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श्योपुर की गौशाला में भूख और इलाज के अभाव में तड़प रहे पशु, संचालक को नोटिस जारी

श्योपुर की एक गौशाला में भूख-प्यास से मर रही गायें, ग्रामीणों ने घायल गाय को खुले में फेंकने का किया दावा.

SHEOPUR GAUSHALA COW DEATH
प्रतिकात्मक तस्वीर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 24, 2026 at 9:30 PM IST

4 Min Read
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श्योपुर: विजयपुर जनपद क्षेत्र के गांवड़ी गांव में स्थित गौशाला में पिछले महीनों से मवेशियों की मौत का सिलसिला जारी है. लगातार रही गायों की मौत से हड़कंप मचा हुआ है. जबकि प्रशासन और पशु विभाग पूरी तरह से मौन दिखाई दे रहा है. स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि गौशाला में पशुओं को उचित चारा, पानी और उपचार सहित देखभाल नहीं मिल पा रही है. गौशाला में करीब 110 गाय होने का दावा किया जा रहा है, पंरतु वर्तमान में गौशाला में महज 4 गौवंश मौजूद है. वह भी प्यास और चारे के अभाव में दम तोड़ रही है.

चारा के अभाव में दम तोड़ रहे मवेशी

श्योपुर जिला मुख्यालय से करीब 160 किलोमीटर दूर विजयपुर जनपद पंचायत की ग ग्राम पंचायत में एक गौशाला संचालित है. सरकार की तरफ से गौशालाओं में रहने वाले गोवंशों को चारा, पानी और सही समय पर उपचार करने के निर्देश है. लेकिन लगातार गायों की मौत के मामले सामने आने से प्रशासन की कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

गौशासा संचालक पर लगे गंभीर आरोप

गौशाला का एक वीडियो सामने आया है. वीडियो में एक मृत गौवंश गोबर के ढेर में दबा हुआ दिखाई दे रहा है. वहीं एक अन्य जिंदा गाय को पक्षी और कुत्ते नोच-नोचकर खाते नजर आ रहे हैं. स्थानीय लोगों ने वीडियो को प्रशासन के अधिकारियों को भी भेजा है. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाते हुए बताया है कि गौशाला के अंदर घायल अवस्था में पड़ी एक गाय को संचालक ने ट्रैक्टर ट्रॉली की मदद से बाहर फेंक दिया गया.

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी योजना

शासन द्वारा गोवंश की सुरक्षा और चारे-पानी के लिए भले ही लाखों रुपए प्रतिवर्ष खर्च किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण गोवंश के नाम पर योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती जा रही है. आरोप है कि विजयपुर की अधिकांश गोशालाओं में भले ही गोवंश दर्ज हो, लेकिन गोशालाएं या तो खाली पड़ी हैं या फिर वहां प्रयाप्त चारे के अभाव में गोवंश तड़पता नजर आ रहा है, जिससे उनकी मौत भी हो रही है.

गाय की सेवा के नाम पर लाखों की उगाही

प्रतिदिन एक गौवंश के भूंसे के लिए 25 रुपए, सेवादार के लिए 5 रुपए और पशु आहार के लिए 10 रुपए निर्धारित है. अगर गौशाला में 110 गायें मौजूद है तो प्रतिदिन 4400 रुपए और महीने में 1 लाख 32 हजार रुपए मिलते हैं. प्रशासन ने अनुबंध किया है कि एक गौशालाओं में 110 गायों को रखना अनिवार्य है.

जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग

गांवड़ी गांव निवासियों ने बताया कि गौशाला में दर्जनों पशु मर चुके हैं. कोई डॉक्टर या अधिकारी उसे देखने तक नहीं आया. अगर ऐसी स्थिति जारी रही तो और जानें जाएंगी. गौशाला परिसर में मृत पशुओं के शव खुले में पड़े रहने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है. दुर्गंध और गंदगी से आसपास के ग्रामीण परेशान हैं. इसको लेकर रहवासियों ने जिलाधिकारी और पशु चिकित्सा अधिकारी से तत्काल जांच कर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.

घायल गौवंश को खुले में फेंकने का आरोप

स्थानीय निवासी हरिओम कुशवाह ने आरोप लगाते हुए कहा, "गांवड़ी गांव में स्थित गौशाला में एक घायल गाय थी, जिसे गौशाला से महज 900 मीटर की दूरी पर खुले में ही फेंक दिया गया. घायल गौ वंश को मरने के लिए छोड़ दिया गया है."

पशु विभाग से घटना की शिकायत

एक अन्य ग्रामीण चंद्रभान यादव ने आरोप लगाते हुए कहा, "गौशाला संचालक द्वारा मृत पशुओं को दूर कही जंगल में गाड़ना चाहिए. वह गौशाला के अंदर और बाहर गोबर में ही गाय को गाड़ रहे हैं. जिसे कुत्ते नोच-नोच खा रहे हैं. घटना की शिकायत पशु विभाग के अधिकारियों से की गई है. पंरतु कोई सुनवाई नहीं हुई है."

खंड पशु चिकित्सा अधिकारी विजयपुर डॉक्टर जीएस गहलोत ने बताया, "हमें ग्रामीणों के द्वारा घटना की शिकायत मिली तो हमने मौके पर जाकर देखा है. इस दौरान हमें कई अव्यवस्था देखने को मिली है. गौशाला संचालक को नोटिस जारी किया गया है. गौशाला में मौजूद 110 गायों के कानों में टैग लगाए गए हैं. अगर उसी नंबर के टैग नहीं मिलेगे और स्पष्ट जबाव नहीं मिलेगा तो समूह का अनुबंध खत्म कर दूसरे को दिया जाएगा."