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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद आखिर बार-बार क्यों ले रहे इस चर्चित IPS का नाम

शंकराचार्य ने अपने विरोधी आशुतोष ब्रह्मचारी के करीब होने का लगाया है आरोप.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : February 28, 2026 at 2:29 PM IST

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लखनऊ : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के एक आईपीएस अधिकारी का नाम चर्चा में है. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा पर आरोप है कि वे अशुतोष ब्रह्मचारी के करीबी हैं. उनके खिलाफ हैं. अविमुक्तेश्वरानंद ने एक फोटो दिखाकर अजय पाल शर्मा को कटघरे में खड़ा किया है. दूसरी ओर आशुतोष ब्रह्मचारी ने इसे एआई जेनरेटेड बता रहे हैं. आइए जानते हैं यूपी के चर्चित IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा के बारे में.

कौन हैं अजय पाल शर्मा : उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारियों में अजय पाल शर्मा जाना पहचाना नाम हैं. इन्हें उत्तर प्रदेश के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अधिकारियों में शुमार किया जाता है. अजय पाल शर्मा 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और पंजाब के रहने वाले हैं. रामपुर और नोएडा में एसपी रहते हुए अजय पाल शर्मा ने अपराधियों के खिलाफ खूब कार्रवाई की थी. कहा जाता है कि अजय पाल शर्मा ने अपने अब तक के कार्यकाल में करीब 15 अपराधी मार गिराए हैं.

डेंटिस्ट से बने आईपीएस : अजय पाल शर्मा 2011 में आईपीएस अधिकारी बने. इससे पहले वह डेंटल सर्जन थे. अजय पाल शर्मा के छोटे भाई अमित पाल शर्मा आईएएस अधिकारी हैं. वर्तमान में अजय पाल शर्मा प्रयागराज में एडिशनल पुलिस कमिश्नर कानून व्यवस्था के पद पर तैनात हैं. अजय पाल शर्मा डीआईजी रैंक के अधिकारी हैं.

अविमुक्तेश्वरानंद की मुश्किलें : बटुकों के साथ दुष्कर्म के आरोपों में घिरे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. जहां एक ओर कोर्ट के निर्देशों पर पुलिस ने उनके खिलाफ दुष्कर्म की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है, वहीं दूसरी ओर अविमुक्तेश्वरानंद इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए पहुंचे. फिलहाल अविमुक्तेश्वरानंद को फौरी राहत मिली है.

कोर्ट से राहत: एक दिन पहले शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिगों के यौन शोषण के मामले में अविमुक्तेश्वरानंद को राहत दी है. कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत अर्जी पर आदेश सुरक्षित करते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी. सुनवाई के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से आरोपों को गलत बताते हुए कहा गया कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है. यह भी दलील दी गई कि वादी आशुतोष का खुद का अपराधिक इतिहास है. सुनवाई के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित कर लिया और अविमुक्तेश्वरानंद व मुकुंदानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी.

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