श्योपुर में नौनिहालों के साथ खिलवाड़! स्कूल भवन की उखड़ी छत, चटकी दीवार फिर भी लग रहीं क्लासें
श्योपुर के सरकारी प्राथमिक स्कूल को लेकर डीईओ का दावा कि स्कूल तो मर्ज कर दिया गया लेकिन ग्रामीणों की मांग पर चल रहा स्कूल.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 21, 2026 at 6:26 PM IST
श्योपुर: एक तरफ सरकार स्कूल की शिक्षा और सुविधाओं को लेकर तमाम दावे,वादे और घोषणाएं कर रही है. शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की दिशा में सीएम राइज, सांदीपनी स्कूल और एक्सीलेंस जैसे स्कूल खोल रही है वहीं दूसरी ओर श्योपुर जिला मुख्यालय से महज 500 मीटर और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से महज 100 मीटर दूर क्रेशर कॉलोनी में स्थित प्राथमिक विद्यालय में नौनिहाल जर्जर भवन के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं. ईटीवी भारत ने पड़ताल की और देखा कि कैसे हालात में बच्चे स्कूल में पढ़ने को मजबूर हैं.
जर्जर हो चुके भवन में लग रहीं क्लासें
ये तस्वीरें बोल नहीं रही हैं बल्कि चीख-चीखकर अपनी हालत खुद बयां कर रहीं हैं और सिस्टम की बदहाली पर भी आंसू बहा रही हैं. स्कूल की हालत देखिए, जमीन का फर्श तो छोड़िए छत का प्लास्टर उखड़ चुका है और अब सरिए नजर आने लगे है. दीवारों से सीमेंट गायब हो चुका है. स्कूल भवन कभी भी धराशायी हो सकता है लेकिन छोटे-छोटे बच्चे इसी हालत में यहां रोज आ रहे हैं और क्लासें लग रही हैं.
डीईओ ऑफिस से महज 100 मीटर दूर है स्कूल
ऐसा नहीं है कि यह स्कूल श्योपुर से दूर किसी गांव में है बल्कि यह स्कूल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से महज 100 मीटर दूर है. श्योपुर मुख्यालय से स्कूल की दूरी 500 मीटर दूर है. हालत किसी से छुपी नहीं हैं लेकिन बच्चे स्कूल पहुंचे रहे हैं और पढ़ाई हो रही है. सवाल यही है कि यदि हादसा होता है तो जिम्मेदारी कौन लेगा.
गांवड़ी गांव में भरभराकर गिर गया था स्कूल
बीते दिनों श्योपुर के गांवड़ी गांव में सरकारी स्कूल भवन क्षतिग्रस्त होने की वजह से भरभराकर गिर गया. स्कूल चल रहा था लेकिन गनीमत यह रही कि स्कूल भवन की छत नहीं गिरी नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था. मासूम उस मलबे में दब सकते थे. इसके बाद जिम्मेदारों की नींद खुली और जिला शिक्षा अधिकारी ने दावा किया है कि जिले में जर्जर भवनों में क्लास नहीं लगेगी और फरमान जारी हो गया और फिर कागजों तक सीमित रह गया.
'बारिश में कर दिया था 8 दिन बंद'
क्रेशर कॉलोनी में पदस्थ शिक्षिका श्यामा बैरागी ने बताया कि "डर लगता है, परंतु बारिश के समय बच्चों की छुट्टी कर देते हैं और टीचर तो ड्यूटी समय में बैठते ही हैं. यह भवन कभी भी गिर सकता है. इंजीनियर भी इस भवन की जांच करने के लिए आए थे और उन्होंने बताया कि न तो इस भवन में खाना बनेगा और न ही स्कूल संचालित होगा.
इसके बाद बारिश में 8 दिन नहीं स्कूल बंद कर दिया लेकिन हमें कोई व्यवस्था नहीं मिली. इसके बाद फिर इसी जर्जर भवन में फिर स्कूल संचालित करना पड़ रहा है. पूर्व में इसकी शिकायत भी दर्ज कराई है. प्रशासन दूसरी व्यवस्था कर देगा तो हम वहां चले जाएंगे."
'सीएम राइज स्कूल में हो चुका है मर्ज'
इस जर्जर स्कूल को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी एमएल गर्ग ने बताया कि "वह स्कूल तो वैसे ही खत्म हो चुका है. सीएम राइज स्कूल में इस स्कूल को मर्ज कर दिया था. यह स्कूल सीएम राइज स्कूल का पार्ट 2 है. स्कूल का डाइस कोड भी खत्म हो गया है. चंबल कॉलोनी के सरकारी स्कूल में इन बच्चों का एडमिशन है.
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'ग्रामीणों ने नहीं हटने दिया था स्कूल'
जिला शिक्षा अधिकारी एमएल गर्ग ने बताया कि "ग्रामीणों ने ही तत्कालीन कलेक्टर शिवम वर्मा को इस स्कूल को संचालित करने के लिए कहा था. ग्रामीणों ने कुछ बच्चों को वहां जाने नहीं दिया. ग्रामीणों का कहना था कि हमारी बस्ती से यह स्कूल नहीं हटेगा. . ग्रामीणों की वजह से ही वहां क्लास संचालित हो रही हैं. मैं इस मामले में कलेक्टर को अवगत करा दूंगा और फिर वहीं निर्णय लेंगे."

