वाराणसी में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की सभा में मधुमक्खियों का हमला, गौमाता को राष्ट्रमाता बनाने की उठी मांग
वाराणसी के रोहनिया में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की सभा में मधुमक्खियों के हमले से हड़कंप मच गया. शंकराचार्य ने इसे साजिश बताया.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : May 13, 2026 at 7:20 PM IST
वाराणसी: वाराणसी के रोहनिया में आयोजित ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की सभा में उस समय हड़कंप मच गया, जब मधुमक्खियों के झुंड ने अचानक श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया. कार्यक्रम स्थल पर मची अव्यवस्था और सुरक्षा कारणों के चलते सभा को समय से पहले ही स्थगित करना पड़ा.
हालांकि, इस बीच शंकराचार्य ने सभी से धैर्य और संयम से काम लेने की अपील की. सभा के दौरान हुए इस हमले पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि शुभ कार्यों में बाधा डालने के लिए कुछ लोगों ने जानबूझकर छत्ते को कुरेदा है.
किसी ने जानबूझकर कुरेदा छत्ता: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि कुछ लोगों को अच्छी चीजें पसंद नहीं आतीं, इसलिए ऐसी हरकत की गई है. उन्होंने वहां मौजूद श्रद्धालुओं से कहा कि आप सभी पत्थर की मूर्ति की तरह स्थिर बैठे रहें, मधुमक्खी आपको कुछ नहीं करेगी. शंकराचार्य इन दिनों गौरक्षा और गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए प्रदेशव्यापी यात्रा निकाल रहे हैं. उनकी यह 81 दिवसीय 'गविष्ठी गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा' गोरखपुर से शुरू होकर आज मिर्जापुर के रास्ते काशी पहुंची है.
403 विधानसभाओं तक पहुंचेगी यात्रा: यह महत्वपूर्ण यात्रा प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं से होकर गुजरेगी. शंकराचार्य ने पूर्व में कहा था कि काशी से गोरखपुर की ओर प्रस्थान करते हुए इस यात्रा के माध्यम से गौमाता की रक्षा के लिए आवाज उठाई जाएगी. रोहनिया की सभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे, लेकिन मधुमक्खियों के हमले ने अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया. इस विपरीत परिस्थिति में भी शंकराचार्य ने लोगों को विचलित न होने की सलाह दी और अपना संबोधन जारी रखा.
गौमाता को राष्ट्रमाता बनाने की मांग: शंकराचार्य ने इस दौरान उपस्थित जनसमूह को गौमाता की रक्षा का अटूट संकल्प भी दिलाया. उन्होंने सरकार से पुरजोर मांग की कि गौमाता को आधिकारिक रूप से 'माता' घोषित किया जाए और उन्हें पशुओं की श्रेणी से हटाया जाए. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गोवंश का मांस बेचना पूरी तरह बंद होना चाहिए, क्योंकि सरकार ने अब तक इस मांग पर ध्यान नहीं दिया है. शंकराचार्य के अनुसार सनातन धर्म में गौमाता केवल एक प्राणी नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और सृष्टि का आधार हैं.
शंकराचार्य ने दिलाया गौ रक्षा का संकल्प: उन्होंने जोर देकर कहा कि गौमाता हमारी अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और आध्यात्मिक चेतना का मुख्य केंद्र रही हैं. शंकराचार्य ने तंज कसते हुए कहा कि गौमाता की रक्षा के लिए भारत में जितना प्रयास हुआ, यदि उतना पाकिस्तान में होता तो वहां भी उन्हें राष्ट्रमाता घोषित कर दिया जाता. फिलहाल, इस हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा कर दी गई. भक्तगण अब इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए अगले गंतव्य की ओर प्रस्थान करेंगे.
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