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30 साल से नहीं बना गांव का रोड, गुस्साए ग्रामीणों ने कीचड़ में डूबे सड़क पर रोप दी धान

शहडोल के बुढार जनपद के गलहथा गांव का मामला. आबादी से मुख्य मार्ग को जोड़ने वाली 700 मीटर सड़क कीचड़ में डूबी. अखिलेश शुक्ल कीरिपोर्ट

Protest by planting paddy in mud
कीचड़ में धान की रोपाई कर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : August 27, 2026 at 9:44 PM IST

2 Min Read
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शहडोल:आदिवासी बहुल शहडोल जिले में अभी भी लोग बुनियादी सुविधाओं को लेकर तरस रहे हैं. कई जगहों पर बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं. जिले के कई गांव ऐसे हैं जहां कई सालों से सड़क ही नहीं बनी.

मानसून सीजन में सड़क की समस्याओं के मामले उभरकर सामने आने लगते हैं. बारिश के मौसम में बदहाल सड़कों की पोल खुलकर सामने आने लगी है. कई गांव तो ऐसे हैं जो आज भी मुख्य मार्गो से जुड़ नहीं सके हैं. लोग कीचड़ भरे रास्तों से चलने को मजबूर हैं. ऐसे ही एक मामले में शहडोल के बुढार जनपद के गलहथा गांव के लोगों ने खराब सड़क से परेशान होकर सड़क के कीचड़ में ही धान की रोपाई कर दी. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहा है.

ग्रामीणों ने कीचड़ वाले सड़क पर रोप दी धान (ETV Bharat)

कीचड़ में धान की रोपाई कर विरोध जताते हुए सड़क बनाने की मांग

लोगों का कहना है उनके गांव से मुख्य मार्ग को जोड़ने वाली सड़क ही नहीं है. बरसात में सड़क कीचड़ से सराबोर हो जाती है. आबादी से मुख्य मार्ग को जोड़ने वाली लगभग 700 मीटर सड़क कीचड़ में डूब जाती है. लोगों ने सड़क के कीचड़ में धान की रोपाई कर विरोध जताते हुए सड़क बनाने की मांग की है.

Protest by planting paddy in mud
कीचड़ में धान की रोपाई कर प्रदर्शन (ETV Bharat)

30 साल से नहीं बनी सड़क, कीचड़ में धान की रोपाई

गांव के रहने वाले मनोज सिंह कहते हैं "बच्चों को इसी मार्ग से स्कूल जाना पड़ता है. हम 30 साल से लगातार सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक सड़क नहीं मिल पाई है. जिससे हम परेशान हैं. बरसात में तो ऐसी हालत हो जाती है, कि कीचड़ में डूबकर आना जाना पड़ता है. रास्ते की बदहाली से नाराज लोगों ने सड़क पर ही धान की रोपाई कर दी."

क्यों नहीं बन पाई सड़क ?

मामले को लेकर बुढार जनपद के सीईओ राजीव लघटे ने बताया "2 साल पहले मुख्यमंत्री अधोसंरचना निर्माण योजना से ग्रेवल रोड निर्माण का प्रपोजल भेजा गया था. भोपाल से शासन स्तर से मंजूरी मिलने का इंतजार है. ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी को देखते हुए वैकल्पिक इंतजाम के लिए इंजीनियरों को मौके पर भेजा गया है. जल्द ही कुछ ना कुछ व्यवस्था की जाएगी."