6 महीने का गर्भ, 800 ग्राम का बच्चा, 2 महीने इलाज कर डॉक्टर ने बचाई जान
शहडोल जिला अस्पताल ने लौटाई एक परिवार की खोई उम्मीद, उनके लिए डॉक्टर बने भगवान, मां और बच्चे दोनों की जिंदगी बचाई.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 6, 2026 at 2:03 PM IST
|Updated : January 6, 2026 at 2:33 PM IST
शहडोल: डॉक्टर को धरती का भगवान माना जाता है. ये बातें तब सच साबित हो जाती हैं, जब बहुत ही क्रिटिकल केसेस सामने आते हैं. जब सभी उम्मीद छोड़ देते हैं और फिर डॉक्टर एक उम्मीद के साथ अपनी ड्यूटी में लगे रहते हैं. उस उम्मीद को साकार कर दिखाते हैं. एक ऐसा ही मामला शहडोल जिला अस्पताल से सामने आया है. जहां डॉक्टर्स ने कमाल कर दिखाया है. परिजन कहते हैं यही तो हैं धरती के भगवान.
जब सभी ने छोड़ी उम्मीद, तब डॉक्टर ने जगाई आस
शहडोल जिला अस्पताल में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर बृजेश पटेल बताते हैं कि "एसएनसीयू में उनके पास एक बड़ा चैलेंजिंग केस सामने आया था. जिसमें एक बच्चा एक्सट्रीमली प्रीमेच्योर था. उसका वजन मात्र 800 ग्राम था और अराउंड सिक्स मंथ में ही इमरजेंसी डिलीवरी कराई गई थी. डॉक्टर बताते हैं कि श्वेता नाम की महिला जिन्हें करीब 6 महीने का गर्भ था और मां सीवियर एक्लेंमसिया से ग्रसित थी. जिसमें मां का बीपी ज्यादा रहता है, ऐसे केसे में मां को झटके भी आने के चांसेज हो जाते हैं और जान को खतरा भी रहता है.
उनका बीपी 220 के लगभग था, उस समय कंडीशन ये थी की मां और बच्चे में से किसी एक को बचाया जा सकता था. फिर परिजनों ने मां को बचाने का फैसला लिया. प्रेगनेंसी को आगे बढ़ाने के फैसले को रोकना था. इमरजेंसी ऑपरेशन किया गया. जहां बच्चे का वजन मात्र 800 ग्राम था. बच्चा एक्सट्रीमली प्रीमेच्योर था. इसके बाद बच्चे का इलाज शहडोल जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू में शुरू किया गया. अभी लगभग 2 महीने के बाद बच्चे का वजन 1 किलो 525 ग्राम के ऊपर हो चुका है. बच्चा पूरी तरह से सुरक्षित है.
अब वो अपनी मां के साथ घर भी जा चुका है. डॉ बृजेश पटेल कहते हैं कि यह बहुत ही बड़ी चुनौती थी, क्योंकि बच्चे का वजन बहुत ही कम 800 ग्राम था. ऐसे मामले में जब बच्चे का वजन 1000 ग्राम से कम होता है, तो बचाना बहुत मुश्किल काम होता है, लेकिन सब कुछ भगवान के हाथ में है. हमारे स्टाफ ने हमने अपनी तरफ से कोशिश की और उसी का नतीजा है कि बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है और अपने मां के साथ घर जा चुका है."

परिजनों ने कहा डॉक्टर ने खोई उम्मीद लौटाई
बच्चे की मां श्वेता सिंह बताती हैं कि "वह लोग अमलाई सोडा फैक्ट्री के रहने वाले हैं. 8 नवंबर को वे डॉक्टर को दिखाने आए थे, तभी उनकी बीपी बहुत हाई थी और सूजन भी था. बताया गया कि बच्चे और मां दोनों को खतरा है. उन्हें एडमिट किया गया. हालात बहुत गंभीर थे. सोनोग्राफी के बाद कहा गया कि बच्चे और मां दोनों में से किसी एक को बचा पाएंगे, फिर बोला गया कि बच्चे को नहीं बचा पाएंगे. फिर डॉक्टर बृजेश पटेल के बारे में जानकारी मिली.
हम शहडोल जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू वार्ड में बच्चे को लेकर आए. जब डिलीवरी कराई गई तो बच्चा लगभग 6 महीने का था. श्वेता सिंह बताती हैं कि वो तो अपने बच्चे को देखने के लिए 12 से 13 दिन बाद आई थी, क्योंकि ऑपरेशन हुआ था. वो कहती हैं कि बच्चा इतना छोटा था कि उसकी आंखें, नाक, कान कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था, लेकिन अब जब वो अपने बच्चे को पूरी तरह से स्वस्थ देख रही हैं, तो बहुत खुश हैं. उनके चेहरे पर एक अलग ही चमक देखने को मिलती है. वो कहती हैं कि उन्होंने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी, लेकिन डॉक्टर उनके लिए भगवान बनकर आए."
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जब लेना पड़ा बड़ा फैसला
बच्चे के पिता बताते हैं कि "जब उनके सामने ऐसे हालात आए, कि दोनों की जान खतरे में है. किसी को बचाना होगा, तो हमने मां को बचाने का फैसला लिया. उन्होंने कहा कि हमने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी लेकिन डॉक्टर ने एक प्रयास किया और आज उनका बच्चा उनके हाथों में है. शहडोल जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू वार्ड की तारीफ करते हुए बच्चे के पिता कहते हैं कि यहां बच्चों की बहुत अच्छी केयर हुई, अच्छा इलाज हुआ और उसी का नतीजा है कि आज जिस उम्मीद को खो चुके थे, वो बच्चा उनके हाथों में पूरी तरह से स्वस्थ है.

