ट की असफलता का सर्टिफिकेट है."

