शहडोल के सरकारी अस्पताल के डॉक्टर का कमाल, महिला में पकड़ी दुर्लभ बीमारी, मिली नई जिंदगी
शहडोल जिला अस्पताल के डॉक्टर ने महिला की दुर्लभ बीमारी पकड़ी, पुराने चिकित्सकीय रिकॉर्ड के गहन अध्ययन से पता चली इंसुलिनोमा नामक बीमारी.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : July 5, 2026 at 6:35 PM IST
शहडोल: शहडोल जिला अस्पताल के डॉक्टर्स ने एक जटिल एवं दुर्लभ बीमारी को डायग्नोज किया है और उसका उपचार करके एक महिला को नई जिंदगी दी है. महिला पिछले कई सालों से बीमार चल रही थी, जिसको बीमारी का सही इलाज नहीं मिल पा रहा था या यूं कहें की बीमारी डायग्नोज नहीं हो पा रही थी. महिला देश के कई महानगरों में इलाज करा चुकी थी, फिर भी राहत नहीं मिल पाई थी. थक हारकर महिला शहडोल जिला चिकित्सालय पहुंची थी, जहां उसकी दुर्लभ बीमारी का सफल इलाज किया गया.
महिला में मिली दुर्लभ बीमारी
शहडोल जिला अस्पताल के डॉक्टर ने कमाल कर दिखाया है. कई सालों से परेशान महिला और उसके परिजनों को राहत की सांस दी है और उसका सफल इलाज किया है. डॉक्टर ने बताया कि पिछले लगभग तीन वर्षों से एक महिला मिर्गी (एपिलेप्सी) समझकर देश के अलग अलग शहरों में अपना इलाज करा रही थी, लेकिन 56 साल की महिला की एक्चुअल बीमारी डायग्नोज नहीं हो पा रही थी.
कई टेस्ट कराने के बाद भी नहीं पता चल रही थी बीमारी
महिला लंबे समय से बार-बार दौरे पड़ने, घबराहट, अत्यधिक पसीना आना, चक्कर, बेहोशी, अनिद्रा, चिंता एवं अवसाद जैसी समस्याओं से जूझ रही थी. नागपुर, भोपाल एवं रायपुर सहित कई शहरों में महंगे उपचार, एमआरआई, ईईजी एवं अन्य जांच कराने के बावजूद बीमारी का सही कारण सामने नहीं आ सका था.

महिला के पुराने चिकित्सकीय रिकॉर्ड का गहन अध्ययन
शहडोल जिला अस्पताल में न्यूरो साइकियाट्रिस्ट एवं नशा मुक्ति विशेषज्ञ डॉ. सुमित दास गुप्ता (एमबीबीएस, एमडी मनोरोग) ने मरीज की विस्तृत जांच एवं पुराने चिकित्सकीय रिकॉर्ड का गहन अध्ययन किया. जांच के दौरान पाया गया कि महिला के दौरे सामान्य मिर्गी से अलग थे और पुराने रिकॉर्ड में कई बार रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) का स्तर असामान्य रूप से कम दर्ज किया गया था.
इंसुलिनोमा (Insulinoma) नामक दुर्लभ बीमारी निकली
इसके बाद कराई गई विशेष जांचों में मरीज के शरीर में इंसुलिन और सी-पेप्टाइड का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया और सीईसीटी (CECT Abdomen) जांच में अग्न्याशय (पैंक्रियास) के पास लगभग 18×17 मिमी का ट्यूमरनुमा घाव दिखाई दिया. चिकित्सकीय परीक्षणों के आधार पर महिला में इंसुलिनोमा (Insulinoma) नामक दुर्लभ बीमारी की पुष्टि हुई, जो लगातार ब्लड शुगर कम होने का कारण बन रही थी.
बीमारी डायग्नोज होने के बाद इलाज शुरू
सही बीमारी की पहचान होने के बाद अनावश्यक एंटी-एपिलेप्टिक दवाओं में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार कमी की गई और मरीज में हाइपोग्लाइसीमिया के शुरुआती लक्षण पहचानने, हमेशा ग्लूकोज या ग्लूकोज टैबलेट साथ रखने एवं आवश्यक उपचार संबंधी परामर्श दिया गया. इसके साथ ही अनिद्रा एवं अवसाद के लिए भी उपचार शुरू किया गया.
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कुछ समय के फॉलो-अप के दौरान मरीज की स्थिति में बहुत ही बेहतर सुधार देखा गया और महिला में पहले की तरह दौरे आना बंद हो गए. मरीज की मानसिक एवं शारीरिक स्थिति में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला.
परिजनों में खुशी, डॉक्टर बोले सही समय पर सही इलाज जरूरी
मरीज के पति मनोज ने जिला अस्पताल के चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि "सालों तक अलग-अलग शहरों में उपचार कराने के बावजूद बीमारी का सही कारण सामने नहीं आया था, लेकिन शहडोल जिला अस्पताल में सही दिशा में जांच होने से उनकी पत्नी को नई जिंदगी और भविष्य के प्रति नई उम्मीद मिली है."
डॉ. सुमित दास गुप्ता ने कहा कि "हर दौरा मिर्गी नहीं होता. यदि मरीज में बार-बार ब्लड शुगर कम होना, अत्यधिक पसीना आना, घबराहट, धड़कन तेज होना और बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो अन्य संभावित कारणों की भी व्यवस्थित जांच आवश्यक है. समय पर सही निदान से मरीज को अनावश्यक उपचार और मानसिक पीड़ा से बचाया जा सकता है."
उन्होंने कहा कि छोटे शहरों के सरकारी अस्पतालों में भी अगर विस्तृत इतिहास, सावधानीपूर्वक परीक्षण एवं तार्किक चिकित्सकीय दृष्टिकोण अपनाया जाए तो जटिल एवं दुर्लभ बीमारियों का सफलतापूर्वक निदान संभव है.

