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श्योपुर का बैंचाई गांव बूंद-बूंद को मोहताज, सूखे पड़े हैंडपंप, पड़ोस के गांव से लाते हैं पानी

श्योपुर के बैंचाई में न तो नल जल योजना है और न पेयजल के अन्य विकल्प. हैंडपंप तो दर्जन से ज्यादा हैं लेकिन सूखे.

Sheopur water crisis
श्योपुर के बैंचाई गांव में ऐसे चलते हैं हैंडपंप (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 9, 2026 at 4:54 PM IST

2 Min Read
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श्योपुर : जिला मुख्यालय से करीब 120 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम बैंचाई. इस गांव में बिजली, सड़क जैसी व्यवस्थाएं तो हैं लेकिन जीवन की मूल जरूरत पानी के लिए लोग परेशान हैं. बैंचाई की आबादी 1200 है. प्रशासन इस आबादी को पेयजल तक उपलब्ध नहीं करवा पा रहा है. गांव नलजल योजना तो देखी तक नहीं है. गांव में 15 हैंडपंप हैं, लेकिन चालू हालात में एक ही है. उसमें भी दूषित पानी आता है. इसलिए इकलौते हैंड पंप का उपयोग नहीं कर पाते.

अपने साधन से भरकर लाते हैं पानी

ग्रामीण लवकुश कहते हैं "उन्होंने इस मामले में कई बार पीएचई विभाग के अधिकारियों को शिकायत भी दर्ज कराई. उनकी सुनवाई नहीं की गई है. केवल आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला है." सुरेंद्र धाकड़ कहते हैं "प्रशासन में कोई सुनवाई नहीं है. अधिकारियों को फोन लगाया तो बोला जाता है कि करवा देंगे. आज तक कोई यहां नहीं पहुंचा. कोई साइकिल, पैदल, अपने माध्यम से दूसरे गांव से पानी लाने को मजबूर है."

श्योपुर का बैंचाई गांव बूंद-बूंद को मोहताज (ETV BHARAT)

इंदौर कांड से नहीं लिया सबक

ग्रामीण धर्मवीर बताते हैं "पानी की कोई व्यवस्था नहीं है. कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है." इंदौर में इतना बड़ा मामला होने के बाद भी जिला प्रशासन ने अभी तक दूषित पानी और गांव-गांव और शहर, नगर कस्बे में पानी की जांच के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया.

बैंचाई के ग्रामीणों का कहना है कि वे लोग शिवपुरी जिले के सुमेड़ गांव और करीब 1.5 किलोमीटर दूर खेतों से पानी लाने को मजबूर हैं. अब ग्रामीणों को आदत हो गई है कि वह अपनी प्यास बुझाने के लिए सुबह से शाम तक अपने माध्यम से पानी की व्यवस्था करते हैं.

Sheopur water crisis
पूरे गांव में केवल एक हैंडपंप चालू, उसका भी पानी खराब (ETV BHARAT)

हैंडपंप ठीक कराने का आश्वासन

इस मामले में पीएचई विभाग एई एलपी सिंह ने बताया "जहां हैंडपंप का जल स्तर नीचे चला जाता है, वहां पर हैंडपंप को निकाल कर सिंगल फेस की मोटर डाल दी जाती है. हैंडपंप निकालने के बाद मोटर सुधार का काम ग्राम पंचायत करती है. उन हैंडपंप की लाइन में मोटर डाली गई है या नहीं, यह फिलहाल हम संबंधित अधिकारी से जांच करवा लेते हैं. विजयपुर में सब डिवीजन ऑफिस भी है, वहां पर एसडीओ बैठते हैं उनकी जानकारी में यह मामला होगा."