कड़ाके की ठंड में आदिवासियों का सहारा कुम्हड़ौरी बरी, सब्जी के साथ दवा का करे काम
ठंड में विंध्य के ग्रामीण अंचल में कुम्हड़ौरी बरी बनाने का होता है क्रेज, क्या होती हैं कुम्हड़ौरी बरी? रेसिपी से लेकर हेल्थ बेनिफिट्स जानिए.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 8, 2026 at 5:11 PM IST
रिपोर्ट: अखिलेश शुक्ला
शहडोल: मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. ठंड में विंध्य क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में कुम्हड़ौरी बरी बनाई जाती है. यह एक ऐसी बरी है जो लोगों के संकट का सहारा होता है. इसे एक तरह से ऑलराउंडर खाद्य पदार्थ भी कह सकते हैं. सब्जी का सब्सीट्यूट मान सकते हैं. सेहत के लिए भी शानदार होता है. सर्दी खांसी का अचूक नुस्खा है. कुछ सब्जियों के साथ मिला दो तो स्वाद बढ़ जाता है. कुम्हड़ौरी बरी की यही खासियत उसे विशेष बनाती है.
कुम्हड़ौरी बनाना अब बन गई परंपरा
विंध्य क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में कुम्हड़ौरी बरी को तैयार करना अब एक परंपरा बन चुका है. सबसे बड़ी बात यह है कि, ठंड का सीजन जैसे ही शुरू होता है इसे बनाने की तैयारी शुरू हो जाती है. क्योंकि इसी सीजन में सफेद कद्दू जिसे लोकल भाषा में बरिहा भी बोलते हैं उसके फल भी आते हैं. यह कितने भी महंगे दाम में मिलें पर इसे लोग खरीदकर बरी तैयार करते हैं. ये सदियों से बनती आ रही हैं. महिलाएं इसकी तैयारी बड़े ही उत्साह के साथ करती हैं. इसे बनाने के लिए महिलाएं एक दूसरे के घरों में सहयोग भी करती हैं. ग्रामीण अंचलों में इस बरी को तैयार करना बहुत बड़ा अचीवमेंट माना जाता है.
कुम्हड़ौरी बरी कैसे करें तैयार
विंध्य की अनोखी कुम्हड़ौरी बरी तैयार कैसे की जाती है? इसे लेकर इंद्रवती गुप्ता बताती हैं, ''इसकी तैयारी काफी पहले से लोग करने लगते हैं. ठंड का सीजन जब शुरू होता है तो सबसे पहले सफेद कद्दू की व्यवस्था करते हैं. फिर उसके बाद उड़द दाल की व्यवस्था की जाती है. गांव के ही आस पड़ोस की महिलाएं भी इकट्ठा हो जाती हैं और फिर उसे बनाती हैं.''
उर्मिला शर्मा कहती हैं कि, ''इस बरी को तैयार करने के लिए सबसे पहले उड़द दाल को साफ करके धो लें और फिर उसे पीस लें. अगर इसे सिलबट्टे से पीसें तो स्वाद अच्छा आता है. सफेद कद्दू को बारीक करके उसी तय मात्रा के अनुसार मिक्स कर दें. फिर उसमें तरह-तरह के मसाले डाल दें. इस बरी को बनाते समय लहसुन नहीं डाला जाता है. बरी बनाकर सुखाने के लिए रख दें. इसमें ओस की बूंदे पड़ना भी जरूरी होता है. लेकिन इस बात का विशेष ख्याल रखें की ये अच्छी तरह से सूख जाए नहीं तो इसमें कीड़े भी लग जाते हैं.''

हरे छींद से तैयार होती है सुखाने वाली जगह
कुम्हड़ौरी बरी को सुखाने के लिए हरे छींद से विशेष चटाई बनाई जाती है. इसे सुखाने के लिए ये रिवाज भी बन गया है, जो आज भी चल रहा है. लोग कुम्हड़ौरी बरी को सुखाने के लिए जंगल में जाकर छींद काट कर लाते हैं, उसे चटाईनुमा बनाते हैं. उसमें बांस के डंडे भी लगाए जाते हैं जिससे उसका बेस भी बन जाता है. फिर इस चटाई पर बरी को सुखाने के लिए रखा जाता है. इंद्रवती गुप्ता कहती हैं कि, ''आज भी 90% लोग इसी में बरी को सुखाते हैं. हालांकि कुछ लोग अब कपड़े में भी सुखा लेते हैं. लेकिन परंपरा यही है कि छींद की चटाई बनाकर ही इसको सुखाया जाए, इसके पीछे कई वैज्ञानिक तथ्य बताए गए हैं.''

छींद में बरी सुखाने के फायदे
गांव की रहने वाली इंद्रवती गुप्ता बताती हैं कि, ''छींद के पत्तों में बरी सुखाने के कई फायदे बताए गए हैं. पहला फायदा ये है कि इसमें हवा का संचार दोनों तरफ से होता है. क्योंकि जब इसे बांस के डंडे लगाकर इसमें छींद के पत्ते लगाकर तैयार किया जाता है तो उसमें कई तरह के छेद होते हैं. पत्तियां भी इसकी उस तरह की होती है इसमें हवा आर पार होती रहती है. दूसरा इसमें से बरी आसानी से निकल जाती है, इसके पत्तों में चिपकती नहीं है. क्योंकि छींद के पत्ते थोड़े चिकनी और कठोर होते हैं.
सूखने के बाद पत्ते खुद ब खुद बरी को छोड़ देते हैं. छींद के पत्तों की अपनी एक धीमी प्राकृतिक सुगंध होती है. जब तेज धूप में बरी सूखती है तो पत्तों का हल्का अर्क और उसकी सौंधी खुशबू इसमें आ जाती है. जिससे सब्जी का स्वाद और बढ़ जाता है. छींद के पेड़ और उसके पत्तों को प्राकृतिक रूप से काफी शुद्ध माना गया है. छींद की चटाई बरी को धूल मिट्टी से भी बचाती है. फफूंद लगने का खतरा भी कम हो जाता है. कोशिश करें कि एक मुलायम कपड़े से इसे ढककर रखें, ताकि धूल मिट्टी से ये बची रहे और हेल्दी बरी तैयार हो सके.''

- छोटे सेब जैसा दिखने वाला बेर, कम जमीन में देता है डबल मुनाफा, बाजार जाते ही छूमंतर
- किसानों के बीच ग्राफ्टेड बैगन का क्रेज, जानें क्यों धान गेहूं छोड़कर बैगन के पीछे भाग रहे किसान
- मिल गया ग्रामीणों की ताकत का राज!, किसी सुपरफूड से कम नहीं है ये खरपतवार
सर्दी में फायदेमंद होता है सूप
उर्मिला शर्मा और इंद्रवती गुप्ता बताती हैं कि, ''इस बरी को औषधीय नुस्खे के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है. जब किसी को सर्दी हो तो इस बरी का सूप बनाकर पी लें तो सर्दी गायब हो जाती है. सोनू द्विवेदी बताते हैं कि, ''कुम्हड़ौरी बरी का स्वाद भी बहुत शानदार होता है. सबसे बड़ी बात यह है कि जब कभी आपके घर में सब्जी नहीं है तो उसका पानी तैयार कर लें, वही सब्जी का काम कर जाती है. ग्रामीण अंचलों में गरीबों का सहारा भी होता है. अगर आपके पास दाल नहीं है तो बरी पानी बना लें. यह सेहत के लिए भी बेहतर होता है. ठंड के सीजन में बरी के पानी से चावल भी खा सकते हैं. दाल बनाने की जरूरत ही नहीं है.

दाल महंगी होने पर ग्रामीण अंचलों के घरों में बरी के पानी का खाने में इस्तेमाल करते हैं. जो सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है, इसके अलावा ये कई तरह की सब्जियों में भी मिलाया जाता है. जैसे चना भाजी बनाते समय डालते हैं. पपीता की सब्जी बनाते समय डालते हैं. कई सब्जियों में बरी डालने से सब्जी का स्वाद बढ़ जाता है.''

