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"रिपोर्ट तो सार्वजनिक होती नहीं है..."; जानिये शीश महल और स्विमिंग पूल को लेकर क्या बोले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद?

वाराणसी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पत्रकारों से की बातचीत.

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Photo credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : February 26, 2026 at 4:50 PM IST

7 Min Read
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वाराणसी : शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि मैं तो आप लोगों से बताया था कि जो जांच टीम अपना काम कर रही है उसकी तरफ से आशुतोष ब्रह्मचारी ने प्रेसवार्ता करके सारी रिपोर्ट मीडिया को बताई थी. उन्होंने कहा कि हमने पहले ही कहा था जांच टीम क्या कर रही है, इसकी आख्या अगर शिकायतकर्ता के द्वारा पब्लिक में बताई जाएगी तो पुलिस का क्या प्रभाव रहेगा.

'जांच रिपोर्ट के बारे में पब्लिकली बता रहे हैं' : उन्होंने कहा कि आप लोग कह रहे हैं कि जांच रिपोर्ट के बारे में पब्लिकली बता रहे हैं तो यह रिपोर्ट तो सार्वजनिक होती नहीं है और होती भी है तो पुलिस विभाग के द्वारा होनी चाहिये, उनके माध्यम से क्यों आ रही है? क्या परमानेंट प्रवक्ता उत्तर प्रदेश पुलिस ने उनको बना लिया है? यह सवाल है.

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बयान (Video credit: ETV Bharat)

'मन में जो खुन्नस है उसे निकाल रहे हैं' : उन्होंने कहा कि शीश महल और स्विमिंग पूल की जो बातें सामने आ रहीं हैं, यह मौका है, जिसके मन में जो खुन्नस है अपने-अपने वक्तव्य के माध्यम से वह निकाल ले रहा है. उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि श्री विद्या मठ है. पूज्यपाद ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद की इच्छा पूरी करने के क्रम में निर्मित कराया गया था.

'1995 में इसका निर्माण हुआ था' : उन्होंने कहा कि 1995 में इसका निर्माण हुआ था, उसके बाद से यह मठ लोक निर्माण के कार्य निरंतर कर रहा है. पांच मंजिला यह भवन ऐसा नहीं है कि जो कुछ छिपाया जा सके. यह जगह दूर से ही दिखाई दे जाती है कि कितने मंजिल की है.

'कुछ भी छिपा हुआ नहीं है' : उन्होंने कहा कि यह जगह शीश महल होना यानी शीशे लगे होना, यह अच्छाई है या बुराई है. अगर हम किसी कमरे में बैठे हैं और यह पारदर्शी है तो फिर आश्रम के लिए यह अच्छी बात होनी चाहिए कि यहां कुछ भी छिपा हुआ नहीं है. शीशा लगा है, कोई भी कहीं से भी देख सकता है.

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बयान (Video credit: ETV Bharat)

'गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा' : उन्होंने कहा कि कोई छिपकर यहां कोई कार्य नहीं कर सकता, जो मठ का यह गुण है, कुछ भी छिपा हुआ नहीं है, उसको गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है. स्विमिंग पूल की जो बात है, तो हमने पहले ही बताया है कि हमारे गुरु जी महाराज का स्वास्थ्य जब ज्यादा खराब था, तो आयुर्वेद के जरिए उनको व्यायाम करने की सलाह दी गई थी. वह चलते समय गिर ना जाएं इसलिए वह गड्ढा बनाकर उसमें पानी भर गया था.

'स्वास्थ्य की रक्षा करना जिम्मेदारी थी' : उन्होंने कहा कि शंकराचार्य होने के नाते उनके स्वास्थ्य की रक्षा करना ही जिम्मेदारी थी. उनके स्वास्थ्य की रक्षा के लिए उसका निर्माण किया गया था. उसके साथ ही उसको समाप्त कर दिया गया, ऐसी स्थिति में किसी को घुसने नहीं दिया जाता, गोपनीय रखा गया है, यह भी कहा जा रहा है. यहां पर बहुत से लोगों ने श्री विद्या मठ के आंदोलन देखे हैं.

'पहले ऊपर ही होती थी मुलाकात' : उन्होंने पत्रकारों से कहा कि अपने पुराने साथी से पूछिए कि जब हम लोग नीचे मुलाकात नहीं करते थे, तब ऊपर ही मुलाकात होती थी. जहां पर गुरुजी रहते थे, वहीं पर उनका दर्शन भी होता था. वर्षों यही चल रहा था. बाद में हमारे शंकराचार्य होने के बाद बहुत लोग आने लगे, जिसकी वजह से हम लोगों से नीचे मिलने लगे. हमने एक लिफ्ट लगाई, जिससे बिजली का किराया बढ़ रहा था. इसलिए हमने नीचे बैठना शुरू किया.

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बयान (Video credit: ETV Bharat)

'कैमरा लेकर मत जाएं...' : उन्होंने कहा कि वृद्ध लोग ऊपर जाने में परेशान हो रहे थे. मैं यही कहना चाहता हूं, हमारा विद्यालय भी इसी जगह चलता है. छोटे-छोटे बच्चे रहते हैं, आप कैमरा लेकर मत जाएं, बाकी देखना चाहें तो देख सकते हैं कि मैं तो साफ कह रहा हूं अगर कोई बाहरी व्यक्ति भी देखना चाहता है तो जाकर देख सकता है कि ऊपर क्या है. यहां कोई ताला भी नहीं बंद होता है यहां सब कुछ खुला हुआ है.

उन्होंने कहा कि यह मेरे गुरु जी महाराज की तपोस्थली है. वहां पर गुरु जी महाराज की समाधि भी निर्मित है, पहले हम बार-बार जाते थे, लेकिन गुरु जी के ब्रह्मलीन होने के बाद उनकी जो ब्रह्मलीन होने की तिथि है, आराधना दिवस उस दिन ही हम लोग जाते हैं. उस दिन ही माता का पाठ होता है जो पीतांबरा पीठ है, वहां पर जो कह रहे हैं यह पूरी तरह से मनगढंत बात है. कहानी बनाई गई है.

उन्होंने कहा कि अग्रिम जमानत याचिका हमने दायर नहीं की है. हम अकेले नहीं हैं, हमारे साथ बहुत लोग हैं. हम जिस जगह बैठे हैं, वह ज्योतिष पीठ का आश्रम है. इसमें हम सनातनी को रिप्रेजेंट कर रहे हैं. हम शंकराचार्य हैं. हम एक संस्था हैं. संस्था को संरक्षित करने के लिए हमारा एक बहुत बड़ा वर्ग है. उसके लिए काम करता है. उन्होंने आरोप लगाया कि कोई हमें जेल में ले जाकर जहर की सुई लगा दिया तो.

उन्होंने आरोप लगाया कि जब 1966 में गौ माता का आंदोलन चला था, तब केंद्र की सरकार ने गौ भक्तों पर गोली चलाई थी और धर्म सम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज और पीठ के पूर्व आचार्य को जेल में डाल दिया गया था, जिसमें करपात्री जी महाराज को जेल में बहुत गंभीर चोटें आईं थीं. यह सब जेल में होता है, हम इसलिए अग्रिम जमानत याचिका डायल किए हैं, ताकि हम सुरक्षित रहें.

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उन्होंने कहा हमें कोई खतरा नहीं, अभी मार दीजिए. हम तो अपना श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान कर चुके हैं, लेकिन जो हमारे भक्त हैं जो सनातन धर्म से जुड़े लोग हैं, उनकी भावना का क्या करेंगे उनका संरक्षण भी तो हमें को करना है. उनकी भावनाओं को देखते हुए हमने इसको भी स्वीकार किया है.

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उन्होंने कहा कि हमने उनकी बातें सुनीं हैं. वह कह रहे हैं इसमें समाजवादी पार्टी इंवॉल्वड है, बहुजन समाज पार्टी इंवॉल्व है, लेकिन भाजपा इंवॉल्व है नहीं कह पाये. इसका मतलब है कि वह स्वयं भाजपा की तरफ से हैं. अब उनके ऊपर दबाव आया होगा कि भाजपा के ऊपर और साफ कर दो. अब भाजपा में भी दो भाजपा हो गई है.

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उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब ड्रामा सिर्फ और सिर्फ एक बड़े मामले को दबाने के लिए किया गया है. उन्होंने कहा कि एफस्टीन फाइल को दबाने के लिए शंकरचार्य की कहानी सुनने के लिए लगा दिया गया है. यह जनता की आवाज है. जनता कह रही है कि इस मुद्दे को इस तरह से उठाया गया है, जबकि इसमें कोई तत्व भी नहीं दिखाई दे रहा है.

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