बिहार की तरह धनबाद में भी ना गिर जाए पुल! शक्ति पुल के जर्जर पिलर ने लोगों की बढ़ाई चिंता
धनबाद के मुनीडीह में दामोदर नदी पर बना कपालघाट का शक्ति पुल जर्जर हालत में है. इससे जुड़ी नरेंद्र निषाद की रिपोर्ट.

Published : May 25, 2026 at 8:23 PM IST
|Updated : May 25, 2026 at 8:53 PM IST
धनबाद: जिले के पुटकी अंचल स्थित मुनीडीह में दामोदर नदी पर बना कपालघाट का शक्ति पुल अब लोगों के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है. करोड़ों रुपये की लागत से इस पुल को बने अभी ज्यादा समय भी नहीं हुआ, लेकिन इसकी स्थिति देखकर निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
दामोदर नदी पर बना कपालघाट का शक्तिपुल पुल इलाके के लोगों के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं था. पुल बनने से पहले लोगों को बोकारो और चंदनक्यारी जाने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता था. करीब 15 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी. पुल बनने के बाद लोगों का समय भी बचा और आने-जाने में आसानी भी हुई. व्यापार, शिक्षा और रोजमर्रा के कामकाज के लिए इस पुल का इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग करते हैं.
लेकिन अब यही पुल लोगों के लिए डर की वजह बनता जा रहा है. पुल के नीचे बने पिलरों में दरारें और क्षरण साफ नजर आने लगे हैं. नदी के तेज बहाव और लगातार हो रहे कटाव के कारण पिलरों का निचला हिस्सा कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है. कई जगहों पर कंक्रीट उखड़ चुकी है और लोहे की सरिया तक बाहर दिखाई देने लगी है.

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण के कुछ ही वर्षों में इस तरह की स्थिति सामने आना बेहद गंभीर मामला है. लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का सही तरीके से पालन नहीं किया गया. अगर समय रहते इसकी जांच और मरम्मत नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में कोई बड़ा हादसा हो सकता है.

ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से पुल की तकनीकी जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि हर दिन इस पुल से सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं. स्कूली बच्चे, मजदूर, व्यापारी और आम लोग इसी रास्ते से आवागमन करते हैं. ऐसे में यदि किसी दिन पिलर और कमजोर हो गए तो बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता.
वहीं कार्यपालक अभियंता बेनीलाल मरांडी का कहना है कि उन्हें पुल के जर्जन हालत में होने की जानकारी नहीं है. अभी यह मामला संज्ञान में आया है. इस मामले को देखा जाएगा. कार्यपालक अभियंता बेनीलाल मरांडी के अनुसार, वर्ष 2008 में कपालघाट में दामोदर नदी पर पुल निर्माण के लिए पहली बार 3 करोड़ 63 लाख 31 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी. इसके बाद वर्ष 2009 में योजना का नाम परिवर्तित कर चंदनकियारी–मुनीडीह पथ पर कपाटघाट पुल निर्माण योजना किया गया.

उन्होंने बताया कि बाद में सरकार द्वारा 4 करोड़ 45 लाख 77 हजार रुपये की अतिरिक्त प्रशासनिक स्वीकृति भी प्रदान की गई. पुल निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी स्थिति की जांच के लिए BIT मेसरा की टीम ने 2015–16 में स्थल निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी.
बेनीलाल मरांडी ने कहा कि निर्माण कार्य से पहले भूमि हस्तांतरण और पथ निर्माण के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र भी प्राप्त किया गया था. वहीं अवशेष कार्य के लिए सरकार ने पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति देते हुए 7 करोड़ 44 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की थी. उन्होंने जानकारी दी कि 24 मई 2017 को संवेदक के साथ एकरारनामा किया गया और निर्माण कार्य पूरा करने की समय सीमा 23 नवंबर 2018 निर्धारित की गई थी. विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार संवेदक द्वारा निर्धारित अवधि में कार्य पूरा कर लिया गया, जिसके बाद पुल का उद्घाटन किया गया.
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